Bihar Fake Drugs: आपके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले बिहार में नकली दवाओं के एक बड़े अंतर-राज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने ‘ऑपरेशन वज्र’ के तहत गया और पटना के मसौढ़ी में आठ अवैध गोदामों को सील कर दिया है। इसके साथ ही एक अवैध विनिर्माण इकाई का भी भंडाफोड़ किया गया है। इस बड़ी कार्रवाई में करोड़ों रुपये की नकली और अवैध दवाएं जब्त की गई हैं, जिससे आम लोगों को गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद मिली है।
बिहार में नकली दवाओं का ‘मौत का कारोबार’ ध्वस्त! 8 गोदाम-फैक्ट्री सील, हजारों जान बचीं- Advertisement -
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Bihar fake medicine racket: केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने ‘ऑपरेशन वज्र’ के तहत बिहार में नकली और अवैध दवाओं के एक बड़े अंतर-राज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया है। इस बड़ी कार्रवाई में गया और पटना के मसौढ़ी में आठ अवैध गोदामों और एक गुप्त विनिर्माण इकाई को जब्त किया गया है। सीबीएन की मध्य प्रदेश इकाई ने इस अभियान को अंजाम दिया, जिससे राज्य में नकली दवाओं के कारोबार को गहरा झटका लगा है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, इन ठिकानों का इस्तेमाल अवैध रूप से मादक पदार्थों और अन्य नकली दवाओं के निर्माण और भंडारण के लिए किया जा रहा था। यह कार्रवाई 2025 में दर्ज एक संबंधित अपराध की जांच का ही हिस्सा है, जिसे एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
ऑपरेशन वज्र: गया में ऐसे हुआ बड़ा खुलासा
अभियान के दौरान, गया में चार अवैध गोदामों पर छापा मारा गया, जहाँ से भारी मात्रा में नकली दवाएं जब्त की गईं। इसमें 68,200 ट्रामाडोल टैबलेट, 59,000 अन्य टैबलेट और कोडीन सिरप की 52,542 बोतलें शामिल थीं। लगातार जांच और तकनीकी व मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर, सीबीएन ने 22 जुलाई को इस पूरे रैकेट के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी से कई महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिससे आगे बड़े पैमाने पर कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ।
सीबीएन की मध्य प्रदेश इकाई (नीमच) के निवारक अनुभाग ने 16 से 27 जुलाई के बीच पूरे बिहार में कड़ी निगरानी और क्षेत्रीय अभियान चलाए। जांच में सामने आया कि फरार आरोपी ने गया के खानजहांपुर इलाके में गैर-कानूनी तरीके से बनाए गए नशीले पदार्थों और नकली दवाओं को जमा करने के लिए फिर से अवैध गोदाम चलाना शुरू कर दिया था। कई दिनों तक उसकी गतिविधियों पर गुप्त रूप से नजर रखने के बाद, सीबीएन की टीम ने उसे धर दबोचा।
आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर, सीबीएन की टीम ने दो अपंजीकृत और बिना मंजूरी वाले गोदामों की तलाशी ली, जहाँ से 21,373 ब्यूप्रेनोर्फिन इंजेक्शन एम्प्यूल बरामद हुए। तलाशी के दौरान भारी मात्रा में नकली और मिलावटी गैर-एनडीपीएस दवाएं भी जब्त की गईं, जिनमें क्लैवम-625, पैन-40, बेटाडीन ऑइंटमेंट और एजिथ्रल जैसी कई अन्य दवाएं शामिल थीं। इसके बाद स्थानीय पुलिस की सहायता से चलाए गए अभियानों से शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थित छह और अपंजीकृत और अनधिकृत गोदामों की पहचान की गई, जहाँ से पर्याप्त मात्रा में नकली और अनाधिकृत रूप से भंडारित गैर-एनडीपीएस दवाएं मिलीं। जब्त किए गए भंडार और सील किए गए गोदामों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए बिहार राज्य औषधि प्रशासन को सौंप दिया गया है।
