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FPI की बिकवाली से संकट में भारतीय शेयर बाजार: क्या है आगे की राह?

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Stock Market: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली का सिलसिला इस साल भी जारी है, जिसने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। जनवरी में अब तक 22,530 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी के साथ, यह ट्रेंड पिछले साल की बिकवाली के पैटर्न को दर्शाता है, जिससे रुपये पर भी दबाव बढ़ रहा है।

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FPI की बिकवाली से संकट में भारतीय शेयर बाजार: क्या है आगे की राह?

जनवरी 2024 में, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से 22,530 करोड़ रुपये (लगभग 2.5 बिलियन डॉलर) की भारी-भरकम राशि निकाल ली है। यह बिकवाली पिछले साल की प्रवृत्ति को आगे बढ़ाती है, जब कुल 1.66 लाख करोड़ रुपये (18.9 बिलियन डॉलर) की निकासी दर्ज की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती जैसे वैश्विक कारक विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार से दूर कर रहे हैं।

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भारतीय शेयर बाजार से क्यों घट रहा है विदेशी निवेशकों का भरोसा?

सेंट्रिसिटी वेल्थटेक में इक्विटी के हेड और फाउंडिंग पार्टनर सचिन जासूजा के अनुसार, “बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर ने विकसित बाजारों में रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न को बेहतर बनाया है, जिससे उभरते बाजारों से पूंजी का पुनर्वितरण हो रहा है।” यह बताता है कि क्यों विदेशी निवेशक अब अमेरिकी संपत्तियों को अधिक आकर्षक मान रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल-मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने भी इस बात पर जोर दिया कि बढ़े हुए अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती ने अमेरिकी संपत्तियों को तुलनात्मक रूप से अधिक आकर्षक बना दिया है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक और व्यापार संबंधी अनिश्चितताएं भी उभरते बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता को कम कर रही हैं।

रुपये पर बढ़ता दबाव और आर्थिक प्रभाव

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की इस लगातार बिकवाली के कारण डॉलर के मुकाबले रुपये में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट आई है। जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों को बेचते हैं, तो वे अपनी कमाई को डॉलर में बदलने की कोशिश करते हैं, जिससे बाजार में डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपये की आपूर्ति कम हो जाती है। यह डॉलर के मुकाबले रुपये को कमजोर करता है। NSDL के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 16 जनवरी के बीच FPIs ने भारतीय इक्विटी से 22,530 करोड़ रुपये निकाले।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार के मुताबिक, अमेरिका-भारत के बीच व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी निवेशकों की भावना को कमजोर किया है। घरेलू मोर्चे पर, कुछ मार्केट सेगमेंट में उच्च मूल्यांकन और चल रहे अर्निंग्स सीजन से मिले-जुले संकेतों के कारण विदेशी निवेशक अपना मुनाफा निकाल रहे हैं। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें

बिकवाली का सिलसिला कब थमेगा?

विजयकुमार ने कहा कि बिकवाली का यह ट्रेंड तब तक जारी रह सकता है, जब तक बाजार को रैली के लिए कोई स्पष्ट सकारात्मक ट्रिगर नहीं मिल जाता। उन्होंने यह भी बताया कि 2025 में बाजारों पर हावी रहा AI-आधारित ट्रेड 2026 की शुरुआत में भी जारी रहा, हालांकि इस ट्रेंड में साल के अंत तक बदलाव देखा जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियादी बातें विदेशी पूंजी को आकर्षित कर सकती हैं, लेकिन वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बदलावों के प्रति संवेदनशीलता बनी हुई है। भारत सरकार और नियामक निकायों के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि वे पूंजी प्रवाह को आकर्षित करने और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए उपयुक्त नीतियां बनाएं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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