Bihar Anti-Corruption: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। इसी कड़ी में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (एसवीयू) पटना ने पूर्णिया जिले के केनगर प्रखंड मुख्यालय स्थित उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के कार्यालय में बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने कनीय अभियंता (जेई) भरत मलिक और दो टेक्निकल सहायकों आशुतोष पांडेय व पंकज कुमार को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस घटना से पूरे बिजली विभाग में हड़कंप मच गया है।
बिहार में धाकड़ एक्शन: रिश्वतखोर बिजलीकर्मी रंगे हाथ पकड़े गए, हड़कंप!
Bihar Corruption: मुख्यमंत्री बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई के निर्देश दे रहे हैं। इसी कड़ी में पूर्णिया जिले के केनगर प्रखंड मुख्यालय स्थित उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के कार्यालय में गुरुवार को बड़ी कार्रवाई हुई। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (एसवीयू) पटना की टीम ने छापेमारी कर कनीय अभियंता (जेई) भरत मलिक, और दो टेक्निकल सहायकों आशुतोष पांडेय व पंकज कुमार को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी से बिजली विभाग में हड़कंप मच गया है।






घरेलू बिजली कनेक्शन के लिए मांगी थी रिश्वत
विजिलेंस टीम के इंस्पेक्टर अविनाश कुमार झा ने इस मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मजरा पंचायत के बखरीकोल गांव निवासी राजेश कुमार साह ने घरेलू बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि उनके आवेदन को स्वीकृत करने के एवज में कनीय अभियंता भरत मलिक ने 15 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। इसमें से 5 हजार रुपये आवेदन के सत्यापन के समय ही ले लिए गए थे, जबकि शेष 10 हजार रुपये बाद में देने को कहा गया था।
इंस्पेक्टर अविनाश कुमार झा ने बताया, ‘मजरा पंचायत के बखरीकोल गांव निवासी राजेश कुमार साह ने घरेलू बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि आवेदन स्वीकृत करने के एवज में कनीय अभियंता ने 15 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। इसमें से 5 हजार रुपये आवेदन के सत्यापन के समय ले लिए गए थे जबकि शेष 10 हजार रुपये बाद में देने के लिए कहा गया था।’
एसवीयू की टीम ने ऐसे रंगे हाथ दबोचा
रिश्वत की मांग से परेशान होकर पीड़ित राजेश कुमार साह ने एसवीयू पटना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर तुरंत मुकदमा दर्ज किया गया और मामले का सत्यापन कराया गया। जब शिकायत सही पाई गई, तो एसवीयू ने एक धावा दल का गठन किया। पूर्व निर्धारित योजना के तहत, गुरुवार को शिकायतकर्ता के साथ विजिलेंस टीम केनगर स्थित बिजली कार्यालय पहुंची। योजना के अनुसार, शिकायतकर्ता जेई के कार्यालय में दाखिल हुए, जहां दोनों सहायक भी मौजूद थे। जैसे ही कनीय अभियंता भरत मलिक ने अपने कार्यालय कक्ष में दोनों टेक्निकल सहायकों की मौजूदगी में शेष 10 हजार रुपये रिश्वत के रूप में स्वीकार किए, पहले से तैनात विजिलेंस टीम ने तुरंत छापेमारी कर तीनों को रंगे हाथ दबोच लिया।
बिहार में भ्रष्टाचार पर सीएम का सीधा प्रहार
गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों ने भागने की कोशिश की और खींचतान भी हुई, लेकिन विजिलेंस टीम पूरी तरह से तैयार थी और उनकी कोशिशें नाकाम रहीं। तीनों के पकड़े जाने पर कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। तैनात टीम उन्हें पकड़कर अपने साथ ले गई, और पूछताछ जारी है। पीड़ित व्यक्ति ने बताया कि पैसे नहीं देने के कारण उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा था। पांच हजार रुपये देने के बाद भी उनका काम नहीं हुआ। उन्होंने विभाग के उच्चाधिकारियों से भी शिकायत की, लेकिन कोई राहत नहीं मिली, जिसके बाद उन्हें निगरानी विभाग की शरण लेनी पड़ी। मौके पर मौजूद कई लोगों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग में बिना घूस दिए कोई काम नहीं होता है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में यह कार्रवाई बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का स्पष्ट संदेश है।
