Bihar Vigilance: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी मुहिम के तहत निगरानी विभाग ने मंगलवार को एक बड़ी कार्रवाई की है। शेखपुरा जिले के अरियरी प्रखंड में पदस्थापित पंचायत रोजगार सेवक प्रफुल्ल कुमार को 30 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। यह गिरफ्तारी पटना से पहुंची निगरानी टीम ने अरियरी प्रखंड मुख्यालय फरपर के बाहर की। प्रफुल्ल कुमार पर मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्य की मापी पुस्तिका भरने के एवज में यह रकम मांगने का आरोप है।
निगरानी विभाग की टीम ने शिकायत मिलने के बाद पहले से जाल बिछा रखा था। जैसे ही पंचायत रोजगार सेवक प्रफुल्ल कुमार ने रिश्वत की रकम ली, टीम ने उसे तुरंत धर दबोचा। गिरफ्तारी के समय आरोपी ने भागने का प्रयास भी किया, लेकिन निगरानी टीम ने उसे पकड़ लिया। यह पिछले एक महीने के भीतर जिले में निगरानी विभाग की दूसरी बड़ी ट्रैप कार्रवाई है, जो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मनरेगा कार्य की मापी पुस्तिका भरने के लिए मांगी थी रिश्वत
गिरफ्तार प्रफुल्ल कुमार शेखपुरा जिले के चेवाड़ा प्रखंड स्थित कपासी गांव के निवासी हैं। वह लगभग दस वर्षों से नौकरी कर रहे हैं और पिछले करीब एक वर्ष से अरियरी प्रखंड की हजरतपुर मड़रो पंचायत में पंचायत रोजगार सेवक के पद पर कार्यरत थे। यह पूरा मामला पंचायत समिति की योजना के अंतर्गत मनरेगा में कराए गए कार्य से जुड़ा है। आरोप है कि इसी काम की मापी पुस्तिका भरने के लिए 30 हजार रुपये की मांग की गई थी।
निगरानी विभाग की टीम ने पटना से शेखपुरा पहुंचकर अरियरी प्रखंड मुख्यालय के पास पंचायत रोजगार सेवक को रंगे हाथ पकड़ा। उसे आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए पटना ले जाया गया है, जहां विशेष न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।
हालांकि, रिश्वत की मांग से संबंधित शिकायत के विस्तृत ब्योरे और इस मामले में आरोपी का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। निगरानी विभाग की इस कार्रवाई से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने की उम्मीद जगी है, खासकर मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण ग्रामीण विकास योजनाओं में।
गिरफ्तारी के बाद प्रफुल्ल कुमार को तत्काल पटना ले जाया गया है। विशेष न्यायालय में पेशी के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस कार्रवाई से अन्य सरकारी कर्मचारियों में भी भ्रष्टाचार के प्रति भय पैदा होगा।







