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नेपाली भू-भाग सीमा के पार अगर शराब का करोबार बढ़ा हैं तो इसका मुख्य कारण बिहार में शराब बंदी (Liquor banned in Bihar) हैं। शराब पर पाबंदी के वजह से बिहार के लोग सीमा पार जाकर शराब पीते भी हैं और साथ-साथ तस्करी भी करते हैं।
इससे तो साफ जाहिर होता हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शराबबंदी का अभियान सीमाव्रती क्षेत्रों मॆ असफल साबित हो रहा हैं।
लालटुन दाय दुई टा मासू र एक गिलास रकसी छीटों दीनू होला “यानी माँस के दो पीस और एक गिलास शराब मिल जाय तो और नेपाल वासियों की किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं होती। भारतीय सीमा से सटे नेपाल सप्तरी जिला के राजविराज, हनुमाननगर, भनटावारी, शखरा और मलनीया सहित नेपाल के गांव कस्बों में शाम होते ही सज जाती हैं शराब की दुकानें जिसका आंनद उठाते हैं भारतीय भू-भाग के शराब के प्यासे लोग।
शराब के शौकीन नेपाल के लोगों के संबंध में कहा जाता है कि नेपाली लोगों के लिये मांस और शराब जन्म सिद्ध अधिकार हैं । वैसे भी यहां के बारे में कहा जाता हैं “सूरज अस्त नेपाल मस्त “नेपाल के लोगों का यह मिजाज सीमा पार यानी बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी को एक तरह से मुहं चिढाता नजर आ रहा हैं।
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बिहार में जब से शराब की बिक्री और पीने पर पाबंदी लगी हैं ।तब से मध निषेध विभाग के द्वारा इंडो-नेपाल के बॉर्डर पर होमगार्ड कि जवानो कि तैनाती भी किया गया इस अभियान को सफल बनाने के लिये लेकिन यह होम गार्ड के जवान शराब कि तस्करी तथा शराबी को रोकने में असफल साबित हो रहा हैं। इस करण से भी शराब कि तस्करी व्यापक-पैमाने पर बढ़ रही हैं। सीमा पर तैनात एसएसबी कि जवानों के द्वारा भी तस्करी रोकने में विफल साबित हो रहा हैं।
सुपौल जिले से सटी नेपाल की तकरीबन 60किलो मीटर लम्बी अंतराष्ट्रीय सीमा पार इन दिनों नजारा बदल गया हैं ।निर्मली अनुमंडल के डगमारा पंचायत के राजपुर ,पीपराही ,कमलपुर ,कुनौली पंचायत से बेरीयाघाट ,सुरीयारी ,शांतिवन भीमनगर, वीरपुर सहित अन्य गांव में शराबबंदी के बाद रौनक लौट आयी हैं । चूंकि भारतीय भाग के उक्त गांव इंडो-नेपाल के बॉर्डर से सटा हुआ हैं।
इंडो-नेपाल के बॉर्डर के दोनो भाग दोनो देशों के सीमा शुल्क कार्यालय ,सीमा सशस्त्र बल ,पुलिस-प्रशासन की तैनाती कर दी गयी हैं । कुनौली स्थित नौ मेंस लैंड के दोनों भाग में बाजार के जैसा कई प्रकार के दर-दुकान हैं लेकिन इस इलाके में दिन भर शनिवार और मंगलवार को छोड़कर शाम में ही लोगों की भीड़ देखने को मिलती हैं।
लेकिन यह भीड़ शराब पीने वालों का रहता हैं। जो शराब की लगी आदत की प्यास बुझाने शाम में नेपाली बजार चले जाते हैं। चूँकि शाम होते ही सीमा के बगल मॆ सभी शराब की दुकानें गुलज़ार हो जाती हैं।
अगर शराब कि तस्करी व शराबियों परअगर कूछ हद तक नियंत्रण हैं तो इस का मुख्य करण पुलिस प्रशासन की चौकसी इन्ही के वजह से कूछ लगाम भी हैं।
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