Bihar land registration: बिहार विधान परिषद में बुधवार को एक महत्वपूर्ण बहस हुई, जहाँ टाउनशिप के लिए निर्धारित 12 शहरों में जमीन की रजिस्ट्री पर लगी रोक का मुद्दा गरमा गया। इस रोक के कारण जमीन मालिकों को हो रही परेशानी को आरजेडी एमएलसी सुनील सिंह ने मजबूती से उठाया। सरकार ने अब इस समस्या का समाधान पेश किया है, जिसके तहत जमीन मालिक एक महीने के भीतर अपनी संपत्ति बेचकर भुगतान प्राप्त कर सकेंगे।
एमएलसी सुनील सिंह का ‘1 करोड़ कर्ज’ वाला सवाल
विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान, आरजेडी एमएलसी सुनील सिंह ने सदन में अपनी निजी समस्या को उठाते हुए कहा कि उनके ऊपर एक करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया कि टाउनशिप में उनकी पूरी जमीन चले जाने के बाद, वे अपनी संपत्ति कैसे बेचें? सुनील सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि बिना किसी स्पष्ट योजना के अगर जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगाई जाती है, तो सरकार को यह साफ करना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर जमीन मालिक अपनी संपत्ति का निपटारा कैसे कर सकते हैं। उन्होंने पूछा कि यदि वे अपनी जमीन बेचना चाहते हैं, तो उन्हें कितने दिनों के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति मिलेगी।






आरजेडी एमएलसी सुनील सिंह ने सदन में कहा, ‘मेरे माथा पर एक करोड़ का कर्ज है, हम अपनी जमीन अभी बेचना चाहते हैं तो बताएं कि हम अपनी जमीन कितना दिन के भीतर बेच पाएंगे?’
मंत्री नीतीश मिश्रा का सदन में आश्वासन: एक महीने में मिलेगा भुगतान
सुनील सिंह के सवालों का जवाब देते हुए, विभागीय मंत्री नीतीश मिश्रा ने सदन को आश्वस्त किया। उन्होंने स्वीकार किया कि सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में अक्सर विवाद होते हैं और हजारों मामले अदालतों में लंबित हैं। मंत्री ने जमीन मालिकों को राहत देते हुए बताया कि जांच से लेकर जमीन के भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को एक महीने के भीतर पूरा किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी जमीन मालिक आवेदन दे सकता है और सरकार एक महीने के भीतर भुगतान सुनिश्चित करेगी। यह घोषणा उन हजारों जमीन मालिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है, जो बिहार के 12 शहरों में टाउनशिप परियोजनाओं के कारण अपनी जमीन बेचने में असमर्थ थे।

सरकार के इस आश्वासन से अब उन जमीन मालिकों को एक स्पष्ट रास्ता मिल गया है, जिन्हें टाउनशिप क्षेत्रों में अपनी संपत्ति बेचने की तत्काल आवश्यकता है। एक महीने के भीतर भुगतान की गारंटी से उनकी आर्थिक चिंताओं का समाधान होने की उम्मीद है, और बिहार में भूमि संबंधी विवादों में भी कमी आ सकती है।








