Bihar Har Ghar Tiranga: स्वतंत्रता दिवस 2026 और ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में चल रहे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से लेकर आजीविका को नई रफ्तार वाली बदलाव की तस्वीर सामने आई है। समस्तीपुर से सुपौल, जहानाबाद, मसौढ़ी और बेगूसराय में जीविका दीदियाँ बड़े उत्साह के साथ राष्ट्रीय तिरंगों का निर्माण कर रही हैं। वहीं, बेगूसराय में जीविका दीदी की रसोई और जीविका दीदी अधिकार केंद्र जैसी नई पहल को भी प्रशासन का सहयोग मिल रहा है।मुंगेर जिले की जीविका दीदियां पूरे उत्साह के साथ तिरंगा झंडे तैयार करने में जुटी हैं। जिले के सभी 9 प्रखंडों में बड़े पैमाने पर तिरंगों का निर्माण किया जा रहा है। तिरंगा निर्माण के कार्य से जिले की करीब 500 जीविका दीदियां जुड़ी हुई हैं।
समस्तीपुर में तैयार होंगे 80 हजार झंडे
समस्तीपुर में विभिन्न सरकारी विभागों, औद्योगिक संस्थानों, सामुदायिक संगठनों और आम नागरिकों की ओर से जीविका दीदियों को 80 हजार से अधिक तिरंगे झंडों के आर्डर प्राप्त हुए हैं। प्रत्येक झंडे की कीमत मात्र 25 रुपये तय की गई है, भारी मांग को समय पर पूरा करने के लिए जिले के सभी प्रखंडों में संचालित सिलाई केंद्रों और घरों में 1600 से अधिक जीविका दीदियां दिन-रात काम कर रही हैं।
बिहार के मसौढ़ी में जीविका दीदियां नई मजबूती दे रही हैं। अनुमंडल पदाधिकारी धनराज कुमार के निर्देश पर जीविका समूहों से जुड़ी महिलाएं इन दिनों पूरे उत्साह के साथ राष्ट्रध्वज तैयार करने में जुटी हैं। प्रखंड क्षेत्र में कुल 3700 तिरंगे बनाए जा रहे हैं।
तीन केंद्रों पर युद्धस्तर पर चल रहा काम
जीविका समूहों से जुड़ी महिलाएं मसौढ़ी के तीन अलग-अलग केंद्रों पर सामूहिक रूप से कपड़े की कटाई और सिलाई कर तिरंगे को आकार दे रही हैं। राष्ट्रध्वज की गरिमा और उसके निर्धारित मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। प्रखंड जीविकोपार्जन पदाधिकारी दिग्विजय नारायण समदर्शी ने बताया कि सभी तीनों केंद्रों पर युद्धस्तर पर झंडे तैयार किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत अधिक से अधिक घरों तक राष्ट्रध्वज पहुंचाना है।
रोजगार के साथ राष्ट्रभक्ति का गौरव
जीविका दीदियों के लिए तिरंगा तैयार करने का यह काम केवल रोजगार का साधन नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय पर्व से जुड़ने का एक गौरवपूर्ण अवसर भी है। महिलाएं अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहती हैं:
उनके हाथों से तैयार किया गया तिरंगा जब घरों, प्रतिष्ठानों और संस्थानों पर लहरायेगा, तो उन्हें विशेष गर्व महसूस होगा।
प्रशासन का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर तो मिल ही रहा है, साथ ही राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी भी बढ़ रही है। महिलाओं की कड़ी मेहनत से बन रहे ये तिरंगे जमीनी स्तर पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
12 अगस्त को निकलेगी तिरंगा यात्रा
‘हर घर तिरंगा’ अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए लोगों से 12 अगस्त तक सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है। इसी क्रम में, 12 अगस्त को मसौढ़ी प्रखंड क्षेत्र में एक भव्य तिरंगा यात्रा भी निकाली जाएगी। प्रशासन और जीविका समूहों की इस पहल से स्वतंत्रता दिवस से पहले पूरे मसौढ़ी में राष्ट्रभक्ति का एक विशेष माहौल बन गया है।








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