Bihar Child Labor: बिहार में बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में एक बड़ी पहल हुई है। दरभंगा जिले में अब 54 पंचायतें अगले 90 दिनों के भीतर बाल श्रम से पूरी तरह मुक्त हो जाएंगी। जिलाधिकारी कौशल कुमार ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिसके बाद एक सुनियोजित और समयबद्ध विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बाल एवं किशोर श्रमिकों की पहचान कर उन्हें इस अभिशाप से मुक्ति दिलाना और शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि श्रमायुक्त, बिहार से प्राप्त निर्देशों के आधार पर यह महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। जिले के सभी 18 प्रखण्डों से तीन-तीन पंचायतों का चयन किया गया है। अभियान की कुल अवधि 90 दिन निर्धारित की गई है, जिसके सफल समापन के बाद इन चयनित पंचायतों को औपचारिक रूप से ‘बाल मुक्त पंचायत’ घोषित किया जाएगा। यह पहल बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।






जिलाधिकारी श्री कौशल कुमार ने कहा, ‘बाल श्रम एक सामाजिक अभिशाप है, जिसके उन्मूलन के लिए प्रशासन के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। सामूहिक प्रयासों से ही जिले की चयनित पंचायतों को निर्धारित समय-सीमा में बाल मुक्त पंचायत घोषित करने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकेगा।’
इन 54 पंचायतों को बनाया जाएगा बाल मुक्त
इस अभियान के तहत निम्नलिखित 54 पंचायतों को बाल श्रम से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इन पंचायतों में चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाएगी ताकि कोई भी बच्चा श्रम में संलग्न न रहे।
| पंचायत का नाम | पंचायत का नाम | पंचायत का नाम |
|---|---|---|
| अदलपुर | लोआम | नैनाघाट |
| अघरा महापरा | पिड़री | टिकापट्टी |
| मझोलिया | पौराम | पतौर |
| बनसारा | कोठिया | लालगंज |
| धनौल | हरहच्चा | बलिगांव |
| अरौला | गोदाईपट्टी | गौढ़ेला |
| राढ़ी दक्षिणी | राढ़ी उत्तरी | सहसपुर |
| कटका | निस्ता | अस्थुआ |
| लदहो | कमरकला | रोहार महमुदा |
| पोखरभिंडा | राजा खरवार | ठेंगहा |
| चनौर | भंडारिसम | जतुका पैकटोल |
| झगरूआ | झगरूआ तरवाड़ा | नरकटिया भंडरिया |
| मकरमपुर | सझुआर | हबी भौआर |
| हरिनगर | भादर | औराही |
| लटहा तुमौल सुहथ | हनुमाननगर | नरमा नवानगर |
| बरौम | गौड़ामानसिंह | कसरौर करकौली |
| पुनहद | गनौन | तुमौल |
| उसरी | भिण्डुआ | ईटहर |
यह व्यापक सूची दर्शाती है कि जिला प्रशासन कितने बड़े पैमाने पर इस समस्या से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे इन क्षेत्रों के हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।
दोषी नियोजकों पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई
जिलाधिकारी ने सभी श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्हें अपने-अपने क्षेत्राधीन चयनित पंचायतों में प्रतिष्ठानों, दुकानों और घरेलू कार्यों में संलग्न बाल एवं किशोर श्रमिकों की पहचान कर उन्हें तुरंत श्रम से मुक्त कराने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया है। इसके साथ ही, बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत दोषी नियोजकों के विरुद्ध विधिसम्मत और कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है।
सभी प्रखण्ड विकास पदाधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि श्रम से मुक्त कराए गए प्रत्येक बच्चे का निकटतम विद्यालय में नामांकन हो सके, ताकि वे अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर सकें। वहीं, प्रखण्ड पंचायत राज पदाधिकारियों को चयनित पंचायतों में गठित पंचायत स्तरीय टास्क फोर्स की नियमित बैठकें आयोजित करने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर निर्धारित अवधि में लक्ष्य प्राप्त करने का निर्देश दिया गया है। यह समेकित प्रयास बिहार में बाल श्रम की जड़ें उखाड़ने में सहायक होगा।








