Bihar Rural Roads: पटना: बिहार में ग्रामीण सड़कों के निर्माण में तेजी लाने और स्थानीय ठेकेदारों को अधिक अवसर देने के लिए सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। अब राज्य में 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले ग्रामीण सड़क परियोजनाओं के लिए कोई नया टेंडर जारी नहीं किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण फैसले से वर्षों से अधूरी पड़ी परियोजनाएं भी जल्द पूरी होने की उम्मीद है। ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार ने बुधवार को विधानसभा में इसकी जानकारी दी।
तत्काल बड़े फैसले का ऐलान
Bihar Rural Roads: राज्य की बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। प्रश्नकाल के दौरान ग्रामीण सड़कों की बदहाली का मुद्दा उठाया गया, जिस पर सरकार ने तत्काल बड़े फैसले का ऐलान किया। अब ग्रामीण कार्य विभाग 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले किसी भी नए सड़क निर्माण पैकेज का टेंडर जारी नहीं करेगा। इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क परियोजनाओं को गति मिलेगी और स्थानीय ठेकेदारों को भी अधिक अवसर प्राप्त होंगे।






यह मुद्दा किसी विपक्षी विधायक ने नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कल्याणपुर से विधायक सचिन्द्र प्रसाद सिंह ने उठाया। उन्होंने ग्रामीण कार्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। विधायक सिंह ने कहा कि बड़े पैकेजों में टेंडर दिए जाने के कारण कई ग्रामीण सड़क परियोजनाएं दो वर्ष से अधिक समय से अधूरी पड़ी हैं। इन योजनाओं में केवल 10 से 15 प्रतिशत तक ही काम हो सका है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

समस्या की जड़: क्यों अटके थे बिहार Rural Roads के बड़े प्रोजेक्ट?
सचिन्द्र प्रसाद सिंह ने विधानसभा में पूछा कि जब बड़े पैकेजों में निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है, तो क्या दो या तीन सड़कों के छोटे-छोटे पैकेज बनाकर स्थानीय स्तर पर टेंडर जारी नहीं किए जा सकते? उन्होंने तर्क दिया कि इससे परियोजनाएं समय पर पूरी होंगी और लोगों को भी राहत मिलेगी। इस सवाल ने ग्रामीण सड़कों की बदहाल स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया और सरकार को ठोस कदम उठाने पर मजबूर किया।
अब छोटे पैकेज, स्थानीय ठेकेदारों को मौका
विधायक के सवाल का जवाब देते हुए ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार ने सदन को बताया कि बड़े पैकेजों को लेकर जनप्रतिनिधियों की ओर से लगातार चिंता जताई जा रही थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्तर पर इस पर गंभीर निर्णय लिया गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण कार्य विभाग अब 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले किसी भी नए पैकेज का टेंडर जारी नहीं करेगा। यह फैसला स्थानीय संवेदकों (ठेकेदारों) को अधिक अवसर देने और निर्माण कार्यों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
मंत्री सुनील कुमार ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद विभाग ने 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत का कोई नया पैकेज जारी नहीं किया है। अब Bihar Rural Roads के निर्माण कार्यों के लिए छोटे-छोटे पैकेजों में निविदाएं निकाली जा रही हैं। इससे स्थानीय ठेकेदारों की भागीदारी बढ़ेगी, प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। भविष्य में ग्रामीण कार्य विभाग (आरडब्ल्यूडी) बड़े पैकेजों के माध्यम से टेंडर जारी नहीं करेगा, यह भी उन्होंने दोहराया।
सभी लंबित सड़कों का निर्माण होगा पूरा
सुनील कुमार ने सदन को आश्वासन दिया कि ग्रामीण सड़क योजनाओं के लिए संचालित आरआरएसएम योजना के तहत विभाग को चरणबद्ध तरीके से धनराशि मिल रही है। जैसे-जैसे राशि उपलब्ध होती जाएगी, वैसे-वैसे लंबित परियोजनाओं का निर्माण कार्य भी पूरा कराया जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, अन्य मंत्रियों अथवा विधायकों द्वारा जिन सड़कों और पुल-पुलियों का शिलान्यास किया गया था तथा बड़े पैकेजों के टेंडर रद्द होने के कारण जिनका निर्माण अधूरा रह गया, उन सभी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा।
