Banshidhar Brajwasi के राजनीतिक सफर और उनके एक बड़े कदम ने Bihar की सियासी हवा में गर्माहट पैदा कर दी है। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से नवनिर्वाचित निर्दलीय एमएलसी बंशीधर ब्रजवासी द्वारा भारतीय जनता पार्टी को समर्थन दिए जाने के फैसले के बाद राजनीतिक दलों के बीच बयानों का दौर शुरू हो गया है। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ सत्ताधारी खेमे बल्कि विपक्ष में भी हलचल तेज कर दी है, जहां हर कोई इस नए समीकरण के सियासी मायने तलाशने में जुटा हुआ है।
कौन हैं बंशीधर ब्रजवासी और क्या रहा है उनका बैकग्राउंड
मिथिला विश्वविद्यालय से परास्नातक की डिग्री हासिल करने वाले बंशीधर ब्रजवासी के राजनीतिक करियर की शुरुआत वर्ष 2005 में एक शिक्षामित्र के तौर पर हुई थी। अपने पैतृक गांव के स्कूल में नियुक्ति पाने के बाद उन्होंने 11 महीने की संविदा व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई और शिक्षामित्रों की सेवा को पूर्णकालिक करने की मांग को लेकर बड़ा संघर्ष छेड़ा। इसी दौरान उन्होंने प्रारंभिक शिक्षक संघ का गठन किया और वर्ष 2006 में अनशन के माध्यम से शिक्षक आंदोलन को मुखर रूप दिया, जिससे वे सूबे के शिक्षक संगठनों के बीच एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरे।
केके पाठक से टकराव और राजनीति में एंट्री
बंशीधर ब्रजवासी के जीवन में जुलाई 2024 का महीना एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जब शिक्षा विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव केके पाठक के साथ उनके तीखे टकराव के बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। नौकरी जाने के इस घटनाक्रम के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति का रुख किया और नवंबर 2024 में हुए तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे। इस चुनाव में शानदार जीत हासिल कर वे विधान परिषद पहुंचे और हालिया चुनाव में भी अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखते हुए विधान परिषद के पूर्णकालिक सदस्य बने।
समर्थन के ऐलान पर सियासी दलों की प्रतिक्रिया
बंशीधर ब्रजवासी के भाजपा को समर्थन देने के निर्णय पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की तीखी और अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहाँ एक ओर इस कदम को लेकर राजनीतिक गलियारों में नए समीकरण बनने की चर्चा है, वहीं विपक्षी दल इसे मतदाताओं के भरोसे के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं।
| नेता / दल | जिलाई पद | प्रमुख प्रतिक्रिया |
|---|---|---|
| विवेक कुमार | पूर्वी जिलाध्यक्ष (BJP) | पार्टी को पूरे देश में समर्थन मिल रहा है, ब्रजवासी का साथ आना आश्चर्य की बात नहीं है। |
| रमेश गुप्ता | पूर्वी जिलाध्यक्ष (RJD) | शिक्षकों के आक्रोश पर वोट हासिल कर भाजपा को समर्थन देना मतदाताओं के साथ विश्वासघात है। |
| अरविंद कुमार मुकुल | पूर्वी जिलाध्यक्ष (Congress) | भाजपा का साथ देकर उन्होंने खुद को बहुरुपिया साबित किया है, यह मतदाताओं से वादाखिलाफी है। |
इस पूरे घटनाक्रम के बीच चुनाव में उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी रहे जदयू उम्मीदवार अभिषेक झा के सोशल मीडिया पोस्ट ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी है, जिसमें उन्होंने खुद को चक्रव्यूह में अभिमन्यु की तरह अकेला बताया है। बंशीधर ब्रजवासी के इस राजनीतिक कदम के आने वाले समय में सूबे की राजनीति पर क्या दूरगामी असर होंगे, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।







