Bihar Magadh University: बिहार की प्रमुख शिक्षण संस्था मगध विश्वविद्यालय और उसके अधीन कॉलेजों में नए असिस्टेंट प्रोफेसरों की परेशानियां बढ़ गई हैं। बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) के माध्यम से नियुक्त हुए इन शिक्षकों के अनुभव प्रमाणपत्रों की सघन जांच शुरू कर दी गई है। यह बड़ा कदम कुछ असफल अभ्यर्थियों द्वारा फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी पाने की शिकायत के बाद उठाया गया है, जिससे कई शिक्षकों के वेतन भुगतान पर रोक लग गई है।
Bihar Cabinet: 5 नए विश्वविद्यालय, AI मिशन, 1 लाख करोड़ की टाउनशिप, शिक्षकों के ट्रांसफर नियम… बिहार कैबिनेट के 47 बड़े फैसले..अभी पढ़ें
उच्च शिक्षा विभाग और आयोग के कड़े निर्देशों पर, जब तक यह जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक सभी संबंधित शिक्षकों के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही, जांच रिपोर्ट आने तक उन्हें नौकरी में स्थायी भी नहीं माना जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन संबंधित शिक्षण संस्थानों से आने वाली जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिसके आधार पर ही वेतन जारी करने या फर्जीवाड़ा पाए जाने पर बर्खास्तगी जैसी कानूनी कार्रवाई तय होगी।






फर्जीवाड़े की शिकायत और जांच के आदेश
बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से 2024 से शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है। नियुक्ति के बाद, कुछ अभ्यर्थियों ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि कई लोगों ने फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र लगाकर मेरिट लिस्ट में जगह बनाई है। इस गंभीर शिकायत को देखते हुए, आयोग और उच्च शिक्षा विभाग ने सभी नवनियुक्त शिक्षकों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन (वेरिफिकेशन) का आदेश जारी किया। हालांकि, मगध विश्वविद्यालय में अभी भी जूलॉजी, बॉटनी, इतिहास और कॉमर्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों के लिए शिक्षकों की नियुक्ति लंबित है।
चयन प्रक्रिया और अनुभव प्रमाणपत्र का महत्व
इन असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए कोई लिखित परीक्षा नहीं ली गई है। चयन का आधार पूरी तरह से एकेडमिक रिकॉर्ड और अनुभव है, जिसे ‘स्कोर’ कहा जाता है। कुल 100 अंकों में से 80 अंक स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी और पढ़ाने के अनुभव पर दिए जाते हैं, जबकि 20 अंक इंटरव्यू के होते हैं। नियमानुसार, किसी प्रमाणित संस्थान में एक साल पढ़ाने के अनुभव के लिए दो अंक मिलते हैं। एक अभ्यर्थी को अधिकतम पांच साल के अनुभव के लिए 10 अंक दिए जा सकते हैं। इसी 10 अंक का फायदा उठाने के लिए फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है।
कुलपति का स्पष्टीकरण और आगे की राह
प्रमाणपत्रों की जांच के लिए मगध विश्वविद्यालय ने एक विशेष समिति का गठन किया है। यह समिति शिक्षकों के अनुभव प्रमाणपत्रों को उन शिक्षण संस्थानों के पास भेज रही है, जहां से वे जारी हुए हैं। लेकिन संबंधित संस्थानों की ओर से रिपोर्ट भेजने में हो रही देरी के कारण शिक्षकों का वेतन अटका हुआ है। परेशान शिक्षकों के एक दल ने मगध यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति प्रो दिलीप कुमार केसरी से मुलाकात कर जांच प्रक्रिया में तेजी लाने की गुहार लगाई है।
मगध विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो दिलीप कुमार केसरी ने बताया, “उच्च शिक्षा विभाग के आदेश का सख्ती से पालन किया जा रहा है। कमेटी के माध्यम से सभी संबंधित संस्थानों के कुलसचिवों (रजिस्ट्रार) को प्रमाणपत्र भेजे गए हैं। वहां से रिपोर्ट आने में हो रही देरी के कारण वेतन रुका है।” उन्होंने आगे स्पष्ट किया, “सभी की रिपोर्ट आने के बाद इसे आयोग और उच्च शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा। इसके बाद ऊपर से जो निर्देश मिलेगा, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
कुलपति ने बताया कि जांच पूरी होने और उच्च शिक्षा विभाग से निर्देश मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी, जिससे इस मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।








