Bhagalpur Manjusha Art: भागलपुर में पारंपरिक मंजूषा कला को घर-घर पहुंचाने और युवाओं को इससे जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है। ‘हर घर मंजूषा’ नाम के इस जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ डिवाइन हैप्पी पब्लिक स्कूल के प्रांगण से हुआ। मंजूषा गुरु मनोज कुमार पंडित के नेतृत्व में इस पहल का मुख्य उद्देश्य 11,000 घरों तक इस प्राचीन कला को पहुंचाना और नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति से जोड़ना है।
यह अभियान मंजूषा कला प्रशिक्षण केंद्र, इंटैक भागलपुर चैप्टर और स्पीक मैके के संयुक्त तत्वावधान में चलाया जा रहा है। इसमें तारा गंगा विकास फाउंडेशन, काला सागर सांस्कृतिक संगठन, सूर्य जनमानस विकास समिति और माया 73 लोकसभा संस्थान का भी विशेष सहयोग मिल रहा है।






युवाओं को स्वावलंबी बनाने का संकल्प
मंजूषा गुरु मनोज कुमार पंडित ने इस अभियान के पीछे के अपने व्यापक संकल्प को साझा किया। उनका लक्ष्य कम से कम 108 लोगों को सीधे मंजूषा कला के प्रति जागरूक करना है। इसके साथ ही, वे शिक्षित युवक-युवतियों को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगारोन्मुखी बनाना चाहते हैं, ताकि वे अपनी कला के माध्यम से स्वावलंबी बन सकें।
मंजूषा गुरु मनोज कुमार पंडित ने कहा, “इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना अभियान का लक्ष्य है और शिक्षित युवक-युवतियों को प्रशिक्षित कर रोजगार मुखी बनाकर स्वावलंबी भी बनाना है क्योंकि अपनी संस्कृति ही अपनी धरोहर है।”
200 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में डिवाइन हैप्पी पब्लिक स्कूल की प्राचार्य श्रीमती सुमना देव, ज्योति मुखर्जी, अनियुल खोसला, रामदेव सिंह, पुष्पा भारती, काशीकांत सिंह, बीना मिश्रा और पवन कुमार सागर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। अनुकृति मिश्रा, प्रीति कुमारी, वर्षा कुमारी, रामस्वरूप सिंह, माला घोष, अर्चना कुमारी और सौरभ केसरी जैसे कई अन्य लोग भी इस पहल से जुड़े हैं।
कला और संस्कृति का संरक्षण
यह अभियान केवल कला को बढ़ावा देने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा संबंध सांस्कृतिक संरक्षण से भी है। मंजूषा गुरु का मानना है कि अपनी संस्कृति ही अपनी धरोहर है, और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। इस पहल से भागलपुर की मंजूषा कला को न सिर्फ स्थानीय स्तर पर पहचान मिलेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी इसकी पहुंच सुनिश्चित होगी, जिससे कलाकारों को नए अवसर मिलेंगे।








