Bihar Border Economy: नेपाल में बीते चार दिनों से भड़की सांप्रदायिक हिंसा ने बिहार के सीमावर्ती इलाकों की अर्थव्यवस्था की कमर पूरी तरह तोड़ दी है। रविवार को सुपौल के कोसी बैराज से जल लेकर नेपाल के कप्तानगंज गए कांवड़ियों पर पथराव के बाद यह भीषण बवाल शुरू हुआ। इस हिंसक तनाव का सबसे भयानक आर्थिक असर रक्सौल-बीरगंज बॉर्डर पर देखने को मिल रहा है।
हिंसा के डर से दोनों देशों के बीच आम लोगों और कामगारों की आवाजाही लगभग रुक गई है। सीमा पार से ग्राहकों और कर्मचारियों के न आने से रक्सौल के छोटे व्यापारियों, होटलों और सर्विस सेक्टर का कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है। इस तनावपूर्ण स्थिति के कारण अब तक सीमावर्ती बाजारों में करीब 500 करोड़ रुपये के कारोबार का भारी नुकसान आंका गया है।






रक्सौल में 80% व्यापार ठप, कर्मचारी नदारद
भारत-नेपाल व्यापार का सबसे बड़ा और अहम केंद्र रक्सौल आज अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। हालांकि बॉर्डर से बड़े मालवाहक ट्रकों की आवाजाही किसी तरह जारी है, लेकिन असली संकट खुदरा व्यापारियों और सर्विस सेक्टर के सामने खड़ा हो गया है। रक्सौल के अधिकांश होटल, रेस्टोरेंट, स्पा और सैलून नेपाली कर्मचारियों के भरोसे चलते हैं।
नेपाल के पर्सा और बीरगंज इलाके में फैले तनाव और कर्फ्यू जैसे हालात के कारण ये कामगार सीमा पार नहीं कर पा रहे हैं। कर्मचारियों की गैरमौजूदगी और नेपाली ग्राहकों के नदारद रहने से रक्सौल के स्थानीय कारोबार में करीब 80 फीसदी की भयानक गिरावट दर्ज की गई है।
कांवड़ियों पर हमले से भड़की थी हिंसा की आग
इस पूरी सांप्रदायिक हिंसा की शुरुआत कोसी क्षेत्र के सुनसरी जिले से सटे देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका के कप्तानगंज से हुई थी। रविवार की दोपहर करीब 20 कांवड़ यात्री कोसी बैराज से जल लेकर नेपाल की तरफ बढ़े थे। उनकी गाड़ियों पर बज रहे भक्ति गीतों की आवाज कम कराने को लेकर स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों से बहस हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इस मामूली बहस के दौरान भीड़ से किसी ने पत्थर चला दिया। देखते ही देखते यह घटना लाठी-डंडों की खूनी झड़प में बदल गई। कप्तानगंज से उठी यह चिंगारी तेजी से सुनसरी जिले में फैल गई। इसके बाद उपद्रवियों ने कई जगहों पर जमकर आगजनी और तोड़फोड़ की।
स्थिति बेकाबू होने पर हिंसा की आग सप्तरी, सिराहा, धनुषा और अंततः रक्सौल से सटे पर्सा (बीरगंज) तक पहुंच गई। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को बीरगंज में कर्फ्यू तक लगाना पड़ा।
बिहार के पांच जिलों में 500 करोड़ की अर्थव्यवस्था स्वाहा
नेपाल में जारी इस बवाल ने सीधे तौर पर बिहार के पांच जिलों की अर्थव्यवस्था को पंगु बना दिया है। रक्सौल के अलावा सीतामढ़ी, मधुबनी, अररिया और सुपौल के प्रमुख बाजार नेपाली ग्राहकों पर ही निर्भर करते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन सीमावर्ती बाजारों में रोजाना करीब 320 करोड़ रुपये का लेन-देन होता है।
व्यापारियों का साफ कहना है कि आवाजाही रुकने से हर दिन 40 प्रतिशत का सीधा नुकसान हो रहा है। सुपौल के भीमनगर बाजार का 80 फीसदी कारोबार नेपालियों पर टिका है। यहां रोजाना होने वाली 25 लाख की बिक्री सिमट कर महज 2 लाख पर आ गई है। अररिया के जोगबनी बाजार में भी सन्नाटा पसरा है। नेपाली सरकार के भारी टैक्स के बाद रही सही कसर इस हिंसा ने पूरी कर दी है, जिससे छोटे दुकानदारों के लिए अब रोजी-रोटी का गहरा संकट पैदा हो गया है।
तनाव का असर सिर्फ व्यापार पर ही नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था पर भी पड़ा है। सीतामढ़ी के भिट्ठामोड़ बॉर्डर से नेपाल के जनकपुर धाम जाने वाले सैकड़ों कांवड़ियों को सुरक्षा कारणों से सीमा से ही वापस भारत लौटा दिया गया है। गोरखपुर से आए यात्रियों को आठ घंटे इंतजार करने के बाद मायूस होकर लौटना पड़ा। सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोग अब बस इसी उम्मीद में बैठे हैं कि हालात जल्द सामान्य हों, क्योंकि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और समाज एक दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। इस हिंसा ने यह साबित कर दिया है कि सीमा पार की अशांति का सीधा खामियाजा इधर के आम व्यापारी को भुगतना पड़ता है।