पटना के मसौढ़ी में मिली अवैध दवा फैक्ट्री, चौंकाने वाले खुलासे
सीबीएन द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर, राज्य औषधि विभाग ने अवैध गोदामों से बड़ी मात्रा में गैर-एनडीपीएस नकली दवाएं जब्त की हैं। इन जब्त दवाओं का विवरण नीचे दी गई तालिका में है:
| दवा का प्रकार | जब्त मात्रा |
|---|---|
| टैबलेट/कैप्सूल | 439,774 |
| इंजेक्शन/वायल/एम्प्यूल | 1,895 |
| सिरप/बोतलें | 3,811 |
| अन्य दवा उत्पाद (लोशन/ट्यूब/ड्रॉप्स, आदि) | 3,490 |
यह बड़ी जब्ती बिहार में नकली दवाओं के अवैध कारोबार के पैमाने को दर्शाती है, जो आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा था।
पूछताछ के दौरान, संदिग्धों ने बताया कि उनके पहले गिरफ्तार किए गए एक साथी ने पटना के मसौढ़ी के पास एक फार्महाउस में गैर-कानूनी विनिर्माण इकाई स्थापित की थी। इस इकाई में बुप्रेनोरफिन और अन्य नशीले पदार्थों को गैर-कानूनी तरीके से बनाने के लिए मशीनरी और उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस सूचना पर तुरंत कार्रवाई करते हुए, सीबीएन की टीम ने स्थानीय पुलिस, राज्य औषधि विभाग और खाद्य विभाग के अधिकारियों की मदद से उस जगह पर संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान विनिर्माण से जुड़ी कई मशीनें, उपकरण, रसायन और आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग एजेंट बरामद किए गए। पूरी गैर-कानूनी विनिर्माण इकाई को बंद कर दिया गया और एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के तहत सभी मशीनरी, उपकरणों और संबंधित सामान को जब्त कर लिया गया।
जांच से इस सिंडिकेट के काम करने के तरीके का भी पता चला है। आरोपी कम आय वाले इलाकों में बिना किसी रेंट एग्रीमेंट के जगह किराए पर लेते थे, किसी भी तरह का डिजिटल रिकॉर्ड न बने, इसलिए किराए का भुगतान नकद में करते थे। वे कानून लागू करने वाली एजेंसियों से बचने के लिए नकली पहचान दस्तावेजों के जरिए लिए गए मोबाइल कनेक्शन का इस्तेमाल करते थे।
इस कैलेंडर वर्ष में, सीबीएन की मध्य प्रदेश इकाई ने अब तक 90 मामले दर्ज किए हैं, जिनमें 3 अवैध लैब का भंडाफोड़ शामिल है और 121 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई बिहार और पड़ोसी राज्यों में नकली दवाओं के अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
गया और पटना में बड़ी कार्रवाई, मुख्य सरगना गिरफ्तार
सीबीएन की मध्य प्रदेश इकाई (नीमच) ने नकली और अवैध दवाओं के खिलाफ यह बड़ा अभियान चलाया। रविवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इन गोदामों का इस्तेमाल मादक पदार्थों और अन्य दवाओं के अवैध निर्माण और भंडारण के लिए किया जा रहा था। यह कार्रवाई 2025 में दर्ज एक मामले की जांच का हिस्सा है और इसे एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
ताजा अभियान के दौरान, गया में चार अवैध गोदामों से भारी मात्रा में नकली दवाएं मिलीं। इनमें 68,200 ट्रामाडोल टैबलेट, 59,000 अन्य टैबलेट और कोडीन सिरप की 52,542 बोतलें शामिल थीं। लगातार जांच और तकनीकी व मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर, सीबीएन ने 22 जुलाई को इस पूरे नेटवर्क के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी से कई महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिससे आगे बड़े पैमाने पर कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ।
