भोजपुर एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: याचिकाकर्ता को क्यों लगा झटका? जानें पूरा मामला
Bhojpur Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की मांग को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने इस मुठभेड़ से जुड़ी जनहित याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है।
यह जनहित याचिका अधिवक्ता विशाल तिवारी ने रविवार, 21 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी। इस मामले में कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सीधे रजिस्ट्रार के सामने अपनी बात रखने का निर्देश दिया है।






भोजपुर एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: याचिकाकर्ता को क्यों लगा झटका? जानें पूरा मामला
Bhojpur Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की मांग को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने इस मुठभेड़ से जुड़ी जनहित याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है।
यह जनहित याचिका अधिवक्ता विशाल तिवारी ने रविवार, 21 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी। इस मामले में कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सीधे रजिस्ट्रार के सामने अपनी बात रखने का निर्देश दिया है।
फर्जी एनकाउंटर का आरोप, CBI जांच की मांग
याचिकाकर्ता विशाल तिवारी ने इस पूरी घटना को ‘फर्जी एनकाउंटर’ करार दिया है। उन्होंने अपनी याचिका में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से इस मामले की गहन जांच कराने की मांग की थी। यह मांग भोजपुर एनकाउंटर की सच्चाई सामने लाने और न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
पुलिसकर्मियों पर FIR और स्वतंत्र जांच समिति की गुहार
सीबीआई जांच के अतिरिक्त, याचिकाकर्ता ने घटना में शामिल पुलिसकर्मियों पर तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की भी मांग उठाई है। इसके साथ ही, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में एक स्वतंत्र जांच कमेटी गठित करने की भी अपील की थी, ताकि पूरी घटना की निष्पक्षता से जांच हो सके।
सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार
सोमवार (22 जून, 2025) को जस्टिस बी. वी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस जनहित याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया। बेंच ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे पहले सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के सामने अपना मामला पेश करें। कोर्ट के इस फैसले के बाद, अब याचिकाकर्ता को अपनी मांगें रजिस्ट्रार के समक्ष रखनी होंगी, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी।
फर्जी एनकाउंटर का आरोप, CBI जांच की मांग
याचिकाकर्ता विशाल तिवारी ने इस पूरी घटना को ‘फर्जी एनकाउंटर’ करार दिया है। उन्होंने अपनी याचिका में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से इस मामले की गहन जांच कराने की मांग की थी। यह मांग भोजपुर एनकाउंटर की सच्चाई सामने लाने और न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
पुलिसकर्मियों पर FIR और स्वतंत्र जांच समिति की गुहार
सीबीआई जांच के अतिरिक्त, याचिकाकर्ता ने घटना में शामिल पुलिसकर्मियों पर तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की भी मांग उठाई है। इसके साथ ही, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में एक स्वतंत्र जांच कमेटी गठित करने की भी अपील की थी, ताकि पूरी घटना की निष्पक्षता से जांच हो सके।
सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार
सोमवार (22 जून, 2025) को जस्टिस बी. वी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस जनहित याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया। बेंच ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे पहले सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के सामने अपना मामला पेश करें। कोर्ट के इस फैसले के बाद, अब याचिकाकर्ता को अपनी मांगें रजिस्ट्रार के समक्ष रखनी होंगी, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी।








