Mauni Amavasya 2026: माघ मास की मौनी अमावस्या सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र मानी गई है, जब मौन और पावन स्नान से आत्मा शुद्ध होती है और व्यक्ति मोक्ष की ओर अग्रसर होता है।
मौनी अमावस्या 2026: मौन व्रत और पावन स्नान का असाधारण महत्व
मौनी अमावस्या 2026 पर धार्मिक रहस्य और पुण्य कर्म
माघ मास में पड़ने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या या माघी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। यह तिथि विशेष रूप से आत्म-शुद्धि, पितरों के तर्पण और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इस दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में पवित्र स्नान करने और मौन धारण करने का विधान है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन देवताओं का वास गंगाजल में होता है, जिससे इसमें स्नान करने से समस्त पापों का शमन होता है और व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यह दिन उन व्यक्तियों के लिए विशेष महत्व रखता है जो अपनी वाणी पर संयम रखकर आत्मचिंतन करना चाहते हैं।
मौनी अमावस्या 2026 शुभ मुहूर्त
| तिथि | सोमवार, 19 जनवरी 2026 |
| अमावस्या तिथि प्रारंभ | 18 जनवरी 2026, रात 10:27 बजे |
| अमावस्या तिथि समाप्त | 19 जनवरी 2026, रात 09:27 बजे |
धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/dharm-adhyatm/
मौन व्रत का आध्यात्मिक महत्व
मौन व्रत का अर्थ केवल वाणी का त्याग नहीं, अपितु मन को शांत कर अंतरात्मा से जुड़ना है। इस दिन मौन रहने से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह आत्मिक शुद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है और मन को एकाग्र करने में सहायक होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन मनु ऋषि का जन्म हुआ था, जिन्होंने मौन रहकर तपस्या की थी। यही कारण है कि इस अमावस्या को ‘मौनी’ अमावस्या कहा जाता है।
स्नान का पुण्य और पितृ तर्पण
मौनी अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करने से न केवल शारीरिक शुद्धि होती है, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी व्यक्ति ऊर्जावान महसूस करता है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने का विशेष विधान है। ऐसा माना जाता है कि इन कर्मों से पितर प्रसन्न होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं, जिससे घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
क्या करें मौनी अमावस्या पर?
- सूर्योदय से पूर्व उठकर गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- स्नान के उपरांत सूर्य देव को अर्घ्य दें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
- मौन व्रत का संकल्प लें और दिन भर कम से कम मौन रहने का प्रयास करें।
- गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, कंबल आदि का दान करें।
- ब्राह्मणों को भोजन कराएं या उन्हें दान-दक्षिणा दें।
- पितरों की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान करें।
- भगवान विष्णु और शिव का ध्यान करें।
निष्कर्ष और उपाय
मौनी अमावस्या का दिन हमें आत्म-परीक्षण और आत्म-सुधार का अवसर प्रदान करता है। इस पवित्र तिथि पर किया गया हर सत्कर्म अनेक जन्मों के पापों का नाश कर पुण्य फल प्रदान करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसलिए इस दिन पूर्ण श्रद्धा और भक्तिभाव से नियमों का पालन करें। मौन रहने का संकल्प लें, पवित्र स्नान करें और दान-पुण्य के कार्यों में संलग्न हों। ऐसा करने से न केवल आपके जीवन में शांति आएगी, बल्कि मोक्ष की ओर आपका मार्ग भी प्रशस्त होगा।







