Bihar Tender Scam: बिहार में कथित ‘टेंडर घोटाले’ को लेकर चल रही जांच में नया मोड़ आ गया है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस ने अपने खिलाफ विशेष निगरानी इकाई (SVU) द्वारा दायर चार्जशीट को अदालत में चुनौती देने का बड़ा ऐलान किया है। उनके कानूनी सलाहकार, अधिवक्ता फारुख खान ने इस मामले को ‘गलत, दुर्भावनापूर्ण और आधिकारिक रिकॉर्ड के विपरीत’ बताया है।
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खान ने एक बयान जारी कर कहा कि इस नए मामले में संजीव हंस के खिलाफ कोई भी नया आपत्तिजनक सबूत पेश नहीं किया गया है, जबकि पहले के आरोपों की अदालतों द्वारा जांच की जा चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लगभग तीन दशकों तक बिहार सरकार की सेवा करने वाले हंस, इस चार्जशीट के खिलाफ सभी उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा लेंगे और अपने ऊपर लगे आरोपों का जोरदार खंडन करेंगे।






IAS संजीव हंस का बेदाग प्रशासनिक रिकॉर्ड
संजीव हंस के वकील ने उनके कार्यकाल के दौरान शुरू की गई कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का हवाला दिया। इनमें जल संसाधन विभाग के सचिव के रूप में उनके नेतृत्व में शुरू की गई ‘गंगाजल आपूर्ति योजना’ प्रमुख है। इसके अलावा, गया में फल्गु नदी पर रबर डैम परियोजना में उनकी भूमिका और ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव व बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष के रूप में राज्य के बिजली क्षेत्र में किए गए सुधारों को भी रेखांकित किया गया। बचाव पक्ष का कहना है कि ये उपलब्धियां उन बार-बार के प्रयासों के विपरीत हैं, जिनमें हंस को ऐसी कार्यवाही में फंसाने की कोशिश की गई है, जो न्यायिक जांच में खरी नहीं उतरी हैं।
अदालती आदेशों का हवाला और पुराने FIR का खारिज होना
खान ने तर्क दिया कि पटना के रूपसपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR संख्या 18/2023, जिस पर बाद की कार्यवाही आधारित थी, को पटना उच्च न्यायालय ने 6 अगस्त, 2024 को रद्द कर दिया था। उनके बयान के अनुसार, बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी उच्च न्यायालय के इस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि अक्टूबर 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा शुरू की गई कार्यवाही में हंस को जमानत देते हुए, पटना उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि यह मानने के लिए कोई उचित आधार नहीं है कि वह अपराध की कथित आय को छिपाने, परत-दर-परत करने या वैध बनाने में शामिल थे।
SVU मामले में आरोपों को चुनौती
संजीव हंस की कानूनी टीम के अनुसार, FIR संख्या SVU-05/2025 में मुख्य रूप से वही आरोप दोहराए गए हैं जो प्रवर्तन निदेशालय की कार्यवाही के दौरान सामने आए थे। इसमें कोई भी नया आपत्तिजनक सबूत नहीं है। बयान में विशेष रूप से बीरपुर फिजिकल मॉडलिंग सेंटर परियोजना से संबंधित आरोपों पर विवाद किया गया। इसमें दावा किया गया कि आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि संबंधित निविदा प्रक्रिया हंस के जल संसाधन विभाग के सचिव का पदभार संभालने से पहले ही शुरू हो गई थी। खान ने यह भी कहा कि हंस की अध्यक्षता वाली विभागीय निविदा समिति ने शुरुआत में निविदा को खारिज करने की सिफारिश की थी और बाद के निर्णय विश्व बैंक के निर्देशों और उचित प्रक्रिया के अनुसार लिए गए थे।
बार-बार के आरोपों पर चिंता
बचाव पक्ष ने गायत्री कुमारी और सुनील कुमार सिन्हा द्वारा दायर शिकायतों से जुड़े आरोपों को भी चुनौती दी है। उनका तर्क है कि इन मुद्दों की न्यायिक जांच पहले ही उस FIR से जुड़ी कार्यवाही में हो चुकी है, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था। खान ने कहा कि संवैधानिक अदालतों द्वारा पहले ही जांचे जा चुके आरोपों का बार-बार उपयोग उन दावों को पुनर्जीवित करने के प्रयासों के बारे में चिंता पैदा करता है जिन्हें पहले ही खारिज किया जा चुका है। हालिया SVU प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र करते हुए, बयान में तर्क दिया गया कि सार्वजनिक रूप से चर्चा किए गए कई आरोप रद्द की गई FIR से काफी हद तक लिए गए थे और ऐसे तथ्यों पर लगातार निर्भरता पर सवाल उठाया गया, जिनकी अदालतों द्वारा पहले ही समीक्षा की जा चुकी है।
कानूनी चुनौती की तैयारी
संजीव हंस के वकील ने कहा कि पूर्व नौकरशाह FIR संख्या SVU-05/2025 में दायर चार्जशीट को चुनौती देने और कानून के तहत उपलब्ध सभी कानूनी उपायों का पालन करने की तैयारी कर रहे हैं। बयान में कहा गया है कि हंस न्यायिक प्रक्रिया में अपना विश्वास बनाए हुए हैं और कानूनी माध्यमों से अपना बचाव करने का इरादा रखते हैं।
बयान में कहा गया है, ‘वह दुर्भावनापूर्ण अभियोजन और अनुचित सार्वजनिक बदनामी के बार-बार के प्रयासों के खिलाफ अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।’
विशेष निगरानी इकाई ने अपनी जांच में अनियमितताओं और अनुपातहीन संपत्ति का आरोप लगाया है, जबकि हंस ने लगातार किसी भी गलत काम से इनकार किया है। अब यह मामला अदालतों के सामने लड़े जाने की उम्मीद है क्योंकि कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।








