बिहार में इन दिनों शिक्षकों की भरपूर बहाली होनी है। मगर, जो नियम बन रहे हैं उसको लेकर शिक्षकों में उहापोह की स्थिति है। ताजा जानकारी यह है कि इसबार बाहरी शिक्षकों को भी नौकरी मिलेगी। जो बाहर के प्रदेश के हैं मगर इससे पहले के जो नियम थे उसके मुताबिक,माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक में अभ्यर्थी को बिहार का स्थायी निवासी होना आवश्यक था।
ऐसे में उन शिक्षकों की परेशानी इन दिनों बढ़ गई है जो शिक्षा विभाग के इस आदेश और निर्देश के बाद चिंतिंत हैं जहां प्रारंभिक स्कूलों से यह मांग की गई है कि कितने शिक्षक कार्यरत हैं और उसमें से कितने लोग बाहर के हैं।






इस रिपोर्ट के बाद से स्कूलों के कई शिक्षकों के सिर पर चिंता की लकीरें खींच गयी है। वे परेशान हैं कि उन लोगों को राज्य के बाहर होने के कारण हटाने की किसी तरह की कवायद तो नहीं है।
जानकारी के अनुसार, ताजा सर्वे जहां हुआ है उनमें से एक जिले मे प्रारंभिक विद्यालयों के 10200 शिक्षकों में से से मात्र 180 शिक्षक ऐसे मिले हैं जो राज्य के बाहर के निवासी हैं। राज्य के शिक्षा विभाग के निर्देश के बाद से जिला शिक्षा पदाधिकारी के आदेश पर सभी जिलों में स्कूलों से प्रारंभिक विद्यालयों में नियुक्त राज्य के बाहर के शिक्षकों की कुल संख्या मांगी गई है। यह संख्या प्रारंभिक स्कूलों ने जिला को उपलब्ध करा दी है।
वहीं, सभी माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों से भी यह रिपोर्ट मांगी गई है। सूत्रों ने बताया कि अभी तक प्रारंभिक विद्यालयों में जितनी भी नियुक्ति या नियोजन हुआ है, में अभ्यर्थी को सिर्फ भारत का नागरिक होना आवश्यक था। वहीं माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक में अभ्यर्थी को बिहार का स्थायी निवासी होना आवश्यक था।
ऐसे में, चिंता उन लोगों को हो सकती है जो माध्यमिक या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत हैं और बिहार के स्थायी निवासी नहीं हैं। हालांकि राज्य के बाहर का निवासी होने के कारण इन लोगों की भी नियुक्ति नहीं हो सकती है। यदि किसी तरह नियुक्ति हुई भी है तो गलत होगी। लेकिन, प्रांरभिक विद्यालयों में तो बाहर के भी निवासी हों तो कोई परेशानी नहीं होने वाली है। हालांकि, अब यह देखा जा रहा है कि ऐसे मामले और किन किन जिलों में हैं।







