Darbhanga News: दरभंगा में जमीन फर्जीवाड़े के एक गंभीर मामले में सीजेएम कोर्ट ने बड़ी कार्रवाई की है। अदालत ने बहादुरपुर के तत्कालीन अंचल अधिकारी निश्चल प्रेम सहित तीन सरकारी कर्मियों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है। इस मामले में डीएम दरभंगा से भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, जिससे सरकारी तंत्र में भू-माफियाओं की मिलीभगत की आशंका गहरा गई है।
अधिवक्ता अरविंद कुमार सिन्हा ने सीजेएम जुनैद आलम की कोर्ट में परिवाद पत्र दाखिल किया था। उनकी शिकायत के बाद कोर्ट ने यह अहम कदम उठाया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनके नाम पर जाली हस्ताक्षर और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर दाखिल खारिज वाद सं. 459/24/25 सृजित किया गया। इसके बाद इसे स्वीकृति देकर उनकी जमीन पर जमाबंदी संख्या भी कायम कर दी गई, जबकि उन्होंने दाखिल खारिज के लिए कोई आवेदन ही नहीं दिया था।






फर्जी दस्तावेज और जाली हस्ताक्षर से जमाबंदी का आरोप
यह पूरा मामला भू-माफियाओं और सरकारी कर्मियों की कथित मिलीभगत का नतीजा बताया जा रहा है। परिवादी अरविंद कुमार सिन्हा ने अपने परिवाद पत्र में तत्कालीन अंचल अधिकारी निश्चल प्रेम, राजस्व कर्मचारी अर्चना भारती और सुधीर कुमार सिंह को नामजद किया है। इसके अलावा, एक अज्ञात डाटा ऑपरेटर और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भी आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया गया है। कोर्ट ने इन तीनों सरकारी कर्मियों को नोटिस भेजकर जल्द से जल्द अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
“मेरे नाम पर जाली हस्ताक्षर और जाली दस्तावेज के आधार पर दाखिल खारिज वाद सं. 459/24/25 सृजित कर स्वीकृति देकर जमाबंदी संख्या कायम कर दी गई है। यह कार्य भू-माफिया और अभियुक्तों की मिलीभगत से की गई है। मैंने दाखिल खारिज के लिए कोई आवेदन ही नहीं दिया था।”
भूमि हड़पने का प्रयास और पुलिस हस्तक्षेप
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब 24 जून 26 को दिन के 10 बजे करीब 100 अज्ञात लोग राजमिस्त्री और मजदूरों के साथ अरविंद कुमार सिन्हा के घर पहुंच गए। इन लोगों ने जबरन उनकी भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया। स्थिति की सूचना मिलने पर थाना से पुलिस बल मौके पर पहुंचा, जिसके बाद सभी हमलावर वहां से भाग खड़े हुए। इस घटना से आहत होकर ही अधिवक्ता सिन्हा ने सीजेएम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और न्याय की गुहार लगाई है।
सीजेएम कोर्ट की सख्त कार्रवाई, डीएम से मांगी रिपोर्ट
दरभंगा के सीजेएम जुनैद आलम की कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने न केवल नामजद सरकारी कर्मियों को नोटिस जारी किया है, बल्कि जिला प्रशासन से भी जवाब मांगा है। सीजेएम ने डीएम दरभंगा से इस पूरे प्रकरण पर विस्तृत प्रतिवेदन की मांग की है। यह कार्रवाई सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार और भूमि संबंधी फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस मामले में कोर्ट की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी, जिसमें सरकारी कर्मियों के जवाब और डीएम की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह घटना दरभंगा जिले में भूमि विवादों और सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश देती है।








