Bihar Kanwar Yatra: सावन के पवित्र महीने में बिहार के सुल्तानगंज से शुरू हुई कांवड़ यात्रा में आस्था और भक्ति के कई अनूठे रंग देखने को मिल रहे हैं। अजगैबीनाथ गंगा धाम से झारखंड स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम तक जाने वाले कच्ची कांवड़िया पथ पर इन दिनों एक शिवभक्त की अनोखी यात्रा चर्चा का विषय बनी हुई है। पश्चिम बंगाल के रहने वाले संतोष साह अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर 105 किलोमीटर की दुर्गम पैदल यात्रा कर रहे हैं। यह नजारा देखकर हर कोई हैरान है, क्योंकि आमतौर पर लोग बाबा बैद्यनाथ से अपनी मुरादें पूरी कराने के लिए आते हैं, लेकिन संतोष का उद्देश्य बिल्कुल अलग है।
अजब-गजब: आंखों पर पट्टी बांधकर 105 KM की कांवड़ यात्रा, वजह जान आप भी करेंगे सलाम!
Bihar Kanwar Yatra: भागलपुर: सावन के पवित्र महीने में बिहार के कच्ची कांवड़िया पथ पर इस बार आस्था का एक ऐसा अद्भुत रंग देखने को मिल रहा है, जो हर किसी को हैरान कर रहा है। सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ गंगा धाम से झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम तक जाने वाले इस मार्ग पर पश्चिम बंगाल के एक शिवभक्त संतोष साह ने महादेव के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा का एक अद्वितीय उदाहरण पेश किया है। वह अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर करीब 105 किलोमीटर की बेहद कठिन और दुर्गम पैदल यात्रा कर रहे हैं।


संतोष साह की यह अनोखी भक्ति इस पूरे मार्ग पर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। आमतौर पर भक्त बाबा बैद्यनाथ से अपनी मन्नतें पूरी कराने की गुहार लगाते हैं, लेकिन संतोष साह की इस यात्रा का उद्देश्य बिल्कुल अलग है। वह बाबा भोलेनाथ के दरबार में कुछ मांगने नहीं, बल्कि उन्हें दिल से धन्यवाद देने जा रहे हैं।
बिन मांगे सब कुछ दिया महादेव ने, अब बस धन्यवाद बाकी
संतोष साह ने भावुक होकर बताया कि महादेव ने उन्हें बिना मांगे ही सब कुछ दे दिया है। उनके दो बेटे और एक बेटी हैं, जिन्हें वह भोलेनाथ का दिया हुआ सबसे अनमोल उपहार मानते हैं। संतोष के अनुसार, जब भगवान ने उनकी झोली पहले ही भर दी है, तो अब उनके पास मांगने के लिए कुछ भी नहीं बचा है। उनकी यह यात्रा केवल महादेव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है।
संतोष साह ने कहा, “महादेव ने मुझे बिना मांगे ही सब कुछ दे दिया है। मेरे दो बेटे और एक बेटी हैं, वे मेरे लिए भोलेनाथ का सबसे अनमोल उपहार हैं। अब मेरे पास कुछ मांगने को नहीं है, बस धन्यवाद देने जा रहा हूं।”
आंखों पर पट्टी बांधकर 105 KM का कठिन संकल्प
संतोष ने बताया कि सुल्तानगंज में उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल भरने के बाद अचानक उनके मन में एक संकल्प जागा। उन्होंने उसी क्षण यह प्रण लिया कि बाबा धाम पहुंचने तक वह अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर ही पैदल यात्रा करेंगे। उनका यह भी कहना है कि रास्ते में वह महादेव के अलावा किसी अन्य का दर्शन नहीं करेंगे। इस कठिन संकल्प को पूरा करने में उनके साले आलोक साव उनके लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं। आलोक इस पूरी यात्रा में लगातार संतोष के साथ चल रहे हैं, उनका हाथ थामकर रास्ते के गड्ढों, पत्थरों और अन्य परिस्थितियों से उन्हें अवगत करा रहे हैं।
अटूट आस्था और निस्वार्थ सहयोग की मिसाल
कच्ची कांवड़िया पथ पर जो भी इस दृश्य को देख रहा है, वह संतोष साह की अटूट आस्था और उनके साले आलोक साव के इस निस्वार्थ सहयोग को देखकर दांतों तले उंगली दबा रहा है। यह अनूठी Bihar Kanwar Yatra सोशल मीडिया से लेकर कांवड़िया पथ पर हर किसी के बीच कौतूहल और प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है। यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि भक्ति, विश्वास और मानवीय संबंधों की एक असाधारण कहानी है, जो हर गुजरते दिन के साथ और अधिक लोगों को प्रेरित कर रही है।
मांगने नहीं, महादेव को धन्यवाद देने जा रहे संतोष साह
संतोष साह ने अपनी इस असाधारण यात्रा के पीछे का कारण बताते हुए कहा है कि,
“वह बाबा भोलेनाथ के दरबार में कुछ मांगने नहीं, बल्कि उन्हें दिल से धन्यवाद देने जा रहे हैं।”
उन्होंने भावुक होकर बताया कि महादेव ने उन्हें बिना मांगे ही सब कुछ दे दिया है। संतोष के दो बेटे और एक बेटी है, जिन्हें वह भोलेनाथ का दिया हुआ सबसे अनमोल उपहार मानते हैं। उनका कहना है कि,
“जब भगवान ने झोली पहले ही भर दी है, तो अब उनके पास मांगने के लिए कुछ नहीं बचा है।”
यह अनूठी सोच कांवड़ पथ पर हर किसी का ध्यान खींच रही है।
आंखों पर पट्टी बांधकर पूरी करेंगे यात्रा
संतोष साह ने बताया कि सुल्तानगंज में उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल भरने के बाद उनके मन में अचानक एक संकल्प जागा। उन्होंने प्रण लिया कि वे बाबा धाम पहुंचने तक अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर ही पैदल यात्रा करेंगे। उनका अटूट विश्वास है कि इस दौरान वे महादेव के अलावा किसी अन्य का दर्शन नहीं करेंगे। इस कठिन संकल्प को पूरा करने में उनके साले आलोक साव उनके मार्गदर्शक बने हुए हैं। आलोक इस पूरी यात्रा में संतोष का हाथ थामकर चल रहे हैं और रास्ते के गड्ढों, पत्थरों व अन्य बाधाओं से उन्हें बचाते हुए लगातार उनका साथ दे रहे हैं।
अनोखी आस्था बनी प्रेरणा का केंद्र
कच्ची कांवड़िया पथ पर जो भी इस दृश्य को देख रहा है, वह संतोष साह की अटूट आस्था और उनके साले आलोक साव के निस्वार्थ सहयोग को देखकर दांतों तले उंगली दबा रहा है। यह अनूठी Bihar Kanwar Yatra सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है और कांवड़ पथ पर चल रहे अन्य श्रद्धालुओं के लिए कौतूहल और प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है। संतोष की यह यात्रा दिखाती है कि भक्ति केवल मांगने में नहीं, बल्कि कृतज्ञता और अटूट विश्वास में भी निहित है।








