Shekhar Suman: मशहूर अभिनेता शेखर सुमन ने अपने राजनीतिक सफर को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। उन्होंने साफ कहा है कि किसी भी राजनीतिक दल में शामिल होना उनकी ‘सबसे बड़ी गलती’ थी। यह चौंकाने वाला खुलासा उन्होंने अपने नए टॉक शो ‘शेखर टुनाइट’ के बाद एक इंटरव्यू में किया है।







शेखर सुमन के इस बयान के बाद कांग्रेस पार्टी ने उनके एक वीडियो को अपने एक्स हैंडल पर साझा करते हुए सवाल उठाया है। इस वीडियो में शेखर सुमन एक राजा की कहानी सुना रहे हैं, जिसने सच्चाई का सामना न करने के लिए आईना तोड़ दिया था। कांग्रेस ने पूछा है कि आखिर वह राजा कौन है, जिससे इस मामले ने और गरमाहट पकड़ ली है।
शेखर सुमन ने बताया ‘राजनीतिक करियर’ एक भूल
अपने इंटरव्यू में शेखर सुमन ने बेबाकी से कहा कि पार्टी जॉइन करना उनकी गलती थी। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके जीवन में ऐसा दो बार हुआ, जब मुश्किलों में फंसकर उन्होंने वो काम किया जो वे नहीं करना चाहते थे। इस बयान से यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि शेखर सुमन बीजेपी पार्टी में शामिल नहीं होना चाहते थे, जिसे उन्होंने अपनी पहली गलती बताया है।

शेखर सुमन के टॉक शो ‘शेखर टुनाइट’ के पहले एपिसोड में उन्होंने राजनीति पर व्यंग्य करते हुए एक भाषण दिया था। हालांकि, उस भाषण में उन्होंने सीधे-सीधे किसी दल या घटना का जिक्र नहीं किया था, लेकिन इंटरव्यू में उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा पर खुलकर बात की।
’24 घंटे बीजेपी सदस्य, कांग्रेस में मजबूरी से’
जब इंटरव्यू लेने वाले ने पूछा कि क्या ‘शेखर टुनाइट’ में नितिन गडकरी जैसे बीजेपी नेताओं को लाना आसान है, तो शेखर सुमन का जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा, ‘मैं सिर्फ 24 घंटे के लिए बीजेपी का सदस्य था।’
उन्होंने 2011 के विधानसभा चुनावों का भी जिक्र किया, जब उन्होंने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था।

शेखर सुमन ने बताया कि उस समय कांग्रेस में शामिल होना उनकी मजबूरी थी और वह चुनाव लड़ना नहीं चाहते थे। उन्होंने अपनी कांग्रेस की भूमिका को केवल ‘सदस्यता रोल’ बताया, न कि कोई ‘फुल-टाइम राजनीतिक भूमिका’। 2011 में वह बीजेपी प्रत्याशी से हार गए थे।
सियासी हलकों में बयान के मायने
शेखर सुमन के इन बयानों से राजनीतिक विश्लेषकों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। एक तरफ जहां उनके इस साहस की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग उनके इन बयानों को मौजूदा राजनीतिक माहौल से जोड़कर देख रहे हैं।

उनके इस खुलासे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राजनीति में आना और उसमें टिके रहना किसी भी व्यक्ति के लिए कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।









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