Bhagalpur News: भागलपुर के भागलपुर में विक्रमशिला सेतु पर आई तेज आंधी और बारिश एक परिवार के लिए काल बन गई। एक पिता ने अपने 13 वर्षीय बेटे को बचाने के लिए खुद को खतरे में डाल दिया और दर्दनाक हादसे का शिकार हो गए। नवगछिया के सोनवर्षा निवासी विनय कुमार ईश्वर (40) की मौत उस समय हो गई, जब वे आंधी से बचने के लिए पुल पर बने एक शेड के नीचे रुके थे। चार दिन बाद घर में शादी की तैयारियां शुरू होने वाली थीं, लेकिन इस हादसे ने खुशियों को मातम में बदल दिया।
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विक्रमशिला सेतु पर मौत का तांडव: बेटे के सामने उजड़ा संसार
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मौसम अचानक बदला और तेज बवंडर के साथ बारिश शुरू हो गई। विनय कुमार अपने बेटे लक्की के साथ बाइक रोककर एक शेड के पास खड़े हो गए। उन्हें लगा कि यह शेड सुरक्षित रहेगा, लेकिन तेज हवा के झोंके में पूरा शेड उखड़ गया। उसका भारी टीन और लोहे का हिस्सा सीधे विनय कुमार के सिर के पिछले हिस्से में लगा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई।
बेटे लक्की ने बताया, ‘पिता रोज दूध लेकर भागलपुर आते थे। मैं भी उनके साथ शादी की खरीदारी करने शहर आया था। खरीदारी पूरी कर हम गांव लौट रहे थे। पुल पर पहुंचते ही मौसम खराब हो गया। पिता ने मुझे सुरक्षित समझकर शेड के अंदर बैठा दिया और खुद बाहर खड़े हो गए। तभी तेज हवा चली और पूरा शेड भरभराकर गिर पड़ा। उसका भारी टीन और लोहे का हिस्सा सीधे पिता के सिर पर आ गिरा।’
लक्की के अनुसार, शेड के अंदर इनवर्टर और बैटरी रखी हुई थी। शेड गिरने के बाद उसे करंट जैसा भी महसूस हुआ और उसके पैर में चोट भी लगी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह मलबा हटाकर विनय को बाहर निकाला, उस समय उनकी सांसें चल रही थीं और शरीर में हलचल भी थी।
इलाज में देरी और मुआवजे की मांग पर सड़क जाम
परिजनों ने आरोप लगाया है कि हादसे के बाद घायल विनय को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया गया। काफी देर तक वे पुल पर ही पड़े रहे और उनके सिर, नाक तथा कान से लगातार खून बहता रहा। बाद में उन्हें ऑटो से मायागंज अस्पताल लाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सिर में गंभीर चोट लगने की स्थिति में शुरुआती एक घंटा ‘गोल्डन टाइम’ माना जाता है, जिसमें उचित इलाज मिलने पर जान बचने की संभावना अधिक रहती है, लेकिन विनय कुमार के मामले में यही समय सबसे बड़ी चुनौती बन गया।
इस घटना से आक्रोशित परिजनों ने मायागंज अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस के मुख्य गेट के सामने सड़क जाम कर दिया। करीब दो घंटे तक यातायात बाधित रहा। परिजन जिलाधिकारी को बुलाने और उचित मुआवजा देने की मांग पर अड़े रहे। सूचना मिलने पर जगदीशपुर अंचलाधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों से बातचीत की।
अंचलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि ‘सरकारी नियमों के अनुसार जो भी सहायता संभव होगी, वह उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही शेड की मजबूती, उसके रखरखाव और घायल को अस्पताल पहुंचाने में हुई देरी की जांच भी कराई जाएगी।’
हालांकि आश्वासन के बावजूद परिजन काफी देर तक सड़क पर डटे रहे। आंधी ने विक्रमशिला सेतु पर जाह्नवी चौक की ओर बिजली आपूर्ति से जुड़ा एक पाइप और तार भी गिरा दिया, हालांकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। स्थानीय लोगों ने पुल पर लगे सभी ढांचों और उपकरणों की नियमित जांच कराने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।









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