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दरभंगा में किसान रो रहे खून के आंसू! आधे खेत खाली, धान की फसल पर मंडराया संकट

Darbhanga News: केवटी प्रखंड में आधे से अधिक धान की रोपाई ठप, नदियां सूखने लगीं; किसान बोले- 'खेती हो जाएगी घाटे का सौदा, सरकार दे अनुदान'

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Darbhanga News: बिहार के दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड में इस वर्ष मौसम की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सामान्य से बेहद कम वर्षा के कारण क्षेत्र में सुखाड़ जैसे हालात बनने लगे हैं, जिसका सीधा असर धान की महत्वपूर्ण फसल पर पड़ रहा है। आर्द्रा नक्षत्र बीत जाने और 6 जुलाई से पुनर्वसु नक्षत्र शुरू होने के बावजूद, खेती के अनुकूल पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, जिससे किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।

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आधे से अधिक धान की रोपाई का समय निकल चुका है, लेकिन वर्षा के अभाव में अधिकांश खेत अभी भी खाली पड़े हैं। खेतों में पानी की कमी के कारण धान की रोपाई नहीं हो पा रही है। जो थोड़ी-बहुत बारिश यदाकदा हुई है, उससे किसान केवल अपने बिचड़ों को बचाने में लगे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, अब तक सिर्फ 25 प्रतिशत धान की रोपाई ही हो पाई है, जबकि इस समय तक आधे से अधिक रोपाई पूरी हो जानी चाहिए थी।

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वर्षा की कमी से गहराया जल संकट, पशुओं पर भी आफत

क्षेत्र की प्रमुख नदियां सगुना, कमलामरनी, वाहा, बागमती और अधवारा का जलस्तर सामान्य से काफी नीचे चला गया है। जिन नदियों और तालाबों में इस मौसम में पानी भरा रहता था, वहां अब दूर-दूर तक पानी दिखाई नहीं दे रहा है। इससे न केवल सिंचाई का संकट गहरा गया है, बल्कि पशुओं के लिए भी पेयजल और चारे की समस्या उत्पन्न होने की आशंका बढ़ गई है। जिन किसानों के पास निजी बोरिंग की व्यवस्था है, वे किसी तरह धान की रोपनी कर रहे हैं, लेकिन पानी की कमी के कारण लगाए गए धान के पौधे भी मुरझाने लगे हैं।

किसानों का कहना है, “यदि समय पर अच्छी वर्षा नहीं हुई तो धान की पैदावार पर गंभीर असर पड़ेगा। इसका सीधा प्रभाव किसानों की आय और क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। साथ हीं पशुओं के लिए चारे का संकट भी उत्पन्न होने की आशंका बढ़ गई है।”

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निजी सिंचाई के साधन से वंचित किसानों की परेशानी और भी बढ़ गई है। डीजल पंप से सिंचाई करने वाले किसानों की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है।

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किसानों की बढ़ी चिंता, प्रशासन से लगाई गुहार

आर्द्रा जैसे महत्वपूर्ण नक्षत्र में भी वर्षा न होने से किसान बेहद चिंतित हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

किसानों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि “क्षेत्र का सर्वेक्षण कर वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, डीजल अनुदान उपलब्ध कराया जाए और यदि स्थिति गंभीर होती है, तो प्रभावित क्षेत्रों को सुखाड़ग्रस्त घोषित कर राहत प्रदान की जाए।”

इस संबंध में जब बीएओ (ब्लॉक एग्रीकल्चर ऑफिसर) से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि वे अभी बाहर हैं और पहुंचकर जानकारी देंगे।

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मौसम विशेषज्ञों और ज्योतिषियों की भविष्यवाणी

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में यदि अच्छी वर्षा नहीं हुई तो खरीफ फसलों पर व्यापक प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने और किसानों को समय पर आवश्यक तकनीकी सलाह उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया है।

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वहीं, ज्योतिषाचार्य पं. चन्द्र मणि झा ने पंचांग के योग के अनुसार बताया है कि पुनर्वसु नक्षत्र के प्रारंभ में कम वर्षा का योग है, लेकिन इसके अंतिम सप्ताह में अच्छी वर्षा होने की संभावना है। उनके पूर्वानुमान के अनुसार, पुनर्वसु के बाद पूख, असरेसा, मघ्घा और पूर्वा नक्षत्र में भी वर्षा के योग बन रहे हैं। हालांकि, किसानों को अभी भी राहत के लिए कुछ दिनों का इंतजार करना पड़ सकता है।

यह स्थिति न केवल किसानों की आजीविका को प्रभावित कर रही है, बल्कि क्षेत्रीय कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। प्रशासन और सरकार की त्वरित कार्रवाई ही इस संकट को कम कर सकती है।

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