पीड़ित व्यक्ति ने बताया, ‘उन्हें घरेलू बिजली कनेक्शन लेना था। पैसे नहीं देने के कारण उन्हें परेशान किया जा रहा था। पांच हजार देने के बाद भी काम नहीं किया जा रहा था। विभाग के ऊपर के अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी कोई राहत नहीं मिली। मजबूर होकर उन्हें निगरानी विभाग की शरण में जाना पड़ा।’
इस गिरफ्तारी से अन्य भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों में भी खौफ का माहौल है। विजिलेंस की यह कार्रवाई दर्शाती है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी और ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। पढ़िए विस्तार से
घरेलू कनेक्शन के लिए मांगी थी 15 हजार की रिश्वत
एसवीयू पटना के इंस्पेक्टर अविनाश कुमार झा ने बताया कि मजरा पंचायत के बखरीकोल गांव निवासी राजेश कुमार साह ने घरेलू बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन दिया था। आरोप है कि उनके आवेदन को स्वीकृत करने के एवज में कनीय अभियंता भरत मलिक ने 15 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। इसमें से 5 हजार रुपये आवेदन के सत्यापन के समय ही ले लिए गए थे, जबकि शेष 10 हजार रुपये बाद में देने के लिए कहा गया था।
रिश्वत की मांग से परेशान होकर पीड़ित राजेश कुमार साह ने स्पेशल विजिलेंस यूनिट पटना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद एसवीयू ने मामले का सत्यापन किया, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद एक धावा दल का गठन किया गया और योजनाबद्ध तरीके से गुरुवार को शिकायतकर्ता के साथ टीम केनगर स्थित बिजली कार्यालय पहुंची।
रंगे हाथ पकड़े गए तीनों आरोपी, भागने की कोशिश भी नाकाम
पूर्व निर्धारित योजना के तहत पीड़ित शिकायतकर्ता जेई भरत मलिक के कार्यालय में दाखिल हुए। उस समय कार्यालय कक्ष में दोनों सहायक आशुतोष पांडेय और पंकज कुमार भी मौजूद थे। जैसे ही कनीय अभियंता भरत मलिक ने अपने दोनों सहायकों की मौजूदगी में शेष 10 हजार रुपये रिश्वत के तौर पर स्वीकार किए, पहले से तैनात विजिलेंस टीम ने तत्काल छापेमारी कर तीनों को रंगे हाथ दबोच लिया।
गिरफ्तारी के दौरान तीनों ने भागने की कोशिश करते हुए खींचतान भी की, लेकिन विजिलेंस टीम पूरी तरह से तैयार थी और उनकी कोशिशें नाकाम रहीं। तीनों सरकारी सेवकों के पकड़े जाने से कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। विजिलेंस टीम उन्हें पकड़कर अपने साथ ले गई और उनसे पूछताछ की जा रही है।
पीड़ित राजेश कुमार साह ने बताया, ‘मुझे घरेलू बिजली कनेक्शन लेना था। पैसे नहीं देने के कारण वे मुझे परेशान कर रहे थे। पांच हजार देने के बाद भी मेरा काम नहीं किया जा रहा था। विभाग के ऊपर के अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी कोई राहत नहीं मिली, मजबूर होकर मुझे निगरानी विभाग की शरण में जाना पड़ा।’ मौके पर मौजूद कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि बिजली विभाग में बिना घूस दिए कोई काम नहीं किया जाता है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जारी यह कार्रवाई जनता में विश्वास जगा रही है। इस गिरफ्तारी से यह संदेश साफ है कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी सरकारी सेवक को बख्शा नहीं जाएगा।








