Stock Market: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की लगातार बिकवाली ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिकी बॉन्ड बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती के बीच, FPIs ने इस महीने भारतीय शेयरों से 22,530 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी रकम निकाली है, जो बाजार के लिए एक चुनौती बन गई है। यह स्थिति ऐसे समय में उत्पन्न हुई है जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं और बाजार का उच्च मूल्यांकन निवेशकों को उभरते बाजारों से दूर धकेल रहा है।
भारतीय Stock Market से क्यों भाग रहे हैं विदेशी निवेशक? जानें पूरा विश्लेषण
Stock Market में FPIs की लगातार बिकवाली और उसके कारण
अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में लगातार वृद्धि और डॉलर की मजबूती ने वैश्विक पूंजी प्रवाह को विकसित बाजारों की ओर मोड़ दिया है। जनवरी 2025 में FPIs ने भारतीय इक्विटी से कुल 1.66 लाख करोड़ रुपये की भारी बिकवाली दर्ज की थी, और अब इस महीने 1 से 16 जनवरी के बीच 22,530 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला है। यह निकासी भारतीय मुद्रा, रुपये के मूल्य में लगभग पांच प्रतिशत की गिरावट लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी है। मुद्रा की अस्थिरता, वैश्विक व्यापार तनाव और अमेरिकी शुल्क में बढ़ोतरी की आशंकाएं भी विदेशी निवेशकों के बीच चिंता का एक बड़ा कारण बनी हुई हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक और घरेलू दोनों कारक इस निकासी के लिए जिम्मेदार हैं। सेंट्रिसिटी वेल्थटेक के इक्विटी प्रमुख और संस्थापक पार्टनर सचिन जसुजा ने कहा, “बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल और मजबूत डॉलर ने विकसित बाजारों में जोखिम समायोजित प्रतिफल में सुधार किया है, जिसके कारण उभरते बाजारों से पूंजी निकलकर दूसरे बाजारों की ओर जा रही है।” मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रधान प्रबंधक शोध, हिमांशु श्रीवास्तव ने भी समान विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भू-राजनीतिक और व्यापार संबंधी अनिश्चितताएं भी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित कर रही हैं। भारतीय शेयर बाजार में FPI की यह लगातार बिकवाली देश की आर्थिक वृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती पेश कर रही है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
बाजार पर प्रभाव और आगे की राह
हालांकि, FPIs की बिकवाली के बावजूद, शुक्रवार 16 जनवरी को भारतीय शेयर बाजार में कुछ स्थिरता देखने को मिली। प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स हरे निशान पर बंद हुए, जिससे निवेशकों को थोड़ी राहत मिली। सेंसेक्स 187.64 अंक या 0.23 प्रतिशत की तेजी के साथ 83,570.35 अंक पर बंद हुआ, जबकि एनएसई Nifty 50 28.75 अंक या 0.11 प्रतिशत उछलकर 25,694.35 के स्तर पर कारोबारी दिन की समाप्ति की। यह दर्शाता है कि घरेलू निवेशक और संस्थागत खरीद कुछ हद तक FPIs की निकासी के प्रभाव को कम करने में सफल रहे हैं। इस लचीलेपन से आने वाले समय में Nifty में सकारात्मक सुधार की उम्मीद की जा सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस तरह की अस्थिरता के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित मजबूती और दीर्घकालिक विकास की संभावनाएं अभी भी निवेशकों के लिए आकर्षक बनी हुई हैं। हालांकि, वैश्विक आर्थिक माहौल पर लगातार नजर रखना और तदनुसार निवेश रणनीतियों को समायोजित करना महत्वपूर्ण होगा। भविष्य में, डॉलर के रुख और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में किसी भी बदलाव पर Stock Market की गहरी नजर होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







