Makar Sankranti 2026: भारतीय संस्कृति और ज्योतिष में मकर संक्रांति का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह वह पावन दिवस है जब सूर्यदेव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे ‘मकर संक्रांति’ कहा जाता है। इस दिन से उत्तरायण की शुरुआत होती है, जो शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
मकर संक्रांति 2026: जानिए क्यों है सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व
मकर संक्रांति का पर्व, जो सूर्य देव को समर्पित है, पूरे भारतवर्ष में बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने की परंपरा सदियों पुरानी है। विशेष रूप से सूर्य देव की उपासना का विधान है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर इस दिन सूर्य देव की पूजा क्यों अनिवार्य मानी गई है? इसके पीछे धार्मिक और पौराणिक दोनों ही गहन रहस्य छिपे हैं, जिनका ज्ञान हमारे जीवन को नई दिशा प्रदान कर सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मकर संक्रांति 2026 पर सूर्य पूजा के पीछे का पौराणिक रहस्य
शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन ही सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव से मिलने उनके घर मकर राशि में जाते हैं। चूंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, इसलिए इस दिन पिता-पुत्र का मिलन होता है। यह एक ऐसा अद्भुत अवसर है जब पिता सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव के घर में प्रवेश करते हैं, और यही कारण है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है। उनकी कृपा से व्यक्ति के जीवन से कष्ट दूर होते हैं और आरोग्य की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त, पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन गंगा नदी कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में मिली थीं, जिससे उनके पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त हुआ था। इसी कारण इस दिन गंगा स्नान और तिल दान का भी विशेष महत्व बताया गया है, जो ‘स्नान-दान’ के पवित्र संकल्प को पूर्ण करता है।
सूर्य देव की आराधना विधि
- मकर संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्यदेव को अर्घ्य देने की तैयारी करें।
- एक तांबे के लोटे में जल लें, उसमें लाल चंदन, लाल फूल, अक्षत और थोड़े काले तिल मिलाकर सूर्यदेव को ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का उच्चारण करते हुए अर्घ्य दें।
- सूर्य देव के सामने खड़े होकर सूर्य चालीसा का पाठ करें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
- तिल, गुड़, खिचड़ी, वस्त्र और कम्बल का दान करें। इस दिन खिचड़ी खाने और खिलाने का भी विशेष महत्व है।
सूर्य देव का प्रभावशाली मंत्र
ॐ घृणि सूर्याय नमः।
यह मंत्र सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने और जीवन में तेज एवं ऊर्जा भरने के लिए अत्यंत फलदायी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मकर संक्रांति का यह पावन पर्व हमें प्रकृति और सूर्य देव के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। इस दिन किया गया दान और पूजा-पाठ कई गुना अधिक फल प्रदान करता है। जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक इस दिन सूर्य देव की उपासना और स्नान-दान करते हैं, उन्हें आरोग्य, धन-धान्य और यश की प्राप्ति होती है। यह दिन नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। इस दिन तिल और गुड़ का सेवन विशेष रूप से स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है।
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