Bihar Women Empowerment: बिहार में महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक पहल करते हुए मुख्यमंत्री बिहार सम्राट चौधरी ने एक ऐसे महिला विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा की है, जहाँ कुलपति से लेकर सभी प्रोफेसर और छात्राएं सिर्फ महिलाएं होंगी। रक्षाबंधन से पहले बिहार की बेटियों को आत्मनिर्भरता का यह बड़ा उपहार मिला है। 28 अगस्त, 2026 को सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र स्थित बापू सभागार में ‘विकसित भारत-समृद्ध बिहार’ एवं ‘बहनों का सम्मान, सरकार की पहचान’ थीम पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘समृद्ध महिला-समृद्ध बिहार’ अभियान का भी शुभारंभ किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 5 लाख महिला लाभुकों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 600 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की। इसके साथ ही, जीविका निधि से 10 हजार लाभुकों को ऋण वितरित किया गया और विकसित भारत-जी राम जी योजना के अंतर्गत 112 ग्रामीण हाट के निर्माण कार्य का भी शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री की उपस्थिति में नशामुक्ति एवं सामाजिक जागरूकता के लिए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय तथा मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर भी किए गए। मुख्यमंत्री ने ‘समृद्ध महिला-समृद्ध बिहार’ अभियान और ‘लखपति दीदी’ से संबंधित पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, ‘बिहार में महिला विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी, जिसमें टॉप टू बॉटम सभी अधिकारी एवं कर्मी महिलाएं होंगी। कुलपति से लेकर प्रोफेसर, कर्मचारी और छात्र सभी महिलायें होंगी।’ उन्होंने जोर देकर कहा, ‘जब महिलाएं समृद्ध होंगी, तभी बिहार समृद्ध होगा और भारत विकसित बनेगा।’
रोजगार, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तीकरण पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित नर्स बहाली परीक्षा में चयनित 7,376 बहनों को बधाई दी, इसे महिलाओं को सरकारी सेवा में रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने 31 मार्च तक 10 लाख जीविका दीदियों के घरों पर सोलर पैनल स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे चिह्नित परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़कर ऊर्जा आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य 1 करोड़ बहनों को रोजगार प्रदान करना और 1 करोड़ को ‘लखपति दीदी’ बनाना है, जिसमें पशुपालन, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के माध्यम से महिलाओं की आय और आर्थिक भागीदारी बढ़ाई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024-25 में आयोजित महिला संवाद के दौरान महिलाओं के आग्रह पर अमीर से लेकर गरीब तक सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट बिजली मुफ्त देने की बात कही। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि महिला संवाद के बाद ही वर्ष 2016 में बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई थी। वर्तमान में 1 करोड़ 81 लाख महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं और बिहार की अर्थव्यवस्था में जीविका दीदियों का योगदान करीब 1.46 लाख करोड़ रुपये का है। मुख्यमंत्री ने जीविका दीदियों को नशामुक्ति अभियान से जोड़ने और पूरे बिहार में नुक्कड़ नाटक एवं अन्य माध्यमों से लोगों को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक करने का आह्वान किया।
उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए भी बड़े कदम
महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल, कॉलेज, कार्यालय एवं जीविका समूहों के आसपास ‘पुलिस दीदी’ की तैनाती सुनिश्चित की गई है। महिला पुलिसकर्मियों को मोटर बाइक भी उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि महिलाओं एवं छात्राओं की सुरक्षा और शिकायतों का त्वरित समाधान हो सके। बिहार में करीब 40 हजार महिला पुलिसकर्मी कार्यरत हैं, जो देश में सर्वाधिक संख्या है। उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 1,000 महिलाओं को पीएचडी की पढ़ाई के लिए प्रतिमाह 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वर्तमान में बिहार में करीब 4,600 लोग पीएचडी कर रहे हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या लगभग 600 है।
मुख्यमंत्री ने ‘सहयोग कार्यक्रम’ का भी उल्लेख किया, जिसके तहत लोगों की समस्याओं का 30 दिनों के अंदर समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके अलावा, बिहार को एनीमिया मुक्त बनाने के लिए एक अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत नवंबर तक एक करोड़ महिलाओं की स्वास्थ्य जांच कर उन्हें आवश्यक दवा निःशुल्क उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
बिहार को समृद्ध बनाने की ओर अग्रसर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दोहराया कि सरकार महिलाओं को उद्योगपति और लखपति बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, और उनके लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य में 1 करोड़ लोगों को सरकारी नौकरी एवं रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था और इस दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय श्री नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में जीविका को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान का जिक्र किया, जिसके परिणामस्वरूप आज बिहार में 50 लाख जीविका दीदियां लखपति दीदी बन चुकी हैं। पशु सखी अभियान के तहत करीब 25 लाख महिलाएं पशुपालन, बकरी पालन एवं गाय पालन से जुड़ी हैं। बिहार सरकार ने वर्ष 2030 तक महिलाओं पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है, जो उनके आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य सशक्तीकरण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।







