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दरभंगा में महीनों से जला ट्रांसफार्मर, सूख रहे खेत… आखिर कब जागेगा बिजली विभाग?

Darbhanga News: जाले प्रखंड के रतनपुर, सुखरामपुर समेत कई गांवों के किसान पिछले कई माह से कृषि बिजली के अभाव में परेशान हैं। विभागीय अनदेखी के कारण खेती पर संकट गहरा गया है, जिससे उनकी लागत लगातार बढ़ रही है।

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Darbhanga News: दरभंगा के जाले प्रखंड में किसानों को पिछले कई महीनों से गंभीर बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। सनहपुर पावर सब-स्टेशन से जुड़े रतनपुर, ब्रह्मपुर पूर्वी व पश्चिमी, कछुआ, राढ़ी दक्षिणी और राढ़ी पश्चिमी पंचायतों के हजारों किसान सिंचाई के लिए बिजली के अभाव में बेहाल हैं। विशेष रूप से रतनपुर पंचायत के वार्ड 14 स्थित सुखरामपुर और रतनपुर हेलीपैड के समीप लगा एग्रीकल्चर फीडर का ट्रांसफार्मर कई माह से जला पड़ा है, जिससे कृषि कार्य ठप हो गया है।

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किसानों का आरोप है कि उन्होंने इस समस्या की जानकारी कई बार विभागीय अधिकारियों और कर्मियों को दी है, लेकिन अब तक जले हुए ट्रांसफार्मर को बदलने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। कृषि फीडर से बिजली आपूर्ति ठप होने के कारण खेत सूखे पड़े हैं और फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

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किसानों की मजबूरी: घरेलू कनेक्शन से सिंचाई, बढ़ रहा खर्च

कृषि फीडर की लगातार खराब स्थिति ने किसानों को वैकल्पिक और महंगे समाधान अपनाने पर मजबूर कर दिया है। बिजली नहीं मिलने के कारण कई किसान मजबूरीवश अपने घरेलू फीडर से कनेक्शन जोड़कर खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। इस कदम से न केवल बिजली बिल बढ़ रहा है, बल्कि घरेलू बिजली आपूर्ति पर भी अनावश्यक दबाव पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि एग्रीकल्चर फीडर में छोटी-मोटी खराबी या फ्यूज जलने पर भी उसे ठीक होने में कई-कई सप्ताह लग जाते हैं, जबकि घरेलू फीडर में खराबी आने पर विभाग तत्काल मरम्मत कर देता है।

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किसानों ने बताया कि एग्रीकल्चर फीडर की व्यवस्था लंबे समय से जर्जर बनी हुई है। बार-बार होने वाली तकनीकी खराबी के कारण सिंचाई का काम प्रभावित होता है, जिससे उनकी खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। यह स्थिति उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।

तत्काल समाधान की मांग: कृषि फीडर की मरम्मत और नियमित आपूर्ति

किसानों ने विभाग से तत्काल जले हुए ट्रांसफार्मर को बदलने और कृषि फीडर की मरम्मत कर नियमित बिजली आपूर्ति बहाल करने की पुरजोर मांग की है। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो उन्हें अपनी खेती बचाने के लिए और भी बड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।

इस गंभीर संकट से जूझ रहे किसानों की निगाहें अब विभाग पर टिकी हैं कि कब उनकी समस्या का समाधान होगा और उनके खेतों को समय पर पानी मिल पाएगा। यह स्थिति न केवल किसानों के लिए, बल्कि क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।

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