मंत्री सुनील कुमार ने कहा, ‘ऐसा कोई भी सड़क या पुल-पुलिया नहीं रहेगा, जिसका शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री, मंत्री या विधायक ने किया हो और उसका निर्माण अधूरा रह जाए। सरकार सभी लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।’
उन्होंने यह भी जोड़ा कि धनराशि उपलब्ध होने के साथ ऐसी सभी परियोजनाओं का निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर पूरा किया जाएगा। इस निर्णय से राज्य की ग्रामीण कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है, जिससे लाखों ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा।
बड़े टेंडर से अधूरी पड़ी थीं सड़कें, भाजपा विधायक ने उठाया था मुद्दा
बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन 22 जुलाई को प्रश्नकाल के दौरान राज्य की जर्जर ग्रामीण सड़कों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। खास बात यह रही कि यह सवाल विपक्ष ने नहीं, बल्कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कल्याणपुर विधायक सचिन्द्र प्रसाद सिंह ने उठाया था। उन्होंने ग्रामीण कार्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि बड़े पैकेजों में टेंडर दिए जाने के कारण कई सड़क परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं। विधायक ने बताया कि दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अनेक योजनाओं में केवल 10 से 15 प्रतिशत तक ही काम हो सका है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सचिन्द्र प्रसाद सिंह ने सुझाव दिया था कि यदि बड़े पैकेजों में निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है, तो छोटे-छोटे पैकेज बनाकर स्थानीय स्तर पर टेंडर जारी किए जा सकते हैं, ताकि परियोजनाएं समय पर पूरी हों और लोगों को राहत मिल सके।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर 50 करोड़ की सीमा तय, छोटे पैकेजों में होंगे टेंडर
विधायक के सवाल का जवाब देते हुए ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार ने सदन को बताया कि बड़े पैकेजों को लेकर जनप्रतिनिधियों की ओर से लगातार चिंता जताई जा रही थी। इस पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री स्तर पर एक अहम निर्णय लिया गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) अब 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले किसी भी नए पैकेज का टेंडर जारी नहीं करेगा। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य स्थानीय संवेदकों (ठेकेदारों) को अधिक अवसर प्रदान करना और ग्रामीण सड़क निर्माण कार्यों का समयबद्ध तरीके से निष्पादन सुनिश्चित करना है। मंत्री ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद विभाग ने 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत का कोई नया पैकेज जारी नहीं किया है। अब सड़क निर्माण कार्यों के लिए छोटे-छोटे पैकेजों में ही निविदाएं निकाली जा रही हैं। इससे स्थानीय ठेकेदारों की भागीदारी बढ़ेगी, प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी।
लंबित परियोजनाएं भी होंगी पूरी, मंत्री ने दिया भरोसा
ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार ने सदन को यह भी आश्वस्त किया कि ग्रामीण सड़क योजनाओं के लिए संचालित आरआरएसएम योजना के तहत विभाग को चरणबद्ध तरीके से धनराशि मिल रही है। जैसे-जैसे राशि उपलब्ध होती जाएगी, वैसे-वैसे लंबित परियोजनाओं का निर्माण कार्य भी पूरा कराया जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से यह भरोसा दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, अन्य मंत्रियों अथवा विधायकों द्वारा जिन सड़कों और पुल-पुलियों का शिलान्यास किया गया था तथा बड़े पैकेजों के टेंडर रद्द होने के कारण जिनका निर्माण अधूरा रह गया था, उन सभी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा। मंत्री ने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा:
ऐसा कोई भी सड़क या पुल-पुलिया नहीं रहेगा, जिसका शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री, मंत्री या विधायक ने किया हो और उसका निर्माण अधूरा रह जाए। सरकार सभी लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस फैसले से बिहार में ग्रामीण सड़कों के जाल को मजबूत करने और विकास कार्यों को गति देने में मदद मिलेगी, जिससे आम जनता को सीधा लाभ पहुंचेगा।







