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बिहार में बड़ा ऐलान! अब मंत्री-अफसरों के बच्चे भी जाएंगे सरकारी स्कूल, CM Samrat ने बताया – कब से होगा प्रभावी| साथ में NEET और JEE की तैयारी भी!

Bihar Education: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि मंत्री, विधायक और जिला स्तर के अफसर भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएंगे, यह व्यवस्था एक से दो साल में लागू होगी।

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Bihar Education: बिहार में अब सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने वाली है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसके तहत मंत्री, विधायक और सरकारी अधिकारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में ही पढ़ाएंगे। यह निर्णय राज्य की शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “जब सक्षम परिवारों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ने लगेंगे, तभी यह माना जाएगा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव आया है।”

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एक से दो साल में लागू होगा नया नियम, शिक्षा विभाग को निर्देश

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह व्यवस्था लागू करने के लिए शिक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि अगले एक से दो सालों के भीतर यह नियम प्रभावी हो जाएगा। इस फैसले के पीछे का उद्देश्य सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को बढ़ाना और उनमें आम जनता का विश्वास बहाल करना है। अभी तक इन स्कूलों में मुख्य रूप से गरीब परिवारों के बच्चे ही पढ़ने आते थे।

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सरकार सरकारी स्कूलों को हाईटेक बनाने की दिशा में भी लगातार काम कर रही है। राज्य में 551 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल खोले गए हैं और लाइव क्लासेज की शुरुआत भी हो रही है। इसके साथ ही, सरकारी स्कूलों में नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी विशेष व्यवस्था की जा रही है।

बिहार में बड़ा बदलाव! अब सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे मंत्री-विधायकों के बच्चे, सीएम सम्राट चौधरी का कड़ा आदेश

Bihar Government Schools: अब बिहार के सरकारी स्कूलों में मंत्री, विधायक और जिला स्तर तक के अफसरों के बच्चे भी शिक्षा ग्रहण करेंगे. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस संबंध में शिक्षा विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं, जिसका लक्ष्य अगले एक से दो साल में इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करना है. यह पहल राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि जब सक्षम परिवारों के बच्चे भी सरकारी विद्यालयों में पढ़ने लगेंगे, तभी यह माना जाएगा कि शिक्षा के क्षेत्र में सही मायने में सुधार हुआ है. उनका कहना है कि वर्तमान में सरकारी स्कूलों में सिर्फ गरीब परिवारों के बच्चे ही पढ़ते हैं, लेकिन सरकार इन संस्थानों को हाईटेक और आधुनिक बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है.

सरकारी स्कूलों में अब NEET और JEE की तैयारी भी

शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने के लिए बिहार सरकार कई बड़े कदम उठा रही है. राज्य में 551 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल खोले गए हैं, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं. इसके साथ ही, लाइव क्लासेज की शुरुआत की जा रही है, जिससे दूरदराज के छात्र भी बेहतर शिक्षण सामग्री का लाभ उठा सकें. एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत, सरकारी स्कूलों में अब नीट (NEET) और जेईई (JEE) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की व्यवस्था भी की जा रही है, जिससे छात्रों को महंगे कोचिंग संस्थानों पर निर्भर न रहना पड़े.

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, ‘जब सक्षम परिवारों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ने लगेंगे, तभी यह माना जाएगा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव आया है.’

शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाने की मजबूरी होगी खत्म

सम्राट चौधरी ने पटना के ज्ञान भवन में गुरु रविदास की 650वीं जयंती वर्ष पर आयोजित समरसता संकल्प अभियान की शुरुआत करते हुए ये बातें कहीं. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयासों से नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित किया गया है. अब सरकार भागलपुर में विक्रमशिला यूनिवर्सिटी को स्थापित करने पर भी तेजी से काम कर रही है.

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मुख्यमंत्री ने इस बात पर चिंता जताई कि आज भी बिहार के लाखों बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत बिहार सरकार 18 हजार करोड़ रुपये खर्च कर अपने बच्चों को दूसरे राज्यों में पढ़ने भेजती है. इस स्थिति को बदलने के लिए, सरकार ने 211 नए डिग्री कॉलेज खोले हैं, जिससे अब छात्रों को पढ़ाई के लिए अपने प्रखंड से बाहर नहीं जाना पड़ेगा.

400 से अधिक नए डिग्री कॉलेज खोलने की योजना

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मठ और मंदिरों से भी समाज सेवा में आगे आकर एक-एक स्कूल एवं कॉलेज खोलने का आग्रह किया. उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार ऐसे संस्थानों को मान्यता प्रदान करेगी. इसके अलावा, उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि आने वाले दिनों में राज्य में 400 से अधिक और डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे. इन पहलों से बिहार की शिक्षा व्यवस्था में एक नई क्रांति आने की उम्मीद है, जिससे हर तबके के बच्चों को बेहतर और सुलभ शिक्षा मिल सकेगी.

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नालंदा के बाद अब विक्रमशिला यूनिवर्सिटी पर काम

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को पटना के ज्ञान भवन में गुरु रविदास की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर ‘समरसता संकल्प अभियान’ की शुरुआत की। इस दौरान सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने बिहार शिक्षा क्षेत्र में हो रहे कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयासों से नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार का जिक्र किया और बताया कि अब भागलपुर में विक्रमशिला यूनिवर्सिटी की स्थापना पर भी काम चल रहा है।

सम्राट चौधरी ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि आज भी बिहार के लाखों छात्रों को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। उन्होंने ‘स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना’ का उल्लेख करते हुए बताया कि बिहार सरकार इस योजना के तहत 18 हजार करोड़ रुपये खर्च कर अपने बच्चों को बाहर पढ़ने भेजती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए राज्य में 211 नए डिग्री कॉलेज खोले गए हैं, ताकि बच्चों को अपने प्रखंड से बाहर न जाना पड़े।

मठ-मंदिर भी खोलें स्कूल-कॉलेज, सरकार देगी मान्यता

मुख्यमंत्री ने मठ और मंदिरों से भी आग्रह किया कि वे शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दें और एक-एक कॉलेज या स्कूल खोलें। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार ऐसे संस्थानों को मान्यता प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने आने वाले दिनों में राज्य में 400 से अधिक और नए डिग्री कॉलेज खोलने की भी घोषणा की है, जिससे उच्च शिक्षा तक सबकी पहुंच आसान हो सकेगी।

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