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Darbhanga News जाले के किसानों पर दोहरी मार! बारिश गायब, बिजली गुल, अब 100 रुपये लीटर डीजल से कैसे होगी धान की रोपनी?

Jale Paddy Transplantation: मानसून की बेरुखी और विद्युत विभाग की लापरवाही ने जाले प्रखंड के अन्नदाताओं को मुश्किल में डाल दिया है। निजी नलकूप और डीजल पंपसेट के सहारे खेतों में उतरने को मजबूर किसान लगातार बढ़ते आर्थिक बोझ से जूझ रहे हैं।

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Jale Paddy Transplantation: बिहार के जाले प्रखंड में खरीफ मौसम की धान रोपनी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मानसून सक्रिय होने के बावजूद पर्याप्त बारिश न होने से किसान बेहाल हैं। अनियमित बिजली आपूर्ति और आसमान छूते डीजल के दाम उनकी परेशानी को और बढ़ा रहे हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और अन्नदाताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

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जाले में सूखे जैसे हालात, महंगे डीजल- बिजली कटौती ने किसानों की कमर तोड़ी, कैसे होगी धान रोपनी?

Bihar Monsoon: बिहार में मानसून की बेरुखी और अनियमित बारिश के कारण जाले समेत कई प्रखंडों में धान रोपनी पर संकट गहरा गया है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसान निजी नलकूपों के सहारे खेतों की सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन बिजली संकट और महंगे डीजल ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेती की लागत लगातार बढ़ने से किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है, जिससे उनकी कमर टूट गई है।

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मानसून की बेरुखी से धान रोपनी पर असर

प्रखंड क्षेत्र में मानसून सक्रिय होने के बावजूद अपेक्षित वर्षा नहीं हो रही है। बुधवार को जाले और आसपास के कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, लेकिन मुरैठा से कमतौल तक कई इलाकों में बादल सिर्फ उमड़-घुमड़कर रह गए। इससे पहले सात जुलाई को राढ़ी दक्षिणी, उत्तरी और पश्चिमी के कुछ हिस्सों में अच्छी वर्षा हुई थी, जबकि ब्रह्मपुर पश्चिमी, कछुआ, रतनपुर और दोघरा में केवल रुक-रुककर हल्की फुहारें पड़ीं। जाले, रेवढ़ा और घोघराहा में भी तेज हवा के साथ मामूली बारिश ही हुई। दिनभर बादलों की आवाजाही और गरज-चमक के बावजूद खेतों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे धान रोपनी की रफ्तार धीमी पड़ गई है।

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बिजली संकट और महंगा डीजल, किसानों की बढ़ी परेशानी

बारिश की कमी के बीच किसान निजी नलकूपों के भरोसे धान रोपनी का काम चला रहे हैं। हालांकि, बिजली की अनियमित आपूर्ति और डीजल के बढ़ते दाम उनकी परेशानी का सबसे बड़ा कारण बन गए हैं। अभिनव किसान पुरस्कार से सम्मानित मनोज पुरी सहित महंती ठाकुर, मदन राय और रामचंद्र कूवर जैसे किसानों ने अपनी पीड़ा साझा की।

किसानों ने बताया, “जाले-बसंत एग्रीकल्चर फीडर से पिछले कई महीनों से नियमित बिजली आपूर्ति नहीं हो रही है। इस कारण हमें डीजल पंपसेट से सिंचाई करनी पड़ रही है। डीजल का दाम करीब 100.05 रुपये प्रति लीटर होने से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और आर्थिक बोझ भी बढ़ता जा रहा है।”

किसानों का यह भी कहना है कि दिन में तेज धूप और उमस के कारण सिंचाई की रफ्तार धीमी रहती है, जबकि रात में कम समय में अधिक पटवन संभव होता है। लेकिन, बादल छाने पर अक्सर रात में बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है, और दिन में भी रुक-रुककर बिजली मिलने से सिंचाई कार्य बाधित हो रहा है। इसका सीधा असर धान रोपनी की गति पर पड़ रहा है।

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विद्युत विभाग का जवाब

किसानों की बिजली संकट की शिकायत पर, विद्युत विभाग के जेई कुमार गौरव ने बताया कि वे अवकाश पर हैं और फिलहाल कमतौल के जेई को प्रभार सौंपा गया है। इस स्थिति में किसानों को तुरंत राहत मिलने की उम्मीद कम दिख रही है। मानसून की बेरुखी और सरकारी व्यवस्था की शिथिलता के कारण इस खरीफ मौसम में किसानों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

बारिश की बेरुखी से बिगड़े हालात, निजी नलकूपों का सहारा

जाले और आसपास के क्षेत्रों में बुधवार को कुछ अच्छी बारिश दर्ज की गई, लेकिन मुरैठा से कमतौल तक कई इलाकों में बादल सिर्फ उमड़-घुमड़कर रह गए। इससे पहले 7 जुलाई को राढ़ी दक्षिणी, उत्तरी और पश्चिमी के कुछ हिस्सों में ही अच्छी वर्षा हुई थी, जबकि ब्रह्मपुर पश्चिमी, कछुआ, रतनपुर और दोघरा में सिर्फ हल्की फुहारें पड़ीं। जाले, रेवढ़ा और घोघराहा में भी तेज हवा के साथ मामूली बारिश ही हुई। अपेक्षित वर्षा न होने के कारण किसान अपने निजी नलकूपों के सहारे खेतों की सिंचाई कर धान की रोपनी करने को मजबूर हैं।

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बिजली संकट और महंगा डीजल बढ़ा रहा लागत

मनमा के अभिनव किसान पुरस्कार से सम्मानित किसान मनोज पुरी ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि जाले-बसंत एग्रीकल्चर फीडर से पिछले कई महीनों से नियमित बिजली नहीं मिल रही है। महंती ठाकुर, मदन राय और रामचंद्र कूवर जैसे अन्य किसानों ने भी बताया कि बिजली की कमी के कारण उन्हें डीजल पंपसेट का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। लगभग 100.05 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहे डीजल से सिंचाई की लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिससे उनका आर्थिक बोझ असहनीय होता जा रहा है। किसानों का आरोप है कि दिन में तेज धूप और उमस के कारण सिंचाई की रफ्तार धीमी रहती है, जबकि रात में बिजली बंद कर दी जाती है। दिन में भी रुक-रुककर बिजली मिलने से सिंचाई का काम बाधित हो रहा है, जिसका सीधा असर धान रोपनी की गति पर पड़ रहा है। इस संबंध में विद्युत विभाग के जेई कुमार गौरव ने जानकारी दी कि वे अवकाश पर हैं और फिलहाल कमतौल के जेई को प्रभार सौंपा गया है।

धान रोपनी के इस महत्वपूर्ण समय में बारिश और बिजली दोनों की अनुपलब्धता किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। अगर जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर धान के उत्पादन और किसानों की आजीविका पर पड़ेगा।

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