Sanjay Mishra Movie: अक्सर समाज में अकेली रहने वाली या अपनी मर्जी से जीवन जीने वाली महिलाओं के चरित्र पर सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन क्या यह सही है? क्या समाज को किसी के निजी जीवन में दखल देने का हक है? इसी सोच को चुनौती देती एक मजेदार कहानी पर आधारित है एक नई फिल्म, जिसका कुछ दिन पहले एक वीडियो जबरदस्त वायरल हुआ था। इस वीडियो में दिग्गज अभिनेता संजय मिश्रा और खूबसूरत अदाकारा महिमा चौधरी शादी के बंधन में बंधते दिखे थे, जिसने दर्शकों की उत्सुकता कई गुना बढ़ा दी थी। हालांकि, यह उनकी असली शादी नहीं, बल्कि फिल्म के प्रचार का एक अनोखा तरीका था, जिसने फिल्म को लेकर गजब की दिलचस्पी पैदा कर दी।
संजय मिश्रा की यह मूवी क्यों बन रही है दर्शकों की पहली पसंद? जानिए पूरी फिल्म समीक्षा!
संजय मिश्रा मूवी: क्या समाज की सोच बदलेगी यह कहानी?
यह फिल्म एक ऐसे विषय पर रोशनी डालती है जो हमारे समाज में अक्सर चर्चा का विषय रहा है। फिल्म की कहानी दुर्लभ प्रसाद (संजय मिश्रा) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी पत्नी को खो चुके हैं और अब अपने बेटे व साले के साथ रहते हैं। कहानी में तब ट्विस्ट आता है जब उनके बेटे को एक लड़की से प्यार हो जाता है, लेकिन लड़की के परिवार वाले शादी के लिए एक शर्त रखते हैं – घर में कोई महिला सदस्य होनी चाहिए। बस फिर क्या था, दुर्लभ प्रसाद का बेटा अपने पिता की दूसरी शादी करवाने की धुन में लग जाता है। अब देखना यह होगा कि क्या दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी हो पाती है या नहीं, इसके लिए तो आपको सिनेमाघरों का रुख करना होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






यह एक शानदार और मनोरंजन से भरपूर फिल्म है जिसे आप पूरे परिवार के साथ बैठकर देख सकते हैं। फिल्म अपनी शुरुआत से ही सीधे मुद्दे पर आ जाती है। एक बुजुर्ग की दूसरी शादी की यह कहानी सिर्फ मजेदार ही नहीं, बल्कि हल्के-फुल्के अंदाज में कई महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी दे जाती है। क्या माता-पिता अपने बच्चों के लिए जो कुछ करते हैं, उसकी एवज में बच्चों की कोई जिम्मेदारी नहीं होती? क्या बुजुर्गों को समाज द्वारा बनाए गए दायरों में ही जीवन बिताना चाहिए?
फिल्म का लेखन और निर्देशन कितना दमदार?
यह फिल्म बिना किसी उपदेश के, बड़े ही मनोरंजक तरीके से इन सभी सवालों के जवाब देती है। कॉमेडी के सीन आपको हंसाते-हंसाते लोटपोट कर देंगे। हास्य को फिल्म की पटकथा में बड़े ही सलीके से बुना गया है, जिससे यह Film Review दर्शकों को खूब पसंद आ रहा है। कुल मिलाकर, यह फिल्म हल्के-फुल्के अंदाज में वो सब कुछ कह जाती है जिसे सुनना आज के समाज के लिए बेहद जरूरी है।
अभिनय की तारीफ:
- संजय मिश्रा: उन्होंने एक बार फिर अपनी अदाकारी का जादू चलाया है, सहजता से अपने किरदार में ढलकर दर्शकों का दिल जीत लेते हैं।
- महिमा चौधरी: उन्होंने अपने किरदार से काफी प्रभावित किया है और इन दिनों हर भूमिका में कमाल कर रही हैं।
- व्योम यादव: संजय मिश्रा के बेटे के किरदार को पूरी परफेक्शन से निभाया है।
- पलक लालवानी: अपने रोल में अच्छी लगी हैं।
- श्रीकांत वर्मा: संजय मिश्रा के साले के रूप में शानदार प्रदर्शन किया है।
- प्रवीण सिंह सिसौदिया: अपनी भूमिका में खूब जमे हैं।
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लेखन और निर्देशन:
फिल्म का लेखन आदेश के अर्जुन और प्रशांत सिंह ने किया है, जबकि निर्देशन की बागडोर सिद्धांत राज सिंह ने संभाली है। इन सभी का काम काबिले तारीफ है। फिल्म को कहीं भी बेवजह खींचा नहीं गया है। इसकी लेखन शैली में दम है और निर्देशन भी उम्दा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें: मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
कुल मिलाकर, यह फिल्म निश्चित रूप से देखने लायक है। यह आपको भरपूर मनोरंजन प्रदान करेगी।
रेटिंग:
यह फिल्म 3 स्टार्स की हकदार है।







