
Parliament Suspension: कभी-कभी राजनीति का रंग इतना गहरा हो जाता है कि सदन की गरिमा भी दांव पर लग जाती है, लेकिन जब संतुलन सधता है तो गतिरोध भी टूटता है।
Parliament Suspension: लोकसभा से 8 सांसदों का निलंबन रद्द, ओम बिरला की पहल से सुलझा गतिरोध
Parliament Suspension: गतिरोध समाप्त, सांसदों की बहाली तय
लोकसभा में बजट सत्र के दौरान अनुशासनहीन आचरण के आरोप में निलंबित किए गए आठ सांसदों का निलंबन मंगलवार को समाप्त होने की प्रबल संभावना है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा बुलाई गई एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक में इन आठ विपक्षी सदस्यों की बहाली पर सर्वसम्मति से सहमति बन गई है। यह निर्णय लिया गया है कि सांसदों का निलंबन रद्द करने संबंधी प्रस्ताव आगामी सत्र में संसद पटल पर रखा जाएगा। इस समझौते के तहत, यह तय किया गया है कि सांसद भविष्य में सदन के भीतर तख्तियों या किसी भी कृत्रिम रूप से निर्मित तस्वीर का इस्तेमाल नहीं करेंगे और संसद की गरिमा व मर्यादा को हर हाल में बनाए रखेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
गौरतलब है कि इन आठ विपक्षी सांसदों को 4 फरवरी को लोकसभा से पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था। यह कार्रवाई तब हुई जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा तनाव के विषय पर विशेष उल्लेख करने की मांग की, जिसके बाद सदन में भारी हंगामा हुआ था। इन सांसदों पर नियमों का उल्लंघन करने और आसन की ओर कागज फेंकने का आरोप लगा था।
अध्यक्ष की अपील और संसदीय मर्यादा का महत्व
इस घटनाक्रम से पूर्व, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने सदन के भीतर और संसद भवन परिसर में बैनर, तख्तियों तथा पोस्टरों के प्रदर्शन पर अपनी गहरी निराशा व्यक्त की थी। उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया था कि कुछ समय से कुछ माननीय सदस्यों द्वारा संसदीय लोकतंत्र की गरिमा और प्रतिष्ठा को धूमिल किया जा रहा है। बैनर और प्लेकार्ड प्रदर्शित करने का तरीका, इस्तेमाल की जा रही आपत्तिजनक भाषा, और सदन व परिसर के भीतर प्रदर्शित समग्र आचरण व व्यवहार हम सभी के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। अध्यक्ष ने इस स्थिति को व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से गहन चिंतन और विश्लेषण की आवश्यकता बताया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/।
बिरला ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय संसद ने सदैव गरिमापूर्ण चर्चा और सार्थक संवाद की एक गौरवशाली परंपरा को अक्षुण्ण रखा है। उन्होंने याद दिलाया कि अतीत में भी, जब कभी सदन के आचरण के स्तर में गिरावट महसूस की गई है, तो सभी राजनीतिक दलों और अन्य संबंधित हितधारकों द्वारा समय-समय पर सम्मेलन आयोजित किए गए हैं। इन सम्मेलनों में लोकतांत्रिक संस्थानों की गरिमा और प्रतिष्ठा को संरक्षित व बढ़ावा देने के तरीकों पर व्यापक चर्चा की गई है। अध्यक्ष ने आगे बताया कि यह विषय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलनों में भी उठाया गया है और इस संबंध में महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किए गए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







