Bihar Monsoon Impact: बिहार के कई हिस्सों में कमजोर और अनियमित मॉनसून ने किसानों की कमर तोड़ दी है। दरभंगा जिले के कमतौल और जाले जैसे क्षेत्रों में किसान आर्थिक संकट के साथ-साथ गंभीर शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। बारिश की बेरुखी से फसलों की पैदावार घट गई है और लागत बढ़ गई है, जिससे किसानों पर कर्ज का भारी बोझ पड़ा है।
प्रगतिशील किसान धीरेन्द्र सिंह सहित कई अन्य किसानों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि कमजोर और अनियमित मॉनसून का असर आम लोगों पर भी पड़ता है। उन्होंने बताया कि ‘कमजोर और अनियमित मॉनसून का असर आमलोगों पर पड़ता है। साथ ही किसानों के स्वास्थ्य और आजीविका पर गहरा असर पड़ता है।’






आर्थिक संकट और मानसिक तनाव की दोहरी मार
फसल बर्बाद होने से किसानों की आय का जरिया खत्म हो जाता है। बार-बार कर्ज लेने और उसे चुकाने की चिंता किसानों में अवसाद और एंग्जायटी का प्रमुख कारण बन रही है। आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव मिलकर उनकी परेशानी को और बढ़ा देते हैं, जिससे उनका जीवन दुश्वार हो गया है।
शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर: डिहाइड्रेशन से अस्थमा तक
बारिश के अभाव में किसानों को ट्यूबवेल या पंपिंग सेट से सिंचाई करनी पड़ती है। इसके लिए उन्हें कड़ी धूप और उमस में लगातार घंटों काम करना पड़ता है। इससे डिहाइड्रेशन और शारीरिक कमजोरी जैसी कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। पौष्टिक भोजन की कमी के कारण पोषण का संकट भी गहरा रहा है। सूखे के कारण खेतों में उड़ने वाली धूल और मिट्टी में काम करने से सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां, जैसे अस्थमा, का खतरा बढ़ जाता है।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह: सूखे से निपटने के उपाय
कमजोर और अनियमित मॉनसून को देखते हुए कृषि विशेषज्ञ वर्षा-आधारित क्षेत्रों के किसानों को लगातार सलाह दे रहे हैं। उन्हें कम पानी वाली लचीली फसलें जैसे दालें, तिलहन या मोटे अनाज उगाने की सलाह दी जा रही है। इसके अतिरिक्त, जल संरक्षण के लिए माइक्रो-इरिगेशन तकनीक का इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि पानी की कमी के बावजूद फसलें सुरक्षित रह सकें।
यह स्थिति दर्शाती है कि बिहार में कमजोर मॉनसून सिर्फ कृषि समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संकट का रूप ले रहा है, जिसके लिए तत्काल और प्रभावी समाधानों की आवश्यकता है।







