Bihar Liquor Ban: मुख्यमंत्री बिहार में शराबबंदी कानून को जनता और विशेषकर महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत मानते हैं। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ के शुभारंभ कार्यक्रम से लोक भवन से जुड़ते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि शराबबंदी से महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों से मुक्ति मिली है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भले ही राज्य को राजस्व का नुकसान हुआ हो, लेकिन बिहार का आर्थिक विकास तेजी से हुआ है।
‘बिहार में शराबबंदी कानून से जनता को काफी लाभ मिला है। महिलाओं पर अत्याचार से मुक्ति मिली है।’
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राजस्व नुकसान के बावजूद बिहार का आर्थिक विकास
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शराबबंदी के कारण हुए राजस्व नुकसान की तुलना अन्य राज्यों से की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश को शराब से 70,000 करोड़ रुपये, दिल्ली को 40,000 करोड़ रुपये, बंगाल को 50,000 करोड़ रुपये और झारखंड को 25,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में अभी शराब से 70,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू है। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि बिहार के लोग अब देवघर, बनारस और कुशीनगर जैसे पड़ोसी स्थानों पर अधिक जाने लगे हैं, लेकिन उनका मानना है कि बिहार की स्थिति बदलेगी।
बिहार में शराबबंदी पर CM सम्राट चौधरी का बड़ा बयान, कहा- ‘महिलाओं को मिली अत्याचार से मुक्ति’
Bihar Liquor Ban: मुख्यमंत्री बिहार के सम्राट चौधरी ने रविवार को ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ के शुभारंभ कार्यक्रम में राज्य में लागू शराबबंदी कानून के बड़े फायदे गिनाए। उन्होंने दावा किया कि शराबबंदी से प्रदेश की महिलाओं को अत्याचार से मुक्ति मिली है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भले ही राजस्व का नुकसान हुआ हो, लेकिन बिहार का आर्थिक विकास तेजी से हुआ है। सीएम चौधरी ने युवाओं से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का भी आह्वान किया, क्योंकि उनके अनुसार युवा ही भारत का भविष्य हैं।
शराबबंदी से महिलाओं को मिला बड़ा लाभ
सीएम सम्राट चौधरी ने लोक भवन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस अभियान से जुड़ते हुए कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून ने जनता, खासकर महिलाओं को बहुत राहत दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों में कमी आई है। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि कुछ लोग चोरी-छिपे शराब का सेवन कर लेते हैं, लेकिन सार्वजनिक स्थलों पर शराबबंदी का असर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
महिलाओं के कहने पर ही बिहार में शराबबंदी हुई और उनके जीवन में बदलाव आया है। आज आप बिहार के किसी भी कोने में चले जाइए, सार्वजनिक स्थानों पर शराबबंदी का असर साफ पता चलता है।
सीएम ने यह भी बताया कि महिलाओं के जीवन में आए इस बदलाव को हर कोई महसूस कर सकता है।
राजस्व नुकसान के बावजूद बिहार का आर्थिक विकास
शराबबंदी के आर्थिक पहलुओं पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि शराबबंदी से राजस्व का नुकसान होने के बावजूद बिहार का आर्थिक विकास काफी अच्छा रहा है। उन्होंने अन्य राज्यों से तुलना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश को शराब से 70,000 करोड़, दिल्ली को 40,000 करोड़, बंगाल को 50,000 करोड़ और झारखंड को 25,000 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है। हालांकि, सीएम ने यह भी जोड़ा कि झारखंड का कुल रेवेन्यू अभी 70,000 करोड़ है।
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में शराबबंदी के कारण लोग अब देवघर, बनारस और कुशीनगर जैसे पड़ोसी स्थानों पर ज्यादा जाने लगे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि जल्द ही बिहार की स्थिति और बदलेगी। सीएम ने जीएसटी लागू होने के बाद बिहार की आबादी से मिले लाभ का भी जिक्र किया, जिससे लोगों द्वारा उपभोग की गई वस्तुओं का फायदा राज्य को मिला। उन्होंने नेपाल से आने वाले पानी की समस्या को नीतीश और मोदी सरकार द्वारा व्यवस्थित करने पर भी गर्व व्यक्त किया।
नशामुक्त बिहार के लिए युवाओं से अपील
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ‘विकसित भारत और समृद्ध बिहार’ के सपने को साकार करने के लिए युवाओं से नशामुक्त समाज के निर्माण में भागीदार बनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह तभी संभव होगा जब हम सभी नशे से दूर रहेंगे। सीएम ने याद दिलाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साल 2016 में बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी, जो अब लगभग 10 साल पुरानी हो चुकी है।
मैं युवा-नौजवानों से आग्रह करता हूं कि वो इस नशे के खिलाफ जन जागरण में हिस्सा बनें क्योंकि युवा ही भारत के भविष्य हैं। बिहार ने देश को सवर्णिम काल दिया था। यह सवर्णिम काल हम तभी लौटा सकते हैं जब युवा शक्ति हमारे साथ हों।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि युवाओं की शक्ति के बिना बिहार अपने गौरवशाली अतीत को पुनः प्राप्त नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि शराबबंदी की शुरुआत से लेकर अब तक इसमें कई बदलाव हुए हैं, लेकिन आज यह बिहार की समृद्धि का प्रतीक बन गई है।
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में सार्वजनिक स्थलों पर पूर्ण शराबबंदी का असर स्पष्ट दिखाई देता है, भले ही कुछ लोग चोरी-छिपे शराब का सेवन करते हों। उन्होंने इस बात पर भी गर्व व्यक्त किया कि नेपाल से आने वाले पानी की समस्या को नीतीश और मोदी सरकार ने व्यवस्थित किया है, और जीएसटी लागू होने से बिहार की आबादी के उपभोग का लाभ राज्य को मिला है।
नशा मुक्त बिहार से ही विकसित भारत का सपना होगा पूरा
मुख्यमंत्री ने ‘विकसित भारत’ और ‘समृद्ध बिहार’ के सपने को पूरा करने के लिए नशा मुक्ति को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि यह तभी संभव होगा जब समाज नशे से दूर रहेगा। उन्होंने इस अभियान में सभी नागरिकों को सहभागी बनने का आग्रह किया, विशेषकर युवाओं और नौजवानों से।
‘अगर विकसित भारत और समृद्ध बिहार का सपना पूरा करना है तो यह तब ही संभव होगा जब हम नशा से दूर होंगे। नशा मुक्ति के इस अभियान में हम सभी को सहभागी बनना होगा।’
— मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी
सम्राट चौधरी ने याद दिलाया कि बिहार एक ऐसा राज्य है जहां तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी, जब राज्य की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। उन्होंने कहा कि लगभग 10 साल बाद आज यह बिहार की समृद्धि का प्रतीक बन रहा है। उन्होंने युवाओं से नशे के खिलाफ जन जागरण में हिस्सा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा ही भारत का भविष्य हैं और उनकी सोच से ही देश का भविष्य बनेगा।
महिलाओं के कहने पर हुई शराबबंदी, जीवन में आया बदलाव
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि बिहार में शराबबंदी महिलाओं की मांग पर लागू की गई थी और इससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज बिहार के किसी भी कोने में सार्वजनिक स्थलों पर शराबबंदी का असर स्पष्ट है और इससे जनता को मिलने वाले लाभ को महसूस किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इस ‘स्वर्णिम काल’ को वापस लाने में सहयोग करें, जैसा कि बिहार ने पहले भी देश को दिया है।














