दरभंगा, देशज टाइम्स। संस्कृत विश्वविद्यालय एवम श्यामा मन्दिर न्यास समिति के संयुक्त तत्वावधान में विविध धर्म व अध्यात्म विषय पर आयोजित दस दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन करने के बाद कुलपति प्रो. सर्व नारायण झा ने कहा कि आस्था व दृढ़ विश्वास के साथ भक्ति मार्ग अपनाकर ही सुगमता से भगवान की प्राप्ति हो सकती है। ऐसा धार्मिक व पौराणिक साक्ष्य व आधार भी है। यह जानकारी देते हुए पीआरओ निशिकांत ने देशज ग्रुप ऑफ प्रिंट के देशज टाइम्स को बताया कि प्रसिद्ध लोक गायिका डॉ. ममता ठाकुर के भजन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
दीप प्रज्वलन के साथ कुलपति ने कहा कि मन व बुद्धि में हमेशा द्वंद्व चलता रहता है।उन्होंने इसे और स्प्ष्ट करते हुए समझाया कि हमें बुद्धि मिली है सांसारिक कार्यों में लगाने के लिए जबकि मन मिला है भगवान भक्ति में लगाने को। इन दिनों हो रहा है ठीक उल्टा। सांसारिक कार्यों में बृद्धि के बदले हम सभी ने मन को लगा दिया है और भगवान में मन के बदले बुद्धि लगा दी है। नतीजा यह हुआ है कि आस्था हिल गयी है। भक्ति नष्ट हो गया है। स्वाभाविक है कि ऐसे में सुख के बदले दुख बढ़ रहस्य है।रामनवमी के अवसर पर शुरू
इस कार्यशाला की सफलता की कामना करते हुए वीसी ने तुलसीदास के लिखे चौपाये को रेखांकित कर भगवान राम को सुख का सागर बताया। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि सुख व खुशी के लिए हर कोई भगवसन राम की आराधना करते हैं। इसी क्रम में कुलपति ने रामायण व गीता के ढेर सारे सन्दर्भो को परिभाषित करते हुए उपस्थित भक्तजनों को अपने आध्यात्मिक सम्बोधन से मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के संयोजक व धर्मशास्त्र विभाग के प्रो. श्रीपति त्रिपाठी के मंच संचालन में सम्पन्न कार्यशाला में डीन प्रो. शिवाकांत झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मौके पर डॉ. शशिनाथ झा, डॉ जयशंकर झा, चौधरी हेमचन्द्र राय, मिथिलेश ठाकुर,अखिलेश मिश्र,पवन सहनी, सतीश शर्मा,विनोद कुमार झा बहुत सारे भक्त मौजूद थे।








You must be logged in to post a comment.