सिंडिकेट की जड़ें, अवैध विनिर्माण इकाई का खुलासा
16 से 27 जुलाई के बीच सीबीएन की मध्य प्रदेश इकाई ने पूरे बिहार में कड़ी निगरानी रखी और कई क्षेत्रीय अभियान चलाए। जांच में पता चला कि फरार आरोपी ने गया के खानजहांपुर इलाके में गैर-कानूनी तरीके से बनाए गए नशीले पदार्थों और नकली दवाओं को जमा करने के लिए दोबारा अवैध गोदाम चलाना शुरू कर दिया था। कई दिनों तक उसकी गतिविधियों पर गुप्त रूप से नजर रखने के बाद, सीबीएन की टीम ने उसे धर दबोचा।
आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर, सीबीएन की टीम ने दो अपंजीकृत और बिना मंजूरी वाले गोदामों की तलाशी ली। यहां से 21,373 ब्यूप्रेनोर्फिन इंजेक्शन एम्प्यूल बरामद किए गए। तलाशी के दौरान भारी मात्रा में नकली और मिलावटी गैर-एनडीपीएस दवाएं भी जब्त की गईं, जिनमें क्लैवम-625, पैन-40, बेटाडीन ऑइंटमेंट, एजिथ्रल और कई अन्य दवाएं शामिल हैं।
इसके बाद स्थानीय पुलिस की मदद से चलाए गए अभियानों में शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थित छह और अपंजीकृत और अनधिकृत गोदामों की पहचान की गई। इन परिसरों से भी पर्याप्त मात्रा में नकली और अनाधिकृत रूप से भंडार की गई गैर-एनडीपीएस दवाएं बरामद हुईं। जब्त किए गए भंडार और सील किए गए गोदामों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए बिहार राज्य औषधि प्रशासन को सौंप दिया गया है।
सीबीएन द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर, राज्य औषधि विभाग ने अवैध गोदामों से बड़ी मात्रा में गैर-एनडीपीएस नकली दवाएं जब्त की हैं, जिसका विवरण नीचे दिया गया है:
| दवा का प्रकार | जब्त मात्रा |
|---|---|
| टैबलेट/कैप्सूल | 439,774 |
| इंजेक्शन/वायल/एम्प्यूल | 1,895 |
| सिरप/बोतलें | 3,811 |
| अन्य दवा उत्पाद (लोशन/ट्यूब/ड्रॉप्स, आदि) | 3,490 |
यह आंकड़ा दर्शाता है कि कितनी बड़ी मात्रा में नकली दवाएं बाजार में खपाई जा रही थीं, जो अब जब्त कर ली गई हैं।
कैसे काम करता था नकली दवाओं का यह सिंडिकेट?
लगातार पूछताछ के दौरान, संदिग्धों ने बताया कि उनके पहले गिरफ्तार किए गए एक साथी ने पटना के मसौढ़ी के पास एक फार्महाउस में एक अवैध विनिर्माण इकाई स्थापित की थी। यहां बुप्रेनोरफिन और अन्य नशीले पदार्थों को गैर-कानूनी तरीके से बनाने के लिए मशीनरी और उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस जानकारी पर तुरंत कार्रवाई करते हुए, सीबीएन की टीम ने स्थानीय पुलिस, राज्य औषधि विभाग और खाद्य विभाग के अधिकारियों की मदद से उस जगह पर संयुक्त तलाशी अभियान चलाया।
तलाशी के दौरान विनिर्माण से जुड़ी कई मशीनें, उपकरण, रसायन और आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग एजेंट बरामद किए गए। पूरी अवैध विनिर्माण इकाई को बंद कर दिया गया और एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के तहत सभी मशीनरी, उपकरणों और संबंधित सामान को जब्त कर लिया गया। जांच से इस सिंडिकेट के काम करने के तरीके का भी पता चला है। आरोपी कम आय वाले इलाकों में बिना किसी रेंट एग्रीमेंट के जगह किराए पर लेते थे, किराए का भुगतान नकद में करते थे ताकि कोई डिजिटल रिकॉर्ड न बने, और कानून लागू करने वाली एजेंसियों से बचने के लिए नकली पहचान दस्तावेजों के जरिए लिए गए मोबाइल कनेक्शन का इस्तेमाल करते थे। इस कैलेंडर वर्ष में, सीबीएन एमपी इकाई ने अब तक 90 मामले दर्ज किए हैं, 3 अवैध लैब का भंडाफोड़ किया है और 121 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जो इस क्षेत्र में उनकी सक्रियता को दर्शाता है।








