Gangster Act से जुड़े मामलों को लेकर देश की शीर्ष अदालत में चल रही सुनवाई के बीच बड़ा मोड़ आया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने Supreme Court को अवगत कराया है कि इस सख्त कानून के क्रियान्वयन के लिए नए दिशा-निर्देश लगभग तैयार किए जा रहे हैं। अदालत की ओर से इस कानून के प्रावधानों को लेकर कड़ी आपत्ति जताए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है।
कड़े प्रावधानों पर अदालत की सख्त टिप्पणी
न्यायालय में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से चर्चा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के कई प्रावधान काफी कठोर प्रतीत होते हैं। अदालत ने सरकार को यह परखने की सलाह दी कि इस तरह के कानून का दायरा कहां तक सीमित होना चाहिए। इससे पहले चार दिसंबर को न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने भी इस कानून को बेहद सख्त करार दिया था।
मौजूदा मामलों की होगी समीक्षा
अदालत के निर्देशों पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकारी पक्ष ने स्पष्ट किया कि अदालत के पुराने आदेशों का पालन करते हुए नए दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सरकार जल्द ही इन्हें लागू करेगी और इसके तहत दर्ज मौजूदा आपराधिक मुकदमों की भी नए सिरे से जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह कानून कहां लागू होना चाहिए और कहां नहीं।
उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां रोकथाम कानून के प्रावधानों को लेकर नए दिशा निर्देश तैयार किए जा रहे हैं, जो जल्द ही लागू होंगे।
याचिका और कानून का कानूनी ढांचा
शीर्ष अदालत गोरख नाथ मिश्रा की याचिका पर सुनवाई कर रही है। इस याचिका में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मई 2023 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कासगंज जिला अदालत में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था। वर्ष 1986 में बनाए गए इस अधिनियम के तहत दो से दस साल तक की कैद और न्यूनतम पांच हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान तय किया गया है। सरकारी कर्मचारियों या उनके परिजनों के खिलाफ अपराध अथवा अपराधियों की मदद करने पर सजा की अवधि तीन से दस साल तक हो सकती है।
इस मामले की आगामी सुनवाई जनवरी महीने में तय की गई है, जहां अदालत के रुख पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।







