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हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक जीतन राम मांझी ने चुनावी राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि अब वो चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसके लिए उन्होंने अपनी उम्र का हवाला दिया है।
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उन्होंने कहा कि 75 साल के बाद किसी व्यक्ति को भी चुनावी राजनीति नहीं करनी चाहिए, वैसे कुछ लोग हैं, जो चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन मैं तो 79 साल का हो गया हूं, और ऐसे में चुनाव लड़ना मेरे सिद्धांतों के खिलाफ होगा।
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मुख्यमंत्री बनने के 10 महीनों के बाद पार्टी ने उनसे नीतीश कुमार के लिये पद छोड़ने को कहा। ऐसा न करने के कारण उनको पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
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20 फरवरी 2015 को बहुमत साबित न कर पाने के कारण उन्होनें इस्तीफ़ा दे दिया। मई 2015 में उन्होंने नई राजनीतिक पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा बनाया। फ़िलहाल वो बिहार की इमामगंज विधानसभा सीट से विधायक हैं।
हाल ही में जीतन मांझी ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। और कहा था कि लोकसभा सीटों को लेकर वो मुलाकात करने नहीं आए थे। एनडीए में जो भी सीट देगी, उस पर जीत की कोशिश रहेगी।
हमारा उद्देश्य बिहार की सभी 40 सीटों पर एनडीए को जीत दिलाने में बीजेपी का सहयोग करना है। इसके बाद अब उन्होंने खुद के चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है।
मांझी ने कहा कि हम एनडीए के एक छोटे सहयोगी हैं। हमारी कोई बहुत बड़ी भूमिका नहीं है कि हम किसी का स्वागत करेंगे या विरोध करेंगे। लेकिन अगर नरेंद्र मोदी या अमित शाह एनडीए में नीतीश को लाना चाहेंगे तो हम इसका विरोध करेंगे।
वहीं ठाकुर कविता विवाद पर जीतन मांझी ने एनडीए से अलग बयान दिया है। मांझी ने मनोज झा का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्होने कुछ गलत नहीं बोला, और न ही किसी जाति विशेष पर टिप्पणी की।
जीतन राम मांझी एक महादलित मुसहर समाज से आते हैं। मांझी ने लिपिक की नौकरी छोड़ने के बाद राजनीति में कदम रखा और 1980 में विधायक चुने गये। इसके बाद वो 1990 और 1996 में भी विधायक चुने गये।
2004 में बाराचट्टी से बिहार विधान सभा के लिए चुने गये। 1983 से 1984 तक वो बिहार सरकार में उपमंत्री रहे। 1984 से 1988 तक एवं 1998 से 2000 तक राज्यमंत्री रहे। 2008 में उन्हें बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। 20 मई 2014 को नीतीश कुमार ने अपनी जगह जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया।
मांझी का चुनाव क्षेत्र जहानाबाद जिले का मखदुमपुर है। वह विधानसभा अध्यक्ष को सबक सिखाने के लिए मखदुमपुर के अलावा इमामगंज से भी चुनाव लडऩा चाहते थे। इसके लिए उन्होंने घोषणा भी कर दी थी।
लेकिन भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि मांझी खुद चुनाव लडऩे के झंझट में नहीं पड़ेे। दलित और महादलित वोट को गोलबंद करने के लिए एनडीए उन्हें पूरे प्रदेश में स्टार प्रचारक के रूप में घुमाना चाहती है।
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