Muzaffarpur News: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक 18 वर्षीय छात्रा को मानव तस्करों के चंगुल से 85 दिनों बाद सुरक्षित बचाया गया है। 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली यह छात्रा अपने भाई से विवाद के बाद घर छोड़ कर चली गई थी, जिसके बाद वह मानव तस्करी का शिकार हो गई। उसे कथित तौर पर दो बार बेचा गया, शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और यौन शोषण का भी सामना करना पड़ा। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए छात्रा को भागलपुर के एक रेड लाइट एरिया से बरामद किया है।
कैसे फंसी तस्करों के जाल में?
जानकारी के अनुसार, छात्रा मुजफ्फरपुर के गायघाट थाना क्षेत्र की निवासी है। 10 मई को भाई की डांट के बाद वह घर से निकल गई थी और लापता हो गई। परिजनों ने 12 मई को अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शुरुआती जांच में एक स्थानीय युवक पर संदेह था, लेकिन पुलिस ने बाद में उसकी संलिप्तता से इनकार कर दिया। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह मुजफ्फरपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन पर अकेली बैठकर रो रही थी, तभी एक व्यक्ति उसके पास आया। उसने सहानुभूति दिखाते हुए कोलकाता में अच्छी नौकरी दिलाने का वादा किया। उस पर भरोसा करके छात्रा आरोपी के साथ चली गई, लेकिन कोलकाता पहुंचते ही उसे कथित तौर पर बेच दिया गया और वह एक रेड लाइट एरिया में फंस गई।





दो बार बेची गई, झेलना पड़ा अमानवीय अत्याचार
पुलिस को दिए अपने बयान में पीड़िता ने बताया कि जब उसने विरोध किया तो उसे बेरहमी से पीटा गया। कई दिनों तक उसे खाना नहीं दिया गया, नशीली दवाएं दी गईं और बार-बार उसका यौन शोषण किया गया। लगभग एक महीने बाद उसे कथित तौर पर दूसरी बार भागलपुर जिले के इशीपुर बाराहाट थाना क्षेत्र के सिवानपुर स्थित एक अन्य रेड लाइट एरिया में बेच दिया गया, जहां उस पर अत्याचार जारी रहा। पुलिस का कहना है कि तस्कर उसे तीसरी जगह बेचने की तैयारी कर रहे थे, तभी उसे बचा लिया गया।
पुलिस ने ऐसे किया रेस्क्यू, सामना करना पड़ा जबरदस्त विरोध
वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) कांतेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर लापता छात्रा का पता लगाने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। जांच अधिकारी पूजा कुमारी ने कई जिलों में तलाशी अभियान चलाया। पुलिस ने छात्रा की तस्वीर संभावित तस्करी वाले ठिकानों पर प्रसारित की और अपने खुफिया तंत्र को सक्रिय किया। दो दिन पहले पुलिस को सूचना मिली कि भागलपुर के सिवानपुर रेड लाइट एरिया में एक घर के अंदर उस तस्वीर से मिलती-जुलती एक लड़की को बंधक बनाकर रखा गया है। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए विशेष टीम मौके पर पहुंची, निगरानी की, घर की पहचान की और छापा मारा। पुलिस ने बताया कि बचाव अभियान के दौरान संदिग्ध तस्करों से कड़ी टक्कर मिली, जिससे शारीरिक टकराव की स्थिति बन गई। तनाव बढ़ने पर जांच अधिकारी पूजा कुमारी को आत्मरक्षा में अपनी सर्विस पिस्तौल निकालनी पड़ी। लगभग 52 मिनट के संघर्ष के बाद पुलिस ने छात्रा को सफलतापूर्वक बचा लिया। इस अभियान के दौरान पुलिस को नालंदा की एक और किशोरी भी बंधक मिली, जिसने मदद की गुहार लगाई और उसे भी बचा लिया गया।
दोनों लड़कियों को मुजफ्फरपुर लाया गया। बचाई गई छात्रा का बयान अदालत के समक्ष दर्ज किया गया, जहां उसने अपनी बड़ी बहन के साथ रहने की इच्छा व्यक्त की। अधिकारियों ने उसे उसके परिवार को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नालंदा की बचाई गई नाबालिग के संबंध में नालंदा पुलिस को भी सूचित कर दिया गया है। एसडीपीओ (पूर्व-I) आलय वत्स ने बताया कि यह लड़की 10 मई को लापता हुई थी और 12 मई को अपहरण का मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने कहा कि पुलिस तब से लगातार छापेमारी कर रही थी, जिसके परिणामस्वरूप सफल बचाव हुआ। पुलिस अब मानव तस्करी नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने और इस अपराध के पीछे के व्यापक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करने में जुटी है।







