Bihar Mid Day Meal: बिहार में स्कूली बच्चों को परोसे जाने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और वितरण प्रणाली को लेकर राज्य सरकार सख्त हो गई है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने योजना की समीक्षा करते हुए कई अहम निर्देश दिए हैं, जिनका सीधा असर लाखों बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर पड़ेगा। सरकार का लक्ष्य है कि बच्चों को सुरक्षित, पौष्टिक और गर्म भोजन सुनिश्चित किया जा सके।
शिक्षा विभाग के अनुसार, 20 जुलाई को विकास भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में शिक्षा मंत्री ने योजना लागू करने वाली स्वैच्छिक संस्थाओं और आपूर्तिकर्ताओं से बातचीत की। इस दौरान भोजन की गुणवत्ता, वितरण प्रणाली और परिचालन संबंधी चुनौतियों पर गहन चर्चा हुई।






गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं, गर्म भोजन अनिवार्य
योजना से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने स्पष्ट किया कि बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षित, पौष्टिक और ताजा पका हुआ भोजन उपलब्ध कराना हर कार्यरत एजेंसी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। मंत्री ने सभी क्रियान्वयन एजेंसियों को निर्देश दिया कि स्कूलों में भोजन गर्म परोसा जाए और वितरण प्रक्रिया के दौरान गुणवत्ता मानकों को बनाए रखा जाए।

केंद्रीकृत रसोई का विस्तार और 4 घंटे में भोजन डिलीवरी
भोजन के तापमान को बनाए रखने के लिए शिक्षा मंत्री ने केंद्रीकृत रसोई चलाने वाली एजेंसियों को अगले दो महीने के भीतर स्टील के कंटेनरों को इंसुलेटेड फूड कंटेनरों से बदलने का निर्देश दिया है। विभाग के अनुसार, यह बदलाव यह सुनिश्चित करने के लिए है कि भोजन स्कूलों तक पहुंचने तक गर्म रहे, खासकर उन स्कूलों तक जो केंद्रीकृत रसोई से दूर हैं। सरकार ने क्रियान्वयन एजेंसियों से केंद्रीकृत रसोई के नेटवर्क का विस्तार करने को भी कहा है। मंत्री के अनुसार, प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम एक केंद्रीकृत रसोई होनी चाहिए, जबकि बड़े ब्लॉकों में दो रसोई होनी चाहिए ताकि भोजन तैयार करने और वितरण की दक्षता में सुधार हो सके।
समीक्षा के दौरान, मंत्री तिवारी ने उन रिपोर्टों पर चिंता व्यक्त की, जिनमें कहा गया था कि कुछ क्षेत्रों में बच्चों को सात-आठ घंटे पहले तैयार किया गया भोजन परोसा जा रहा था। उन्होंने निर्देश दिया कि खाना पकाने से लेकर स्कूलों में परोसने तक की पूरी प्रक्रिया तीन से चार घंटे के भीतर पूरी हो जानी चाहिए।
विभाग के अनुसार, ब्लॉक रिसोर्स पर्सन नियमित रूप से भोजन वितरण का निरीक्षण करेंगे और निगरानी प्रक्रिया के तहत आधिकारिक पोर्टल पर तस्वीरें अपलोड करेंगे।
कमांड सेंटर से होगी योजना की निगरानी
शिक्षा विभाग ने बताया कि मध्याह्न भोजन कार्यक्रम की निगरानी एक केंद्रीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से की जाएगी, जिससे अधिकारी संचालन को अधिक बारीकी से ट्रैक कर पाएंगे। मंत्री ने संगठनों से बाहरी निगरानी पर निर्भर रहने के बजाय अपनी आंतरिक निगरानी प्रणालियों को मजबूत करने का भी आग्रह किया। उनके अनुसार, मजबूत आत्म-निगरानी से शिकायतों को कम करने और यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि अनधिकृत व्यक्ति योजना के कार्यान्वयन में हस्तक्षेप न करें। उन्होंने एजेंसियों को परिचालन संबंधी मुद्दों की तुरंत मध्याह्न भोजन निदेशक कार्यालय को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया ताकि समस्याओं का बिना किसी देरी के समाधान किया जा सके।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार उन संगठनों का समर्थन करना जारी रखेगी जो निर्धारित मानकों को लगातार पूरा करते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि विभाग भविष्य में भोजन तैयार करने और वितरित करने दोनों का काम एक ही क्रियान्वयन संगठन को सौंपने पर विचार कर रहा है। विभाग के अनुसार, यह प्रस्ताव जवाबदेही में सुधार और वितरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से है। इस समीक्षा बैठक में मध्याह्न भोजन निदेशक, वरिष्ठ विभागीय अधिकारी और योजना से जुड़े 43 स्वैच्छिक संगठनों में से 41 के प्रतिनिधि मौजूद थे।









