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Bihar Politics Rift : बिहार में आनंद मोहन का ‘विस्फोटक’ बयान: ‘अपनी ही जाति’ के 6 सांसद अकलोल-बकलोल, बेटे को नहीं बनाया मंत्री तो छेड़ी जंग!

Bihar Politics: पूर्व सांसद आनंद मोहन ने मोतिहारी में जातीय सम्मेलन से सीधा हमला बोला है। उन्होंने अपने बेटे चेतन आनंद को मंत्री न बनाए जाने पर नाराजगी जताई और राजपूत समाज के छह सांसदों को 'अकलोल-बकलोल' कहकर बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

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Bihar Politics: बिहार के मोतिहारी में आयोजित एक जातीय सम्मेलन से पूर्व सांसद आनंद मोहन ने राज्य की Bihar राजनीति में हलचल मचा दी है। उनका अंदाज बेहद आक्रामक रहा, जहां उन्होंने मंच से अपने बेटे और पूर्व विधायक चेतन आनंद के राजनीतिक भविष्य को लेकर खुलकर दर्द बयां किया। उन्होंने अपनी ही जाति से लोकसभा पहुंचे छह सांसदों पर तीखा सियासी हमला बोलते हुए उन्हें ‘अकलोल, बकलोल’ तक कह डाला, जिससे बिहार के राजनीतिक गलियारों में गरमाहट बढ़ गई है। आनंद मोहन के तेवर साफ दर्शाते हैं कि वे अब पूरी आक्रामकता के साथ चुनावी मैदान में उतरने को तैयार हैं।

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बेटे चेतन के लिए छलका आनंद मोहन का दर्द

आनंद मोहन की नाराजगी की मुख्य वजह उनके बेटे चेतन आनंद को मंत्री न बनाया जाना है। पिछले विधानसभा चुनाव में अचानक चेतन का विधानसभा क्षेत्र भी बदल दिया गया था। उन्होंने इस दौरान अपने बेटे के साथ हुए ‘अन्याय’ की बात कही। आनंद मोहन ने पार्टी द्वारा चेतन के बारे में मंगवाई गई सर्वे रिपोर्ट को सिरे से गलत बताया।

उन्होंने कहा, ‘चेतन आनंद दो बार विधायक रहा, जनता के बीच रहा, फिर भी उसके साथ न्याय नहीं हुआ।’

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यह कहते वक्त आनंद मोहन की आवाज में बेटे के सियासी भविष्य को लेकर गहरी कसक साफ सुनाई दे रही थी। पंडाल में मौजूद उनके समर्थकों ने जोरदार तालियों से उनका समर्थन किया। इस स्थिति के पीछे एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि वर्तमान राज्य सरकार राजपूत जाति के दूसरे नेताओं को ज्यादा महत्व दे रही है, जिससे आनंद मोहन खेमे में असंतोष है। आनंद मोहन के लंबे समय तक जेल में रहने के कारण राजपूत समाज पर उनकी पकड़ भी कमजोर हुई है।

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छह सांसदों पर आनंद मोहन का सीधा हमला: ‘अकलोल, बकलोल’

आनंद मोहन यहीं नहीं रुके। उन्होंने अपनी जाति के छह लोकसभा सांसदों पर सीधा निशाना साधा, जिससे सभी हैरान रह गए।

आनंद मोहन ने कहा, ‘6 सांसद संसद तो पहुंच गए लेकिन किसी में अपनी बात रखने का साहस नहीं है। सब अकलोल, बकलोल हैं। किसी को मंत्री बनाने लायक नहीं समझा गया। सभी के गले में पार्टी का पट्टा है और उन्हें सिर्फ भौंकने का काम दिया गया है।’

उनके इस बयान के बाद पूरा सम्मेलन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। आनंद मोहन का यह हमला दर्शाता है कि वे जातीय समीकरणों को साधते हुए अपनी राजनीतिक पकड़ फिर से मजबूत करना चाहते हैं।

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आनंद मोहन के आक्रामक तेवर के सियासी मायने

आनंद मोहन की इस आक्रामकता के कई गहरे सियासी मायने निकाले जा रहे हैं:

  • बेटे चेतन का राजनीतिक पुनर्वास: चेतन पिछला विधानसभा चुनाव हार गए थे। आनंद मोहन चाहते हैं कि पार्टी उनके बेटे को सम्मानजनक जगह दे।
  • खुद की सियासी जमीन मजबूत करना: जेल से रिहाई के बाद से वे लगातार जातीय सम्मेलनों के जरिए अपना जनाधार टटोल रहे हैं।
  • आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दबाव की राजनीति: छह सांसदों पर हमला कर उन्होंने यह संदेश दिया है कि संसद में उनकी जाति का कोई मजबूत पैरोकार नहीं है, और इस खाली जगह को वे खुद या अपने बेटे के जरिए भरना चाहते हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आनंद मोहन किसी बड़े दल से अपने बेटे के लिए टिकट और सम्मानजनक भूमिका की गारंटी चाहते हैं। सम्मेलन में बिहार विधान परिषद सदस्य महेश्वर सिंह और अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेन्द्र सिंह ने भी समाज के साथ न्याय और महापुरुषों के आदर्शों पर चलने की बात कही।

अपने बयान में आनंद मोहन ने आगे कहा, ‘मैंने समाज के लिए जेल काटी। हमेशा सच बोला। जब अपने बेटे के साथ अन्याय होता है तो बोलना पड़ता है। सर्वे के नाम पर धोखा हुआ। छह सांसद दिल्ली गए हैं पर समाज के हक की बात एक बार भी नहीं उठाई। उनके गले में पार्टी का पट्टा है। उन्हें सिर्फ दूसरों पर भौंकने के लिए रखा गया है। समाज सब देख रहा है। वक्त आने पर जवाब देगा।’

आनंद मोहन के इस बयान के बाद सियासी गलियारे में चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिन छह सांसदों पर निशाना साधा गया, उनके समर्थक सफाई में जुट गए हैं। वहीं, RJD और JDU के नेता फिलहाल खामोश हैं, जबकि BJP के कुछ नेताओं ने इसे ‘पारिवारिक भावना’ करार दिया है। आनंद मोहन के तेवर से साफ है कि वे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ी भूमिका में दिखेंगे। वे अपने बेटे चेतन के लिए सम्मानजनक सियासी जगह चाहते हैं और यदि बात नहीं बनी तो एक नया समीकरण भी बना सकते हैं। फिलहाल उनके इस बयान ने जातीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, और अब सबकी नजर छह सांसदों व राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया पर टिकी है। आनंद मोहन अपनी राजनीति में पहले जैसा वजूद कायम रखना चाहते हैं।

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