Bihar Panchayat Sarkar Bhawan: स्थानीय निकायों को सशक्त करने की दिशा में बिहार के पंचायती राज विभाग ने एक महत्वपूर्ण और कड़ा फैसला लिया है। विभाग के सचिव मनोज कुमार ने पंचायत सरकार भवनों को तेजी से क्रियाशील बनाने और उनकी निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होगी, जिसमें वेतन कटौती भी शामिल है।
शुक्रवार, 07 अगस्त 2026 को विकास भवन में आयोजित एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए गए। इस बैठक में राज्य के सभी जिलों के उप विकास आयुक्त (DDC), जिला पंचायत राज पदाधिकारी (DPRO) और जिला परिषद के अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, पंचायत सरकार भवनों की मौजूदा स्थिति और मुख्यमंत्री सहयोग पोर्टल पर प्राप्त मामलों की गहन समीक्षा करना था।






पंचायत सरकार भवनों को जल्द करें क्रियाशील, होगी कड़ी निगरानी
सचिव मनोज कुमार ने जोर देकर कहा कि जिन Bihar Panchayat Sarkar Bhawan का हस्तांतरण हो चुका है, उन्हें बिना किसी देरी के पूरी तरह से चालू किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि इन क्रियाशील भवनों की लगातार निगरानी की जाए। यदि किसी भी पंचायत सरकार भवन को चालू करने में अनावश्यक विलंब होता है, तो इसकी सीधी जवाबदेही संबंधित प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी (BPRO) और पंचायत सचिव की तय की जाएगी।
बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य, लापरवाही पर कटेगा वेतन
बैठक में एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया गया कि पंचायत सरकार भवनों में कार्यरत कर्मियों का वेतन भुगतान केवल बायोमीट्रिक उपस्थिति के आधार पर ही किया जाएगा। सचिव ने साफ किया कि अगर बिना बायोमीट्रिक हाजिरी के वेतन का भुगतान होता है, तो इसकी पूरी जवाबदेही जिला पंचायत राज पदाधिकारी की होगी। ऐसे मामलों में आवश्यकतानुसार उनके वेतन से राशि की वसूली भी की जा सकती है।
सचिव श्री मनोज कुमार ने कहा, ‘विभाग की सभी योजनाओं की प्रत्येक मानक पर नियमित समीक्षा होगी तथा प्रदर्शन आधारित मॉनिटरिंग की जाएगी। खराब प्रदर्शन करने वाले जिला पंचायत राज पदाधिकारियों एवं प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए शोकॉज जारी किया जाएगा।’
सभी उप विकास आयुक्तों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे स्वयं पंचायत सरकार भवनों का नियमित निरीक्षण करें। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि इन भवनों में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। यदि कहीं कोई कमी पाई जाती है, तो संबंधित पदाधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाए।
सेवाओं का त्वरित निष्पादन, मृत्यु प्रमाण पत्र पर भी निर्देश
बैठक में मुख्यमंत्री सहयोग पोर्टल पर विभाग से संबंधित मामलों की भी समीक्षा की गई। पोर्टल पर कुल 20,783 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से 18,620 मामलों का निष्पादन सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, 1,103 मामलों को नियमानुसार जांच के बाद अस्वीकृत किया गया है। सचिव ने शेष लंबित मामलों का भी शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को आयोजित होने वाले पंचायत विकास दिवस की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसके तहत ग्राम सभाओं के आयोजन और उनसे प्राप्त आकांक्षाओं (Aspirations) के निष्पादन की जानकारी ली गई। इसके साथ ही, विभाग द्वारा संचालित मुक्तिधाम, शवदाह गृह और कब्रिस्तान के निर्माण कार्यों की भी समीक्षा हुई। 1 अप्रैल 2026 से अब तक 228 निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके हैं। इसी अवधि में 6,608 अंत्येष्टियों के विरुद्ध 6,273 मृत्यु प्रमाण-पत्र भी निर्गत किए जा चुके हैं। शेष निर्माण कार्यों और लंबित मृत्यु प्रमाण-पत्रों के निर्गमन को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
इस बैठक में अपर सचिव डॉ. आदित्य प्रकाश, अपर सचिव श्री नजर हुसैन, संयुक्त सचिव मो. वसीम अहमद सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। इन कड़े निर्देशों से बिहार में स्थानीय स्तर पर सेवाओं की गुणवत्ता और अधिकारियों की जवाबदेही में सुधार आने की उम्मीद है।








