spot_img

Jaya Ekadashi Vrat: माघ शुक्ल जया एकादशी व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व

spot_img
- Advertisement -

Jaya Ekadashi Vrat: हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है। माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली जया एकादशी विशेष पुण्यफलदायी मानी जाती है।

- Advertisement -

Jaya Ekadashi Vrat: माघ शुक्ल जया एकादशी व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व

Jaya Ekadashi Vrat: हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है। माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली जया एकादशी विशेष पुण्यफलदायी मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस पवित्र व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से व्यक्ति को ब्रह्महत्या जैसे महापापों से मुक्ति मिलती है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत समस्त कष्टों का नाश करने वाला और जीवन में सुख-शांति लाने वाला है। इस दिन भक्तजन भगवान विष्णु की आराधना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति जया एकादशी का व्रत रखता है, उसे पिशाच योनि का भय नहीं रहता और वह मृत्यु के उपरांत स्वर्गलोक को प्राप्त करता है। इस व्रत का माहात्म्य अतुलनीय है और यह आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त करता है।

- Advertisement -

जया एकादशी व्रत का महत्व और कथा

जया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को महान पुण्यफल की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण में इस व्रत के महत्व का विस्तार से वर्णन किया गया है। मान्यता है कि यह व्रत व्यक्ति को प्रेत योनि के कष्टों से मुक्ति दिलाता है और उसे स्वर्ग में स्थान दिलाता है।

- Advertisement -

जया एकादशी की पवित्र व्रत कथा

प्राचीन काल में स्वर्गलोक में देवराज इंद्र का राज्य था। एक बार नंदनवन में इंद्र अपनी अप्सराओं के साथ विहार कर रहे थे। गंधर्व गायन कर रहे थे और गंधर्वियों नृत्य कर रही थीं। उस सभा में माल्यवान नाम का एक गंधर्व अपनी प्रिय पुष्यवती के साथ उपस्थित था। उसी समय एक राक्षस भी वहां उपस्थित था, जिसके कारण माल्यवान और पुष्यवती का मन विचलित हो गया। नृत्य करते समय पुष्यवती माल्यवान को देखकर मोहित हो गई और अपनी ताल व सुर भूल गई। इसी प्रकार माल्यवान भी पुष्यवती को देखकर अपने सुर व ताल खो बैठा।

इस अनवधानता पर देवराज इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने दोनों को शाप दिया कि वे मृत्युलोक में जाकर पिशाच योनि को प्राप्त करें। इंद्र के शाप से दोनों अत्यंत दुःखी हुए और पिशाच बनकर हिमालय पर्वत पर भटकने लगे। दिन-रात उन्हें भूख-प्यास सताती थी और ठंड से उनका शरीर कांपता रहता था। एक दिन संयोगवश माघ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का दिन आया। उस दिन वे दोनों एक वृक्ष के नीचे बैठे थे और ठंड से कांप रहे थे। उन्होंने कोई भी अन्न-जल ग्रहण नहीं किया और न ही कोई पाप कर्म किया। रात्रि में उन्हें नींद नहीं आई और वे भगवान विष्णु का स्मरण करते रहे।

अग्नि में घी डालने से वह प्रज्वलित होती है। उसी प्रकार, जया एकादशी के दिन अनजाने में हुए इस उपवास और जागरण से उन्हें पुण्य प्राप्त हुआ। अगले दिन सूर्योदय होते ही उनका पिशाच शरीर दिव्य रूप में परिवर्तित हो गया। वे दोनों अपने मूल स्वरूप में वापस आ गए और स्वर्गलोक को लौट गए। देवराज इंद्र ने जब उन्हें देखा तो आश्चर्यचकित होकर कारण पूछा। माल्यवान ने उन्हें जया एकादशी के व्रत का प्रभाव बताया। यह सुनकर देवराज इंद्र अत्यंत प्रसन्न हुए और बोले कि भगवान विष्णु के भक्तों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। इस प्रकार जया एकादशी के व्रत के प्रभाव से माल्यवान और पुष्यवती पिशाच योनि से मुक्त होकर पुनः स्वर्गलोक को प्राप्त हुए।

जया एकादशी व्रत की सरल पूजा विधि

जया एकादशी का व्रत विधि-विधान से करने पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

  • दशमी तिथि की रात्रि से ही सात्विक भोजन ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • एकादशी के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • अब भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • एक चौकी पर भगवान विष्णु या श्री कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें।
  • उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं और पीत वस्त्र अर्पित करें।
  • धूप, दीप, पुष्प, चंदन, अक्षत और तुलसी दल से उनकी पूजा करें।
  • भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं।
  • एकादशी व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
  • रात्रि में जागरण करें और भगवान के भजन-कीर्तन करें।
  • द्वादशी तिथि को प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें और किसी ब्राह्मण को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें।
  • इसके बाद स्वयं पारण कर व्रत का समापन करें।

जया एकादशी पर मंत्र जाप और उपाय

जया एकादशी के दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

इस मंत्र का जाप तुलसी की माला से कम से कम 108 बार करें। इस दिन ‘आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।’ गाय को हरा चारा खिलाना, गरीबों को अन्न दान करना और जल सेवा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

जया एकादशी का यह पवित्र व्रत कथा-श्रवण और विधि-विधान से पूजन करने वाले भक्तों को निश्चय ही समस्त पापों से मुक्ति और अंत में मोक्ष प्रदान करता है। भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

दरभंगा में सूखे से फटी धरती, किसानों के कलेजे भी फट रहे! सामने आया दिल दहला देने वाला दर्द

Bihar drought: बिहार के कमतौल और बेलबाड़ा जैसे इलाकों में सूखे ने किसानों की कमर तोड़ दी है। सावन में बारिश न होने से धान की फसल सूख रही है, खेत फट गए हैं। किसान बोले- 'खाने के#BiharDrought,#FarmersDistress,#KamtoulNews

बड़ी खबर Bihar Panchayat News: बिहार में पंचायत प्रतिनिधियों के परिवार को मिलेंगे ₹5 लाख रुपये, जानिए कब से लागू होगा नया नियम!

Bihar Panchayat News: बिहार सरकार ने पंचायत प्रतिनिधियों के परिवारों के लिए बड़ा ऐलान किया है। कार्यकाल के दौरान मृत्यु होने पर आश्रित परिवार को 5 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान मिलेगा।#BiharPanchayatNews,#BiharGovernment,#PanchayatRepresentative

Darbhanga Police में बड़ा एक्शन: SSP जगुनाथ रेड्डी ने दी 2 पुलिस अधिकारी को कड़ी सजा, जानिए क्यों हुई PC प्रभारी और ASI पर...

Darbhanga Police: दरभंगा के वरीय पुलिस अधीक्षक ने घनश्यामपुर थाना का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान लापरवाही बरतने वाले दो पुलिसकर्मियों को तत्काल निंदन की सजा मिली। लंबित वारंट और#DarbhangaPolice,#BiharNews,#PoliceAction

दरभंगा में 1863 लीटर शराब जमींदोज – चला बुलडोजर, देखकर उड़ गए तस्करों के होश! कमतौल SHO संजीव चौधरी ने क्या कहा

Kamtaul Liquor Ban: कमतौल थाना परिसर में गुरुवार को 1863 लीटर से अधिक देसी और विदेशी शराब को नष्ट किया गया। यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश पर की गई, जिसमें राजस्व अधिकारी और थानाध्यक#KamtaulNews,#BiharLiquorBan,#JaleBlock