Bihar Animal Vaccination: पशुपालकों और किसानों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। बिहार में खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी) के खिलाफ चल रहे व्यापक टीकाकरण अभियान का सातवां चरण 10 जुलाई से पूरे राज्य में शुरू हो गया है। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत यह पहल की जा रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पशुओं को इस अत्यंत संक्रामक बीमारी से बचाना है, जो उनके स्वास्थ्य और उत्पादकता पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डालती है।
बिहार पशु टीकाकरण अभियान: वर्तमान स्थिति और किसानों को लाभ
इस चरण में टीकाकर्मी घर-घर जाकर गाय, बैल, बछड़ा, बछड़ी और भैंसों का निःशुल्क टीकाकरण कर रहे हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक 79 लाख से अधिक पशुओं को यह जीवनरक्षक टीका लगाया जा चुका है। इस महत्वपूर्ण पहल से राज्य के लगभग 16 लाख किसान परिवार सीधे तौर पर लाभान्वित हुए हैं। यह टीका पशुओं को मुंह में छाले पड़ने और खुरों में गंभीर घाव होने जैसी तकलीफों से प्रभावी ढंग से बचाता है। इससे दूध उत्पादन में होने वाली कमी और पशुओं की मृत्यु के कारण होने वाली बड़ी आर्थिक क्षति से किसानों को राहत मिलती है।






टीकाकरण कवरेज के मामले में कुछ जिलों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। पूर्णिया जिले ने सबसे शानदार प्रदर्शन करते हुए अब तक करीब 5 लाख 98 हजार पशुओं का टीकाकरण किया है। इसके बाद राजधानी पटना में 4 लाख 89 हजार और पूर्वी चंपारण में 4 लाख 61 हजार से अधिक पशुओं को सुरक्षा कवच प्रदान किया गया है। ये तीनों जिले राज्य में टीकाकरण अभियान के शीर्ष पर हैं।
2030 तक खुरपका-मुंहपका उन्मूलन का लक्ष्य: बिहार की प्रगति
पशु स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी) के अंतर्गत बिहार सरकार ने वर्ष 2030 तक राज्य से खुरपका-मुंहपका रोग को पूरी तरह नियंत्रित कर इसका उन्मूलन करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस दिशा में राज्य सरकार पिछले लगभग 18 वर्षों से निरंतर निःशुल्क टीकाकरण अभियान चला रही है। इन अभियानों के तहत, अब तक कुल 2.81 करोड़ पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है, जिससे 50 लाख से अधिक किसान परिवार लाभान्वित हुए हैं।
वर्ष 2006-07 में जब यह राज्यव्यापी अभियान बड़े पैमाने पर शुरू हुआ था, तब पहले वर्ष में मात्र 38.45 लाख पशुओं का ही टीकाकरण हो पाया था। आज के आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले दो दशकों में बिहार ने पशु स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कितनी लंबी छलांग लगाई है।
यह अभियान न केवल पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा करता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करता है। राज्य सरकार की यह प्रतिबद्धता किसानों की आय बढ़ाने और पशुधन संपदा को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। भविष्य में भी यह अभियान इसी गति से जारी रहेगा, ताकि बिहार को खुरपका-मुंहपका मुक्त राज्य बनाया जा सके।








