Munger News: बिहार के मुंगेर जिले में बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से हजारों ग्रामीणों का एकमात्र सहारा डूब गया है। टीकारामपुर दियारा को मानसी और मटिहानी से जोड़ने वाला करीब 200 मीटर लंबा चचरी पुल पूरी तरह बाढ़ के पानी में समा गया। इस घटना से गंगापार टीकारामपुर दियारा के हजारों लोगों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे उनकी मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।
मुंगेर में हाहाकार! 200 मीटर का सहारा डूबा, हजारों जिंदगियां अब नाव के भरोसे; कब बनेगा स्थायी पुल?
Munger News: मुंगेर जिले के टीकारामपुर दियारा क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। बूढ़ी गंडक नदी में जलस्तर बढ़ने से उनका एकमात्र संपर्क मार्ग, करीब 200 मीटर लंबा चचरी पुल पूरी तरह से पानी में डूब गया। इस घटना ने मानसी और खगड़िया से उनके सड़क संपर्क को पूरी तरह से काट दिया है, जिससे अब उन्हें नाव के सहारे जान जोखिम में डालकर यात्रा करनी पड़ रही है।






खगड़िया-मानसी से कटा संपर्क, नाव बनी मजबूरी
टीकारामपुर दियारा का यह चचरी पुल हजारों लोगों के लिए जीवनरेखा था, जो उन्हें खगड़िया के मानसी और मटिहानी से जोड़ता था। बूढ़ी गंडक का जलस्तर बढ़ने के कारण सोमवार को यह पुल पूरी तरह से पानी में समा गया। पुल के डूबने से अब दियारा क्षेत्र के लोग पूरी तरह से कट गए हैं। उन्हें दैनिक जरूरतों और आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिसमें हर पल जान का खतरा बना रहता है।

आठ साल से अधूरा है स्थायी पुल का निर्माण
ग्रामीणों के अनुसार, इस क्षेत्र में एक स्थायी पुल का निर्माण पिछले आठ सालों से अधूरा पड़ा है। हर साल बरसात के मौसम में बूढ़ी गंडक का जलस्तर बढ़ने पर चचरी पुल डूब जाता है, जिससे हजारों लोगों की जिंदगी ठहर सी जाती है। स्थायी पुल के अभाव में लोग दशकों से ऐसी ही मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। प्रशासन की अनदेखी के कारण आज भी हजारों जिंदगियां खतरे के साथ सफर करने को मजबूर हैं।
टीकारामपुर दियारा के ग्रामीणों ने अब एक बार फिर प्रशासन से गुहार लगाई है कि अधूरे पड़े स्थायी पुल का निर्माण जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि उन्हें हर साल बाढ़ के इस संकट से मुक्ति मिल सके और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित हो सके।
खतरे में हजारों जिंदगियां, नाव ही एकमात्र विकल्प
बूढ़ी गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने टीकारामपुर दियारा के निवासियों की परेशानी बढ़ा दी है। उनका मुख्य संपर्क मार्ग, 200 मीटर लंबा बांस का चचरी पुल, सोमवार को पूरी तरह पानी में डूब गया। यह पुल टीकारामपुर दियारा को खगड़िया के मानसी और मटिहानी जैसे महत्वपूर्ण स्थानों से जोड़ता था। अब हजारों ग्रामीणों के लिए आवागमन का कोई सीधा साधन नहीं बचा है।
पुल के डूबने के बाद, टीकारामपुर दियारा के लोग अब जान जोखिम में डालकर नावों के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं। यह सफर न सिर्फ लंबा और थकाऊ है, बल्कि बाढ़ के दौरान बेहद खतरनाक भी हो जाता है। बच्चों को स्कूल जाने, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और दैनिक जरूरतों के लिए बाजारों तक पहुंचने में ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
आठ साल से अधूरा है स्थायी पुल का सपना
स्थायी समाधान की उम्मीद में ग्रामीण पिछले आठ सालों से एक पक्के पुल के निर्माण का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, यह परियोजना अभी तक अधूरी पड़ी है, जिससे हर साल बाढ़ के मौसम में उन्हें इसी तरह की त्रासदी झेलनी पड़ती है। सरकारी उदासीनता और धीमी गति से चल रहे निर्माण कार्य के कारण क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द स्थायी पुल के निर्माण को पूरा करने और बाढ़ के दौरान सुरक्षित आवागमन के वैकल्पिक इंतजाम करने की मांग की है। जब तक यह समस्या हल नहीं होती, तब तक टीकारामपुर दियारा के हजारों लोग हर साल बूढ़ी गंडक के कहर और सरकारी अनदेखी के बीच जीने को विवश रहेंगे।









