Bihar Police: बिहार पुलिस में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल होने जा रहा है। राज्य के 11 उप-महानिरीक्षक (डीआईजी) मिड करियर ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद रवाना होंगे। बिहार के 11 पुलिस उप-महानिरीक्षक (डीआईजी) रैंक के अधिकारी हैदराबाद स्थित Sardar Vallabhbhai Patel National Police Academy में मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम (फेज-4) के लिए जाएंगे। यह प्रशिक्षण 31 अगस्त से 25 सितंबर 2026 तक आयोजित होगा, जिसके लिए गृह विभाग ने आदेश और अस्थायी प्रभार की व्यवस्था जारी कर दी है। गृह विभाग ने आदेश और अस्थायी प्रभार की व्यवस्था जारी कर दी है। इन वरिष्ठ अधिकारियों के प्रशिक्षण पर जाने के कारण गृह विभाग ने कई महत्वपूर्ण पुलिस रेंजों और इकाइयों के प्रभार में अस्थायी बदलाव का आदेश जारी किया है, ताकि कानून व्यवस्था और पुलिसिंग का काम सुचारू रूप से चलता रहे।
यह महत्वपूर्ण प्रशिक्षण 31 अगस्त से शुरू होकर 25 सितंबर तक चलेगा। सभी डीआईजी राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, हैदराबाद में इस विशेष कार्यक्रम में भाग लेंगे। राज्य की सुरक्षा और आपराधिक मामलों की निगरानी से जुड़े कई डीआईजी इस दौरान अपने मूल पदों से दूर रहेंगे, जिसके लिए पहले से ही वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।






मुजफ्फरपुर और बेगूसराय में बदले प्रभार, कौन संभालेगा कमान?
गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्रशिक्षण अवधि के दौरान कई अहम जिलों और पुलिस इकाइयों की जिम्मेदारी अन्य अधिकारियों को सौंपी गई है। मुजफ्फरपुर डीआईजी का अतिरिक्त प्रभार सत्यनारायण कुमार को दिया गया है। वहीं, बेगूसराय डीआईजी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी राकेश कुमार संभालेंगे।
इसके अलावा, बेतिया और दरभंगा रेंज में भी अस्थायी प्रभार में बदलाव किया गया है। राज्य की विशेष इकाइयों जैसे एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वाड), एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स), सीआईडी (क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) और डायल-112 के डीआईजी भी इस प्रशिक्षण में शामिल रहेंगे। इन इकाइयों में भी आंतरिक व्यवस्था के तहत कामकाज जारी रखने के लिए सात अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जाएगी।
पुलिसिंग पर नहीं पड़ेगा असर, प्रशिक्षण के बाद मूल पद पर लौटेंगे अधिकारी
गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन सभी अस्थायी प्रभार परिवर्तनों के बावजूद पुलिसिंग के कामकाज पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। सभी इकाइयां सामान्य रूप से कार्य करती रहेंगी और कानून व्यवस्था बनी रहेगी।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, सभी 11 डीआईजी अपने मूल पदों पर वापस लौट आएंगे और अपनी जिम्मेदारियों को दोबारा संभालेंगे। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों के कौशल और दक्षता को बढ़ाना है, जिससे भविष्य में बिहार में बेहतर पुलिसिंग सुनिश्चित हो सके।










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