Bihar Paper Leak: पेपर लीक मामले को लेकर देश की संसद में सोमवार को जोरदार हंगामा देखने को मिला। एक तरफ जहां सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पेश कर रही थी, वहीं विपक्ष ने छात्र आंदोलनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियों को लेकर सदन की कार्यवाही बाधित कर दी। इस बीच बिहार में पुलिस ने पेपर लीक आंदोलन से जुड़े 250 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अध्यक्ष लालू यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव भी शामिल हैं।
संसद में गरमाया ‘पेपर लीक’ का मुद्दा, विपक्ष का हंगामा
केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से दो दिन पहले इस्तीफा देने वाले संबलपुर के सांसद धर्मेंद्र प्रधान जब संसद भवन पहुंचे, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने उनका भव्य स्वागत किया। ‘धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद’ के नारे लगाते हुए सांसद उन्हें कार से उतारकर संसद भवन के अंदर ले गए। इस स्वागत में बिहार के भाजपा सांसद संजय जायसवाल और दरभंगा के सांसद गोपालजी ठाकुर, सांसद धर्मशीला गुप्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने प्रधान को मैथिल पाग पहनाकर सम्मानित किया। भाजपा प्रधान के इस्तीफे को छात्र आंदोलन से पैदा गतिरोध को खत्म करने के लिए उनके ‘त्याग’ के रूप में प्रस्तुत कर रही है। वहीं, कुछ पॉलिटिकल विशेषज्ञ इसे कॉक्रोच पार्टी और विपक्ष को आईना दिखाने और चिढ़ाने के रूप में देख रहे हैं।






प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद, पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून बनाने के उद्देश्य से लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पेश किया गया। नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की मौजूदगी के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस विधेयक को सदन में रखा। हालांकि, विपक्ष के सांसदों द्वारा दिए गए कई कार्य स्थगन प्रस्तावों को स्पीकर ने नामंजूर कर दिया, जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया और सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष दिल्ली और अन्य राज्यों में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के मुद्दे पर छात्र आंदोलन के दौरान हुई तोड़फोड़ और गिरफ्तारियों के लिए पुलिस की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।
बिहार में छात्रों पर पुलिस का शिकंजा, 250 से ज्यादा गिरफ्तार
संसद में हंगामे के बीच बिहार में छात्र आंदोलन से जुड़े लोगों पर पुलिस का अभियान तेज हो गया है। पुलिस ने हिंसा और तोड़फोड़ के लिए कार्रवाई करते हुए अकेले पटना में 250 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा है। इन गिरफ्तारियों में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अध्यक्ष लालू यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव का नाम भी शामिल है।
पटना के अलावा, बिहार के कई जिलों में पुलिस ने प्रदर्शन की वीडियोग्राफी के आधार पर तोड़फोड़ करने वालों की पहचान की है और उनकी तस्वीरें जारी की हैं। पुलिस ने आम लोगों से इन व्यक्तियों के बारे में सूचना देने की अपील की है। जंतर-मंतर पर आंदोलन का नेतृत्व करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास ने पुलिस की इस कार्रवाई को केंद्र सरकार से मिले भरोसे का उल्लंघन बताया है।
कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास ने पुलिस की कार्रवाई पर कहा, ‘केंद्र सरकार ने दिल्ली और दूसरे राज्यों में आंदोलन में शामिल लोगों पर कानूनी कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया था। यह वादाखिलाफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।’ उन्होंने प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी के दावे पर भड़कते हुए एक दिन का अल्टीमेटम भी दिया है।
छात्र आंदोलन पर सरकार और विपक्ष के बीच यह टकराव अभी भी जारी है, और बिहार में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है।
NEET-UG प्रोटेस्ट: अब नहीं होगा कोई केस, बिहार सरकार ने लिया राहत भरा फैसला!
Bihar NEET Protest: चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में कथित अनियमितताओं को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर, शिकायतें और कारण बताओ नोटिस वापस लेने का बड़ा निर्णय बिहार सरकार ने लिया है। यह फैसला हफ्तों के प्रदर्शनों के बाद एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव को दर्शाता है। गृह विभाग द्वारा सोमवार, 27 जुलाई, 2026 को जारी एक बयान में कहा गया है कि 26 जुलाई, 2026 को शाम 6 बजे तक के आंदोलन से संबंधित ऐसे सभी मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इसके अतिरिक्त, विरोध प्रदर्शनों के संबंध में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों को भी रिहा किया जाएगा।
मामलों की वापसी और रिहाई
गृह विभाग के अनुसार, यह निर्णय नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं और परीक्षा तथा उच्च शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही व सुधारों की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर लागू होता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि एफआईआर, शिकायतें और आंदोलन के दौरान जारी किए गए कारण बताओ नोटिस सभी वापस लिए जाएंगे। विभाग ने यह भी कहा कि भविष्य में प्रदर्शनों के संबंध में नामजद किए गए व्यक्तियों के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कार्रवाई नहीं की जाएगी।
गृह विभाग ने बताया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की प्रक्रिया भी जल्द ही शुरू होगी। इस फैसले से उन छात्रों और अन्य लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्होंने इन प्रदर्शनों में भाग लिया था।
हिंसक प्रदर्शनों के बाद लिया गया फैसला
यह घोषणा बिहार के कई जिलों में छात्र संगठनों के नेतृत्व में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद आई है, जिनके दौरान कई स्थानों पर कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई थी। बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा पहले जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, आंदोलन के दौरान सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया था। कई छात्रों और नाबालिगों को सत्यापन के बाद रिहा कर दिया गया था, जबकि हिंसक घटनाओं में शामिल होने के आरोप में पकड़े गए लोगों को अदालतों में पेश किया गया था। पुलिस ने बताया था कि इस अशांति के दौरान 91 अधिकारी और कर्मी घायल हुए थे। कई सरकारी वाहनों को नुकसान पहुँचाया गया था, एक वाहन में आग लगा दी गई थी, और सारण में दो प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सीवान और सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक भी घायलों में शामिल थे।
आंदोलनकारियों को बड़ी राहत
प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की रिपोर्टों के बावजूद, सरकार ने विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों को वापस लेने का विकल्प चुना है। इस कदम से उन व्यक्तियों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनके खिलाफ आंदोलन के दौरान एफआईआर, शिकायतें या कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। इसे नीट-यूजी विरोध आंदोलन में भाग लेने वालों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। गृह विभाग ने मामलों की वापसी को लागू करने के लिए कानूनी प्रक्रिया पर अभी और विस्तृत जानकारी नहीं दी है।








