Bhagalpur Doctors Shortage: बिहार के भागलपुर जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई है। पीरपैंती रेफरल अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण सोमवार को मरीजों को असहनीय परेशानी का सामना करना पड़ा। ओपीडी में सिर्फ दो चिकित्सकों के मौजूद होने से इलाज के लिए आए सैकड़ों मरीजों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा।
मरीजों की लंबी कतारें, डॉक्टर भी परेशान
पीरपैंती रेफरल अस्पताल में सोमवार को ओपीडी के लिए चार डॉक्टरों की ड्यूटी निर्धारित की गई थी, लेकिन मौके पर केवल दो डॉक्टर ही मौजूद थे। डॉ. अर्चना कुमारी और डॉ. स्वाती कुमारी यादव, जो ड्यूटी पर थीं, ने बताया कि मरीजों की संख्या बहुत अधिक थी। ऐसे में केवल दो डॉक्टरों के लिए सभी मरीजों को समय पर देख पाना लगभग असंभव था।






इलाज के इंतजार में कई मरीज और उनके परिजन घंटों तक लाइन में खड़े रहे। इस स्थिति से मरीजों में काफी नाराजगी देखने को मिली। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की, ताकि सभी चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो सके और उन्हें समय पर इलाज मिल पाए।
डॉ. अर्चना कुमारी और डॉ. स्वाती कुमारी यादव ने बताया कि सोमवार को ओपीडी में चार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन केवल वे दोनों ही ड्यूटी पर मौजूद थीं। मरीजों की संख्या काफी अधिक थी, ऐसे में दो डॉक्टरों के लिए सभी मरीजों को समय पर देख पाना संभव नहीं था।
स्थानीय लोगों की प्रशासन से सख्त मांग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पीरपैंती रेफरल अस्पताल इस पूरे क्षेत्र की बड़ी आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का एक प्रमुख केंद्र है। यदि यहां तैनात चिकित्सक समय पर अपनी ड्यूटी पर नहीं आएंगे, तो इसका सीधा और गंभीर असर मरीजों के इलाज पर पड़ेगा।
लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से इस पूरे मामले की गहन जांच करने और दोषी अधिकारियों व चिकित्सकों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने अस्पताल में पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया, ताकि भविष्य में मरीजों को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
अस्पताल क्षेत्र की बड़ी आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का यह प्रमुख केंद्र है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग से इस मामले की तत्काल जांच और आवश्यक कार्रवाई की उम्मीद है, ताकि भविष्य में मरीजों को समय पर उचित उपचार मिल सके और उन्हें बेवजह इंतजार न करना पड़े। पर्याप्त चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।








