Healthcare Technology: पतंजलि विश्वविद्यालय (UoP) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (IITR) के संयुक्त तत्वावधान में हाल ही में स्वास्थ्य सेवा और प्रबंधन में स्मार्ट तकनीकों के एकीकरण पर एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ। यह तीन दिवसीय आयोजन वैश्विक स्वास्थ्य सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ है।
स्वास्थ्य सेवा में क्रांति लाएगी Healthcare Technology: AI और IoT का अद्भुत संगम
Healthcare Technology: स्वास्थ्य के नए आयाम
गुरुवार को शुरू हुई इस संगोष्ठी में अमेरिका के ग्लोबल नॉलेज फाउंडेशन (GKF), भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) और यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपनी गहरी अंतर्दृष्टि साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे आधुनिक तकनीकें स्वास्थ्य सेवा को अधिक सुलभ और प्रभावी बना सकती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मुख्य वक्ता श्रद्धेय आयुर्वेद शिरोमणि आचार्य बालकृष्ण जी ने अपने संबोधन में भारतीय सनातन परंपरा के दीर्घायु और प्रकृति के साथ सामंजस्य के संदेश को उजागर किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना के साथ इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी तकनीकों के माध्यम से आज विश्व एक ‘वैश्विक गांव’ बन रहा है। वियरेबल सेंसर और स्मार्ट चिकित्सा उपकरणों के जरिए स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण अब उपचार को कहीं अधिक सटीक और व्यक्तिगत बना रहा है, जिससे Digital Health के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हो रही है।
आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने आधुनिक जीवन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इसमें नैतिकता के समावेश को अत्यंत अनिवार्य बताया। वहीं, अमेरिका से आए डॉ. देव शर्मा ने Digital Health प्रबंधन और साइबर सुरक्षा के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एआई-आधारित प्रणालियों से व्यक्तिगत उपचार चयन विश्लेषण को नई दिशा मिलेगी, जिससे मरीजों को बेहतर और अनुकूलित चिकित्सा मिल पाएगी।
नैतिकता, गुणवत्ता और अनुसंधान का महत्व
भारतीय मानक ब्यूरो के निदेशक सचिन चौधरी ने स्वास्थ्य सेवाओं में राष्ट्रीय मानकों और सुरक्षा को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा हर नागरिक का अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए पतंजलि हर्बल रिसर्च की प्रमुख डॉ. वेदप्रिया आर्या ने एग्रीटेक, मृदा परीक्षण और एआई-आधारित कृषि उद्यमिता को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प से जोड़ा। उन्होंने बताया कि कैसे तकनीक केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि कृषि जैसे अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
संगोष्ठी के दौरान अतिथियों ने एक ‘सार पुस्तक’ का भी लोकार्पण किया, जिसमें संगोष्ठी से संबंधित महत्वपूर्ण शोध और निष्कर्षों को संकलित किया गया है। यह आयोजन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक स्मार्ट तकनीकों का एकीकरण ही भविष्य की उन्नत स्वास्थ्य सेवा का आधार बनेगा। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में प्रो. कमलकिशोर पंत, कुलपति प्रो. मयंक कुमार अग्रवाल सहित कई वैज्ञानिक और शोधार्थी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पर गहन विचार-विमर्श किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें







