Darbhanga News: मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखने और उसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए दरभंगा में 22 नवंबर से तीन दिवसीय 54वां मिथिला विभूति पर्व समारोह का आयोजन किया जाएगा। विद्यापति सेवा संस्थान ने इस भव्य आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। सोमवार शाम को संस्थान के प्रधान कार्यालय परिसर में हुई आम सभा में समारोह की विस्तृत रूपरेखा तय की गई और विभिन्न समितियों का गठन किया गया।







संस्थान के अध्यक्ष एवं कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. शशिनाथ झा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कवि कोकिल विद्यापति के निर्वाण दिवस, कार्तिक धवल त्रयोदशी तिथि, यानी 22 नवंबर से समारोह शुरू करने का निर्णय लिया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं, महिलाओं और प्रवासी मैथिलों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए देशव्यापी सांस्कृतिक एकजुटता स्थापित करना है।

आयोजन समिति का गठन और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
54वें मिथिला विभूति पर्व समारोह के लिए एक सशक्त आयोजन समिति का गठन किया गया है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी को समारोह का मुख्य संरक्षक बनाया गया है। संरक्षक मंडल में कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय, डा. दिलीप कुमार झा, एमएलएसएम कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य डा. विद्यानाथ झा और डा. अयोध्या नाथ झा शामिल हैं।आयोजन समिति का अध्यक्ष सर्वसम्मति से प्रो. शशिनाथ झा को बनाया गया है, जबकि उपाध्यक्षों में डा. श्रीपति त्रिपाठी, डा. रमेश झा, अमरेन्द्र झा और विनोद कुमार झा शामिल हैं। कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी डा. गणेश कांत झा को सौंपी गई है और आय-व्यय पर्यवेक्षण का प्रभार प्रवीण कुमार झा संभालेंगे। सलाहकार समिति के अध्यक्ष पं. कमला कांत झा और स्वागताध्यक्ष युवा समाजसेवी मन्नू चौधरी बनाए गए हैं। स्वागत उपाध्यक्ष डा. महानंद ठाकुर तथा स्वागत महासचिव प्रो. जीवकांत मिश्र होंगे।
सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण: मिथिला चित्रकला और युवा भागीदारी
समारोह के दौरान मिथिला की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत, विशेषकर मिथिला चित्रकला के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। इस उद्देश्य से विभिन्न प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन होगा। मिथिला चित्रकला संरक्षण समिति का संयोजक मणिभूषण राजू को बनाया गया है, जिसमें प्रवीण कुमार झा, आशीष चौधरी, बालेंदु झा और पुरुषोत्तम वत्स सदस्य के तौर पर शामिल हैं।विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डाॅ. बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने बताया कि बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने युवाओं, महिलाओं और प्रवासी मैथिलों को इस समारोह से सक्रिय रूप से जोड़ने का संकल्प लिया, ताकि देशव्यापी सांस्कृतिक एकजुटता कायम की जा सके।
विभिन्न समितियों की भूमिका और पदाधिकारी
समारोह को सफल बनाने के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण समितियों का भी गठन किया गया है। संस्थान की मुख पत्रिका ‘अर्पण’ के संपादक के रूप में डा. महेंद्र नारायण राम और प्रवीण कुमार झा संयुक्त रूप से कार्यभार संभालेंगे। कवि सम्मेलन के संयोजक वरिष्ठ गीतकार डा. चंद्रमणि झा और सह संयोजक प्रवीण कुमार झा होंगे, जबकि विचार संगोष्ठी की जिम्मेदारी मणिकांत झा को दी गई है।सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन समिति का संयोजन पं. कमलाकांत झा करेंगे, जिसमें प्रो. चंद्रनाथ मिश्र और प्रो. जीवकांत मिश्र सदस्य के रूप में शामिल हैं। मीडिया संयोजन और कार्यालय सचिव का प्रभार प्रवीण कुमार झा को और मीडिया दीर्घा का सह संयोजक प्रो. चंद्रशेखर झा बूढ़ाभाई को सौंपा गया है। आशीष चौधरी के संयोजन में सोशल मीडिया समिति में मणिभूषण राजू और पुरुषोत्तम वत्स शामिल हैं। महिला दीर्घा की व्यवस्था के लिए डा. सुषमा झा, डा. ममता ठाकुर और पुष्पा कुमारी को संयुक्त रूप से बागडोर सौंपी गई है। शांति व्यवस्था के लिए बालेंदु झा और मनीष झा रघु के संयोजन में समिति बनी है। मंच व्यवस्था की कमान जय नारायण साह को मिली है, वहीं आवासन व्यवस्थापन के लिए दुर्गानंद झा, प्रेमचंद्र चौधरी, आशीष चौधरी और पुरुषोत्तम वत्स की टीम रहेगी। भोजन एवं जलपान व्यवस्था की जवाबदेही चौधरी बैद्यनाथ राय, प्रो. विजयकांत झा, हरिकिशोर चौधरी और नवल किशोर झा को दी गई है। प्रचार-प्रसार के लिए प्रवीण कुमार झा के संयोजन में गठित पांच सदस्यीय समिति में आशीष चौधरी, मणिभूषण राजू, पुरुषोत्तम वत्स और बालेंदु झा शामिल हैं।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. शशिनाथ झा ने लगातार तीन दिनों तक आयोजित होने वाले इस साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक महाकुंभ की सफलता के लिए सभी से मिलकर सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।
इस बैठक में डा. बुचरू पासवान, प्रो. जीवकांत मिश्र, डा. चंद्रमणि झा, डा. महेंद्र नारायण राम, डा. अयोध्या नाथ झा, डा. गणेश कांत झा, डा. उदय कांत मिश्र, मिथिलेश मिश्र, विनोद कुमार झा, बालेंदु झा, नवल किशोर झा, वैद्य गणपति झा, हरिकिशोर चौधरी, डा. महानंद ठाकुर, डा. सुषमा झा और डा. ममता ठाकुर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। यह आयोजन मिथिला की पहचान को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।









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