Bihar Sikki Art: मिथिला क्षेत्र की प्राचीन और सांस्कृतिक विरासत ‘सिक्की कला’ अब बिहार में बंपर रोजगार का माध्यम बनेगी। दरभंगा के भाजपा सांसद और लोकसभा में पार्टी सचेतक डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने कहा है कि यह कला न केवल मिथिला की पहचान है, बल्कि इसे राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर ठोस पहल कर रही है। इससे खासकर जीविका से जुड़ी महिलाओं को बड़ा फायदा मिलेगा।
सांसद डॉ. ठाकुर ने हाल ही में राष्ट्रपति पुरस्कार और राज्य पुरस्कार से सम्मानित सिक्की कलाकार सुधीरा देवी और चंद्र कुमार ठाकुर सहित अन्य हस्तशिल्पियों से इस कला के उत्थान पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिक्की कला का राजा जनक और माता जानकी से गहरा ऐतिहासिक संबंध रहा है।






जनक-जानकी से जुड़ी है सिक्की कला की विरासत
डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने कलाकारों से संवाद के दौरान बताया कि इतिहास में इस बात का जिक्र है कि राजा जनक ने अपनी पुत्री माता जानकी के विवाह में इसी तरह की कलाकृतियों को उपहार स्वरूप भेंट किया था। यह कला मिथिला के सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। सांसद ठाकुर ने कहा कि यह पारंपरिक हस्तशिल्प अब देश स्तर पर एक नया आयाम स्थापित करेगा।
बिहार की पहचान और मिथिला के सौंदर्य की विरासत है सिक्की कला। सिक्की कला को देश स्तर पर नया आयाम देने की हो रही पहल। राजा जनक और माता जानकी से जुड़ा संबंध है सिक्की कला का।
— डॉ. गोपाल जी ठाकुर, सांसद, दरभंगा
सिक्की कला से इन क्षेत्रों में बढ़ेगा रोजगार
सिक्की कला प्राकृतिक घास से बनाई जाने वाली एक खास हस्तशिल्प कला है। इसके तहत टोकरियां, डिब्बे, ट्रे, कोस्टर, बॉलटैगिंग, देवी-देवताओं और महापुरुषों के तैल चित्र, साथ ही बच्चों के खिलौने जैसी कई आकर्षक चीजें बनाई जाती हैं। सांसद ठाकुर ने इसे दरभंगा, मधुबनी, सीतामढी, शिवहर, मुजफ्फरपुर और नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों के लिए रोजगार का एक सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि इस कला से जुड़े हस्तशिल्पियों को प्रोत्साहित करना बेहद जरूरी है, ताकि यह जीविका की महिलाओं के माध्यम से और आगे बढ़ सके। सरकार की इस पहल से इन क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण की नई राह खुलेगी।








