Bihar Law College: बिहार के सबसे पुराने विधि महाविद्यालयों में से एक, दरभंगा स्थित सीएम लॉ कॉलेज की मान्यता पर अब बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की तलवार लटक गई है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से संबद्ध इस ऐतिहासिक कॉलेज में वर्षों से नामांकन प्रक्रिया बाधित है, और अब 320 छात्रों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। कॉलेज की गिरती गरिमा को बचाने और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए जिला अधिवक्ता संघ ने बिहार के कुलाधिपति और विश्वविद्यालय के कुलपति से हस्तक्षेप की मांग की है।
बीसीआई की सख्त चेतावनी और बिहार के इस कॉलेज की बदहाली
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने विधि शिक्षा के मानकों को बनाए रखने के लिए एक सख्त रुख अपनाया है। BCI ने पत्रांक 5153, दिनांक 4 अगस्त 26 को देश के सभी कुलपतियों को एक पत्र जारी किया है। इस पत्र में सभी विधि शिक्षण संस्थाओं का भौतिक निरीक्षण करने और मानक के अनुरूप सत्यापन रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है, ताकि संबद्धता जारी रखी जा सके या उसे समाप्त किया जा सके।

दरभंगा का सीएम लॉ कॉलेज, जिसकी स्थापना आजादी से पहले वर्ष 1944-45 में बैचलर ऑफ लॉ की पढ़ाई के साथ हुई थी, आज गंभीर संकट में है। वर्ष 1971 से लेकर सत्र 2010-11 तक, इस कॉलेज में एलएलबी कोर्स में प्रति वर्ष 320 छात्रों का नामांकन होता था। हालांकि, BCI के तय मानकों के अनुसार पूर्णकालिक विधि डिग्रीधारी प्राचार्य, 11 पूर्णकालिक शिक्षकों की कमी और आधारभूत संरचना के अभाव के चलते ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के इस अंगीभूत इकाई में वर्ष 2021 से 2024-25 तक छात्रों के नामांकन पर रोक लगा दी गई थी। अब, बीसीआई के निरीक्षण के बाद, सत्र 2025-26 के लिए केवल 60 छात्रों के नामांकन की सशर्त अनुमति मिली है।
सीएम लॉ कॉलेज को बचाने के लिए अधिवक्ताओं की मार्मिक अपील
इस ऐतिहासिक कॉलेज की दुर्दशा से चिंतित, जिला के अधिवक्ताओं ने बिहार के कुलाधिपति और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति को एक स्मार पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने मिथिला के गौरवशाली सीएम लॉ कॉलेज की अस्मिता को बचाने की पुरजोर मांग की है। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि कॉलेज में पूर्णकालिक विधि डिग्रीधारी प्राचार्य, पूर्णकालिक विधि डिग्रीधारी शिक्षकों की पदस्थापना, आधारभूत संरचना का निर्माण और आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था करना विश्वविद्यालय प्रशासन का कर्तव्य और नैतिक दायित्व है।
कॉलेज में पूर्ण कालिक विधि डिग्रीधारी प्राचार्य, पूर्णकालिक विधि डिग्रीधारी शिक्षकों की पदस्थापना और आधार भूत संरचना के साथ- साथ आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था करना विश्वविद्यालय प्रशासन का कर्तव्य और नैतिक दायित्व है।
स्मार पत्र में यह भी अनुरोध किया गया है कि कॉलेज की पुरानी गरिमा को बहाल किया जाए और मिथिला के छात्रों को विधि की पढ़ाई से वंचित न किया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से पहल कर BCI मानकों के अनुरूप सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने और पूर्व स्वीकृत 320 छात्रों के नामांकन का मार्ग प्रशस्त करने की मांग की है। इस महत्वपूर्ण पहल पर हस्ताक्षर करने वाले अधिवक्ताओं में सुधीर कुमार चौधरी, विजय नारायण चौधरी, बिरेन्द्र कुमार सिंह, अनिल कुमार मिश्रा, बुलन कुमार झा, कुमार उत्तम, मुरारी लाल केवट, सनोज कुमार, मनोज कुमार, हीरानंद मिश्रा और संपुर्णानंद झा सहित दर्जनों अन्य अधिवक्ता शामिल हैं।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय पर दारोमदार
अब गेंद पूरी तरह ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पाले में है। अधिवक्ताओं की इस सामूहिक अपील के बाद, विश्वविद्यालय प्रशासन पर सीएम लॉ कॉलेज को BCI के मानकों के अनुरूप बनाने का दबाव बढ़ गया है। यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो इस ऐतिहासिक संस्थान की मान्यता रद्द हो सकती है, जिससे न केवल मिथिला क्षेत्र के छात्रों को विधि शिक्षा से वंचित होना पड़ेगा, बल्कि एक गौरवशाली विरासत भी हमेशा के लिए समाप्त हो सकती है। छात्रों के भविष्य और कॉलेज की गरिमा को बचाने के लिए त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।







