Patna Railway Project: पटना में बहुप्रतीक्षित हार्डिंग पार्क पैसेंजर टर्मिनल परियोजना, जिसका उद्देश्य पटना जंक्शन पर यात्रियों की भीड़ कम करना है, एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी धीमी गति से चल रही है। इस महत्वपूर्ण पटना रेलवे प्रोजेक्ट का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 मई 2023 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया था। पहले चरण को 18 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन रेलवे सूत्रों के अनुसार, अब तक पहले चरण का 10% से भी कम काम पूरा हो पाया है।
95 करोड़ की लागत, धीमी रफ्तार
इस परियोजना के पहले चरण की अनुमानित लागत लगभग 95 करोड़ रुपये है। इसमें जी+4 स्टेशन भवन, जी+6 भवन, एक सबवे, फुट-ओवर ब्रिज, सिग्नल और दूरसंचार (S&T) भवन, एक चारदीवारी और पांच प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इस परियोजना में मेट्रो स्टेशनों और हवाई अड्डों जैसी आधुनिक सुविधाओं के साथ प्लेटफॉर्म और सभी पांच रेलवे लाइनों को कवर करने वाली छतें भी प्रस्तावित हैं।






हालांकि, कार्यस्थल पर प्रगति मूल निर्धारित समय-सीमा से काफी पीछे है। चारदीवारी का काम अभी भी अधूरा है, जबकि कुछ हिस्सों में मिट्टी भरने और समतलीकरण का कार्य ही हुआ है। प्रस्तावित छत शेड के लिए अभी तक कोई खंभा खड़ा नहीं किया गया है। हार्डिंग पार्क मैदान में लाई गईं कई निर्माण मशीनें भी बेकार पड़ी हैं, और साइट के कई हिस्सों में काम लगभग ठप पड़ा है।
रेलवे सूत्रों ने बताया कि तकनीकी मुद्दे प्रगति को प्रभावित कर रहे हैं। इनमें इंजीनियरिंग सेवा योजना की अंतिम मंजूरी लंबित होना और वाशिंग पिट लाइन से संबंधित समस्याएं शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, इन मुद्दों ने नई रेलवे पटरियों को बिछाने और जोड़ने के काम को भी बाधित किया है।
अधिकारियों की नाराजगी, फिर भी काम सुस्त
30 अप्रैल को हुई एक समीक्षा बैठक के दौरान, पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने टर्मिनल परियोजना की प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया था। उन्होंने अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर ट्रैक लिंकिंग, चारदीवारी निर्माण, पुल विस्तार और S&T भवन सहित पहले चरण के कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया था। उन्होंने अधिकारियों को दूसरे चरण के डिजाइन की तैयारी में भी तेजी लाने के निर्देश दिए।
हालांकि, इस निर्देश के लगभग दो महीने बाद भी साइट पर कोई खास प्रगति देखने को नहीं मिली है। रेलवे सूत्रों ने बताया कि समीक्षा के बाद चारदीवारी के काम में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन अन्य प्रमुख घटकों में अपेक्षित गति से काम नहीं हो पाया है।
लागत बढ़ने का डर, यात्रियों को इंतजार
परियोजना में देरी से इसके पूरा होने की समय-सीमा और पटना जंक्शन पर दबाव कम करने की रेलवे की योजना पर चिंताएं बढ़ गई हैं।
रेलवे अवसंरचना से जुड़े विशेषज्ञों ने भी चिंता व्यक्त की है कि लंबे समय तक देरी से परियोजना की लागत बढ़ सकती है। अनुमान बताते हैं कि यदि निर्माण कार्य में लगातार देरी होती रही, तो लागत में लगभग 15% की वृद्धि हो सकती है। रेलवे ने अभी तक पहले चरण के तहत योजनाबद्ध प्रमुख अवसंरचना को पूरा नहीं किया है, जिससे यह टर्मिनल अपनी मूल निर्धारित समय-सीमा से काफी पीछे चल रहा है। इस देरी के कारण पटना जंक्शन पर यात्रियों की भीड़ कम करने का लक्ष्य फिलहाल दूर की कौड़ी बना हुआ है।








